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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

महाराष्ट्र ने क्रिप्टो को जमाकर्ता संरक्षण कानून में शामिल किया, निवेशकों को मिलेगी बड़ी सुरक्षा

ताजा खबरेंप्रकाशित3 जुल॰ 2026

महाराष्ट्र सरकार ने क्रिप्टो परिसंपत्तियों को जमाकर्ता संरक्षण कानून के दायरे में शामिल कर दिया है। जानिए नए कानून का निवेशकों, क्रिप्टो कंपनियों और डिजिटल संपत्तियों पर क्या असर पड़ेगा।

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क्रिप्टो निवेशकों के लिए महाराष्ट्र से एक बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। राज्य विधानसभा ने महाराष्ट्र जमाकर्ता हित संरक्षण अधिनियम (MPID) में संशोधन को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद पहली बार क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों को भी इस कानून के दायरे में शामिल किया गया है।

इस बदलाव का उद्देश्य डिजिटल परिसंपत्तियों से जुड़े वित्तीय घोटालों में निवेशकों को बेहतर सुरक्षा देना और ठगी के मामलों में उनकी रकम की वसूली की प्रक्रिया को मजबूत बनाना है। अब यदि कोई वित्तीय संस्था क्रिप्टो परिसंपत्तियों के जरिए निवेशकों से धोखाधड़ी करती है, तो जांच एजेंसियां इन डिजिटल संपत्तियों को भी जब्त करने और कानूनी कार्रवाई के लिए इस्तेमाल कर सकेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत में क्रिप्टो परिसंपत्तियों को लेकर राज्य स्तर पर उठाए गए सबसे महत्वपूर्ण कानूनी कदमों में से एक है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है, वहीं धोखाधड़ी करने वाली संस्थाओं पर भी दबाव बढ़ेगा।

नए कानून में क्या बदला?

संशोधित कानून के तहत अब वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियां, जिनमें क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन आधारित अन्य डिजिटल संपत्तियां शामिल हैं, MPID कानून के अंतर्गत आएंगी। पहले यह कानून मुख्य रूप से उन वित्तीय संस्थाओं पर लागू होता था जो लोगों से धन जुटाकर धोखाधड़ी करती थीं।

संशोधन के बाद यदि किसी संस्था पर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी का आरोप साबित होता है, तो उसकी क्रिप्टो होल्डिंग भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल परिसंपत्तियों का इस्तेमाल निवेशकों की रकम छिपाने के लिए न किया जा सके।

इसके साथ ही कानून में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है। यदि कोई वित्तीय संस्था विशेष न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ अपील करना चाहती है, तो उसे पहले अपनी देनदारी का 50 प्रतिशत जमा करना होगा। इससे लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा होने की उम्मीद है।

निवेशकों और क्रिप्टो कंपनियों पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों के अनुसार, इस संशोधन का सबसे बड़ा लाभ उन लोगों को मिलेगा जो डिजिटल परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं। यदि भविष्य में किसी क्रिप्टो निवेश योजना या डिजिटल निवेश मंच के जरिए धोखाधड़ी होती है, तो जांच एजेंसियों के पास कार्रवाई के अधिक कानूनी अधिकार होंगे।

दूसरी ओर, क्रिप्टो कारोबार से जुड़ी कंपनियों और निवेश मंचों को अब अपने परिचालन में अधिक पारदर्शिता रखनी होगी। कानून का उद्देश्य वैध कारोबार को रोकना नहीं, बल्कि निवेशकों को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाना है।

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हाल के वर्षों में भारत में कई क्रिप्टो निवेश योजनाओं और फर्जी डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म से जुड़े मामलों ने नियामकों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे मामलों को देखते हुए यह संशोधन एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या यह पूरे देश में क्रिप्टो नियमन की शुरुआत है?

हालांकि यह कानून केवल महाराष्ट्र राज्य में लागू होगा, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका असर राष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल सकता है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी साबित होती है, तो दूसरे राज्य भी इसी तरह के कानूनी बदलावों पर विचार कर सकते हैं।

भारत में फिलहाल क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर कर व्यवस्था लागू है और धन शोधन रोकथाम कानून के तहत भी कई गतिविधियां पहले से निगरानी में हैं। लेकिन निवेशकों की सुरक्षा के लिए अलग कानूनी ढांचा अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। ऐसे में महाराष्ट्र का यह कदम भविष्य की नीति के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

आगे क्या है उम्मीद?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टो उद्योग के विकास के साथ निवेशकों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। यदि डिजिटल परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों में कानूनी स्पष्टता बढ़ती है, तो इससे उद्योग को भी लंबे समय में फायदा होगा क्योंकि भरोसेमंद माहौल बनने से जिम्मेदार निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

फिलहाल महाराष्ट्र का यह फैसला डिजिटल परिसंपत्तियों को पारंपरिक वित्तीय धोखाधड़ी कानूनों के दायरे में लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अन्य राज्य और केंद्र सरकार भी क्रिप्टो निवेशकों की सुरक्षा के लिए किस तरह के नए नियामकीय कदम उठाते हैं।

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