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Pratik Bhuyan द्वारा लिखित ⁠, Staff Editor.Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षित ⁠, Staff Editor.

भारत में क्रिप्टो पर बढ़ी निगरानी, संसद की रिपोर्ट में सेक्टर को बताया गया ‘हाई रिस्क’

ताजा खबरप्रकाशितMay 25, 2026

संसद की रिपोर्ट में भारत के क्रिप्टो सेक्टर को “हाई रिस्क” बताया गया है। जानिए सरकार क्यों बढ़ा रही है निगरानी, विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर क्या असर पड़ेगा और Web3 इंडस्ट्री का भविष्य क्या हो सकता है।

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भारत में क्रिप्टोकरेंसी सेक्टर पर सरकारी निगरानी अब और सख्त होती दिखाई दे रही है। संसद की एक हालिया रिपोर्ट में क्रिप्टो और Virtual Digital Assets यानी VDA सेक्टर को “हाई रिस्क” बताया गया है। रिपोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और अवैध विदेशी लेनदेन जैसी चिंताओं का जिक्र किया गया है। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि भारत सरकार आने वाले समय में क्रिप्टो सेक्टर पर और कड़े नियम लागू कर सकती है।

रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब भारत दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो बाजारों में तेजी से उभर रहा है। करोड़ों भारतीय निवेशक Bitcoin, Ethereum और दूसरे डिजिटल एसेट्स में निवेश कर रहे हैं, लेकिन अब तक देश में क्रिप्टो के लिए स्पष्ट रेगुलेटरी ढांचा तैयार नहीं हो पाया है।

संसद की रिपोर्ट में क्या कहा गया?

रिपोर्ट के मुताबिक संसदीय समिति को दिए गए सरकारी नोट में क्रिप्टो सेक्टर को “उच्च जोखिम वाला क्षेत्र” बताया गया है। दस्तावेज में कहा गया कि Virtual Digital Assets का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और संदिग्ध विदेशी फंडिंग जैसी गतिविधियों में हो सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म भारतीय निवेशकों को सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन वे पूरी तरह भारतीय कानूनों और टैक्स नियमों का पालन नहीं कर रहे। इसी वजह से सरकार अब निगरानी और अनुपालन पर ज्यादा जोर दे रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में इस तरह की टिप्पणी यह संकेत देती है कि सरकार फिलहाल क्रिप्टो को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाना चाहती है।

30% टैक्स और 1% TDS के बाद भी चिंता बरकरार

भारत सरकार ने 2022 में क्रिप्टो लेनदेन पर 30 प्रतिशत टैक्स और हर ट्रांजैक्शन पर 1 प्रतिशत TDS लागू किया था। उस समय सरकार ने कहा था कि इससे डिजिटल एसेट्स की ट्रैकिंग आसान होगी और टैक्स चोरी पर रोक लगेगी।

हालांकि इंडस्ट्री का कहना है कि भारी टैक्स के बावजूद स्पष्ट रेगुलेशन नहीं होने से निवेशकों और कंपनियों में भ्रम बना हुआ है। कई भारतीय ट्रेडर्स विदेशी प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि कुछ Web3 स्टार्टअप्स ने अपने ऑपरेशन विदेशों में शिफ्ट कर दिए हैं।

क्रिप्टो एक्सचेंजों का दावा है कि अगर सरकार संतुलित नियम लाती है, तो भारत Web3 और blockchain innovation का बड़ा केंद्र बन सकता है।

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सरकार की नजर विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर

हाल के महीनों में भारतीय एजेंसियों ने कई विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई तेज की है। Financial Intelligence Unit यानी FIU-IND ने Binance, KuCoin और कई दूसरी कंपनियों को नोटिस भेजे थे। आरोप था कि ये प्लेटफॉर्म भारत में बिना उचित रजिस्ट्रेशन के काम कर रहे थे।

इसके अलावा सरकार VPN और ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स के जरिए होने वाले क्रिप्टो लेनदेन पर भी नजर रख रही है। अधिकारियों का मानना है कि विदेशी प्लेटफॉर्म्स के जरिए टैक्स अनुपालन और फंड ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है।

हाल ही में कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि सरकार AI आधारित निगरानी टूल्स का इस्तेमाल कर संदिग्ध क्रिप्टो गतिविधियों को ट्रैक करने की तैयारी कर रही है।

RBI और सरकारी एजेंसियों की चिंता

भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI लंबे समय से क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सतर्क रुख अपनाता रहा है। RBI अधिकारियों ने कई बार कहा है कि निजी डिजिटल करेंसी वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है।

सरकारी एजेंसियों की मुख्य चिंता यह है कि क्रिप्टो ट्रांजैक्शन पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बाहर होते हैं, जिससे संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि अब टैक्स विभाग, FIU-IND और दूसरी एजेंसियां मिलकर निगरानी बढ़ा रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत पूरी तरह क्रिप्टो बैन की दिशा में नहीं बढ़ रहा, लेकिन सरकार फिलहाल “कड़ी निगरानी और सीमित अनुमति” वाला मॉडल अपनाती दिखाई दे रही है।

Web3 इंडस्ट्री को अब भी उम्मीद

कड़े टैक्स और बढ़ती जांच के बावजूद भारत का Web3 सेक्टर तेजी से विकसित हो रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय डेवलपर्स blockchain, gaming, AI और decentralized finance प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

इंडस्ट्री प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर सरकार स्पष्ट और संतुलित नियम बनाती है, तो भारत दुनिया के सबसे बड़े Web3 बाजारों में शामिल हो सकता है।

हालांकि मौजूदा स्थिति में निवेशकों और कंपनियों दोनों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि सरकार आने वाले महीनों में नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लाती है या फिर निगरानी और सख्त कर देती है।

आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आने वाले समय में क्रिप्टो सेक्टर के लिए चरणबद्ध रेगुलेशन मॉडल अपना सकता है। इसमें लाइसेंसिंग, टैक्स ट्रैकिंग, KYC और विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर कड़े नियम शामिल हो सकते हैं।

फिलहाल यह साफ है कि सरकार क्रिप्टो सेक्टर को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो चुकी है। संसद की रिपोर्ट ने यह संकेत दे दिया है कि भारत अब डिजिटल एसेट्स को सिर्फ निवेश का साधन नहीं, बल्कि संभावित वित्तीय जोखिम के रूप में भी देख रहा है।


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