
Standard Chartered का बड़ा दावा: 2030 तक 33 गुना उछल सकता है यह DeFi टोकन
Standard Chartered ने DeFi टोकन Morpho को लेकर बड़ा अनुमान जताया है। बैंक का कहना है कि 2030 तक इसकी कीमत मौजूदा स्तर से 33 गुना तक बढ़ सकती है।

वैश्विक बैंक Standard Chartered ने एक अपेक्षाकृत कम चर्चित विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi) टोकन Morpho को लेकर बड़ा अनुमान जारी किया है। बैंक का कहना है कि यदि टोकनाइजेशन और DeFi क्षेत्र की मौजूदा रफ्तार बनी रहती है, तो वर्ष 2030 तक Morpho की कीमत मौजूदा स्तर से करीब 33 गुना तक बढ़ सकती है।
बैंक ने Morpho के लिए 2030 तक 60 डॉलर का लक्ष्य तय किया है। यह अनुमान मौजूदा बाजार मूल्य की तुलना में कई गुना अधिक है। Standard Chartered का मानना है कि आने वाले वर्षों में वास्तविक परिसंपत्तियों के टोकनाइजेशन और संस्थागत निवेश में बढ़ोतरी से Morpho जैसे प्रोटोकॉल को बड़ा फायदा मिल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में पारंपरिक वित्तीय संस्थानों की रुचि DeFi और टोकनाइजेशन की ओर बढ़ी है। ऐसे में Morpho जैसे प्रोटोकॉल निवेशकों के बीच तेजी से चर्चा में आ रहे हैं।
Morpho क्या है और क्यों बढ़ रही है इसकी चर्चा?
Morpho एक विकेंद्रीकृत उधार और ऋण सुविधा देने वाला प्रोटोकॉल है। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को अधिक प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर डिजिटल परिसंपत्तियां उधार लेने और देने की सुविधा उपलब्ध कराना है।
पारंपरिक DeFi मंचों की तुलना में Morpho अधिक कुशल पूंजी उपयोग और बेहतर ब्याज दरों पर ध्यान देता है। यही वजह है कि हाल के महीनों में इसका उपयोग लगातार बढ़ा है।
Standard Chartered का मानना है कि जैसे जैसे बड़े वित्तीय संस्थान ब्लॉकचेन आधारित सेवाओं को अपनाएंगे, वैसे वैसे Morpho जैसे प्रोटोकॉल की मांग भी बढ़ सकती है। बैंक के अनुसार, आने वाले वर्षों में DeFi केवल खुदरा निवेशकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संस्थागत निवेशकों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ेगी।
टोकनाइजेशन से कैसे मिलेगा फायदा?
रिपोर्ट के अनुसार, Morpho की सबसे बड़ी ताकत टोकनाइजेशन का बढ़ता चलन है। टोकनाइजेशन का मतलब है किसी वास्तविक परिसंपत्ति, जैसे सरकारी बॉन्ड, रियल एस्टेट या अन्य वित्तीय साधनों को ब्लॉकचेन पर डिजिटल रूप में उपलब्ध कराना।
Standard Chartered का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में टोकनाइज्ड परिसंपत्तियों का बाजार कई ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। यदि ऐसा होता है, तो इन परिसंपत्तियों को उधार देने और वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने वाले प्रोटोकॉल की मांग भी बढ़ेगी।
बैंक का मानना है कि Morpho इस बदलाव का बड़ा लाभार्थी बन सकता है, क्योंकि इसका ढांचा संस्थागत उपयोग के लिए भी उपयुक्त माना जा रहा है।
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क्या इतने बड़े लक्ष्य तक पहुंचना आसान होगा?
हालांकि सभी विशेषज्ञ इस अनुमान से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि क्रिप्टो बाजार अभी भी काफी अस्थिर है और किसी भी टोकन के लिए 33 गुना बढ़त हासिल करना आसान नहीं होगा।
Morpho की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि DeFi क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा किस तरह बढ़ती है, नियामकीय नीतियां कैसी रहती हैं और संस्थागत निवेशक ब्लॉकचेन आधारित वित्तीय सेवाओं को कितनी तेजी से अपनाते हैं।
इसके अलावा, यदि वैश्विक स्तर पर टोकनाइजेशन की रफ्तार उम्मीद से धीमी रहती है, तो Morpho जैसे प्रोटोकॉल की वृद्धि भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए निवेशकों को केवल मूल्य लक्ष्य देखकर निर्णय लेने के बजाय उससे जुड़े जोखिमों को भी समझना चाहिए।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
Standard Chartered की यह रिपोर्ट दिखाती है कि बड़े वैश्विक बैंक अब केवल Bitcoin और Ethereum तक सीमित नहीं हैं। वे DeFi और टोकनाइजेशन से जुड़े नए प्रोजेक्ट्स पर भी गहराई से नजर रख रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि वास्तविक परिसंपत्तियों का टोकनाइजेशन तेजी से बढ़ता है और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी मजबूत होती है, तो Morpho जैसे प्लेटफॉर्म को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।
फिलहाल Morpho अपेक्षाकृत नया नाम जरूर है, लेकिन Standard Chartered की भविष्यवाणी के बाद यह निवेशकों की नजर में आ गया है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या DeFi क्षेत्र का यह प्रोटोकॉल वास्तव में बैंक के 60 डॉलर के लक्ष्य की दिशा में बढ़ पाता है या नहीं। निवेशकों के लिए यह क्षेत्र अवसरों के साथ साथ जोखिम भी लेकर आता है, इसलिए किसी भी निवेश से पहले पर्याप्त अध्ययन करना जरूरी होगा।
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