
क्रिप्टो पर बड़ा मंथन, 2 जुलाई को RBI से मिलेगी संसदीय समिति
संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति 2 जुलाई को RBI अधिकारियों के साथ क्रिप्टो नियमन पर अहम बैठक करेगी। जानिए भारत में क्रिप्टो नियमों, कर व्यवस्था और निवेशक सुरक्षा को लेकर क्या बड़े फैसले सामने आ सकते हैं।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर नियामकीय ढांचा तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति 2 जुलाई को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करने जा रही है। इस बैठक में वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियों यानी क्रिप्टोकरेंसी के लिए संभावित नियामकीय ढांचे, निवेशक सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत में क्रिप्टो उद्योग लगातार स्पष्ट नियमों की मांग कर रहा है। दूसरी ओर सरकार और नियामक संस्थाएं निवेशकों की सुरक्षा, कर अनुपालन और अवैध गतिविधियों से जुड़े जोखिमों को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
क्रिप्टो पर लगातार बढ़ रही हैं चर्चाएं
संसदीय समिति पिछले कुछ महीनों से क्रिप्टो क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों से बातचीत कर रही है। हाल ही में समिति ने देश और विदेश में काम कर रहे प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंजों के प्रतिनिधियों से भी चर्चा की थी। इन बैठकों में कर नियमों, निवेशक संरक्षण, उद्योग की चुनौतियों और भविष्य के नियमन पर सुझाव लिए गए थे।
2 जुलाई को होने वाली बैठक इस प्रक्रिया की आठवीं प्रमुख परामर्श बैठक मानी जा रही है। इस बार समिति सीधे RBI के अधिकारियों से बातचीत करेगी, क्योंकि क्रिप्टो परिसंपत्तियों को लेकर केंद्रीय बैंक का दृष्टिकोण हमेशा से काफी महत्वपूर्ण रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI की राय भविष्य की नीति को आकार देने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। केंद्रीय बैंक लंबे समय से निजी क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता जताता रहा है, जबकि वह डिजिटल रुपये जैसे केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) को बढ़ावा देने पर जोर देता है।
किन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा?
बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार होने की संभावना है। इनमें क्रिप्टो लेनदेन की निगरानी, कर अनुपालन, निवेशकों के हितों की सुरक्षा और धन शोधन जैसी गतिविधियों को रोकने के उपाय शामिल हो सकते हैं।
हाल के महीनों में संसदीय समिति ने क्रिप्टो निवेश में तेजी को लेकर चिंता भी व्यक्त की थी। समिति के कुछ सदस्यों ने कहा था कि देश में हजारों करोड़ रुपये का निवेश इस क्षेत्र में हो चुका है और इसके लिए स्पष्ट नियमों की आवश्यकता है।
इसके अलावा यह भी चर्चा का विषय हो सकता है कि भारत को अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे देशों की तरह नियमन आधारित मॉडल अपनाना चाहिए या किसी अलग रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।
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उद्योग को क्यों है इस बैठक से उम्मीद?
भारतीय क्रिप्टो उद्योग लंबे समय से नीति संबंधी स्पष्टता की मांग कर रहा है। वर्तमान में क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर कर लागू है, लेकिन इनके संचालन और निवेश को लेकर कोई व्यापक कानून मौजूद नहीं है। इसी वजह से कई कंपनियां और निवेशक भविष्य की नीति को लेकर अनिश्चितता महसूस करते हैं।
उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि स्पष्ट नियम आने से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और कंपनियों को दीर्घकालिक योजना बनाने में आसानी होगी। साथ ही सरकार को भी लेनदेन की निगरानी और कर संग्रह में मदद मिलेगी।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि सरकार के भीतर क्रिप्टो नियमन को लेकर अलग-अलग विचार मौजूद हैं। जहां कुछ पक्ष नियंत्रित ढांचे के पक्ष में हैं, वहीं RBI अभी भी जोखिमों को लेकर सतर्क नजर आता है।
आगे क्या हो सकता है?
विश्लेषकों के अनुसार, 2 जुलाई की बैठक से तुरंत किसी नए कानून की घोषणा होने की संभावना कम है, लेकिन यह भारत की क्रिप्टो नीति के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।
यदि समिति और RBI के बीच किसी साझा दृष्टिकोण पर सहमति बनती है, तो आने वाले महीनों में सरकार एक अधिक स्पष्ट नियामकीय ढांचा तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। इससे कर व्यवस्था, निवेशक सुरक्षा और उद्योग संचालन से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
फिलहाल क्रिप्टो उद्योग, निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है। भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल परिसंपत्ति बाजारों में से एक बन चुका है और ऐसे में 2 जुलाई की चर्चा भविष्य के नियमन की दिशा तय करने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।
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