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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

Stablecoin पर BIS की बड़ी चेतावनी, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के लिए बताया बढ़ता खतरा

ताजा खबरेंप्रकाशित29 जून 2026

BIS ने चेतावनी दी है कि Stablecoins का तेजी से बढ़ता उपयोग वैश्विक वित्तीय प्रणाली को खंडित कर सकता है।

दुनिया भर में Stablecoin का बढ़ता उपयोग अब वैश्विक वित्तीय नियामकों की चिंता का कारण बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के संगठन बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) ने अपनी नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि यदि Stablecoin का विस्तार बिना मजबूत नियमों के जारी रहता है, तो इससे वैश्विक वित्तीय प्रणाली कई हिस्सों में बंट सकती है और मौद्रिक व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

BIS का कहना है कि Stablecoin तेज और कम लागत वाले डिजिटल भुगतान की सुविधा तो देते हैं, लेकिन मौजूदा स्वरूप में इनमें कई संरचनात्मक कमजोरियां मौजूद हैं। यदि इनका उपयोग बड़े स्तर पर होने लगता है, तो इससे वित्तीय स्थिरता, बैंकों की भूमिका और विभिन्न देशों की मौद्रिक नीतियों पर दबाव बढ़ सकता है।

रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब दुनिया के कई देश Stablecoin के लिए नए नियम तैयार कर रहे हैं और डिजिटल भुगतान व्यवस्था में इनकी भूमिका तेजी से बढ़ रही है।

BIS ने किन जोखिमों की ओर किया इशारा?

BIS के अनुसार, Stablecoin पारंपरिक मुद्रा जैसी स्थिरता देने का दावा करते हैं, लेकिन इनमें वास्तविक मुद्रा की कई अहम विशेषताएं नहीं हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि लोग बड़ी संख्या में Stablecoin अपनाते हैं, तो इससे वित्तीय प्रणाली में अलग अलग भुगतान नेटवर्क विकसित हो सकते हैं, जिससे पूरी व्यवस्था अधिक जटिल और खंडित हो सकती है।

संस्था ने यह भी चेतावनी दी कि किसी संकट की स्थिति में यदि निवेशक एक साथ Stablecoin वापस नकदी में बदलने लगें, तो जारीकर्ता संस्थाओं को अपने रिजर्व वाली परिसंपत्तियां तेजी से बेचनी पड़ सकती हैं। इससे धन बाजारों में दबाव और वित्तीय अस्थिरता पैदा होने का खतरा बढ़ सकता है।

BIS का यह भी मानना है कि सीमा पार बड़े पैमाने पर Stablecoin का उपयोग कुछ देशों में स्थानीय मुद्रा की जगह विदेशी मुद्रा आधारित डिजिटल टोकन के इस्तेमाल को बढ़ावा दे सकता है, जिससे उन देशों की मौद्रिक नीति कमजोर पड़ सकती है।

टोकनाइजेशन का समर्थन, लेकिन Stablecoin मॉडल पर सवाल

रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि BIS डिजिटल नवाचार का विरोध नहीं कर रहा है। संस्था का मानना है कि टोकनाइजेशन भविष्य की वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है और इससे भुगतान तथा वित्तीय सेवाएं अधिक तेज और प्रभावी हो सकती हैं।

हालांकि BIS का कहना है कि इस बदलाव की नींव केंद्रीय बैंक और विनियमित बैंकिंग प्रणाली पर आधारित होनी चाहिए। रिपोर्ट में "यूनिफाइड लेजर" जैसी व्यवस्था का समर्थन किया गया है, जिसमें केंद्रीय बैंक की मुद्रा, वाणिज्यिक बैंक जमा और टोकनाइज्ड परिसंपत्तियों को एकीकृत मंच पर जोड़ा जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे डिजिटल नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही वित्तीय प्रणाली में भरोसा भी बना रहेगा।

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दुनिया भर में बढ़ रही है Stablecoin पर निगरानी

हाल के वर्षों में Stablecoin का बाजार तेजी से बढ़ा है। इनका उपयोग केवल क्रिप्टो कारोबार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीमा पार भुगतान, डिजिटल लेनदेन और विकेंद्रीकृत वित्त में भी तेजी से बढ़ा है।

इसी वजह से अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन और एशिया के कई देश इनके लिए अलग नियामकीय ढांचा तैयार कर रहे हैं। कई केंद्रीय बैंक भी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि डिजिटल भुगतान का विस्तार वित्तीय स्थिरता को प्रभावित न करे।

BIS ने दोबारा जोर दिया है कि Stablecoin से जुड़े नियम अलग अलग देशों में बहुत अधिक भिन्न नहीं होने चाहिए। संस्था के अनुसार वैश्विक स्तर पर समन्वित नियम ही संभावित जोखिमों को कम कर सकते हैं और नियामकीय खामियों का गलत फायदा उठाने से रोक सकते हैं।

आगे क्या हो सकता है?

विश्लेषकों का मानना है कि Stablecoin आने वाले वर्षों में वैश्विक वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। लेकिन इनके तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ जोखिम भी बढ़ रहे हैं।

BIS की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि केवल तकनीकी नवाचार पर्याप्त नहीं होगा। निवेशकों की सुरक्षा, भुगतान प्रणाली की स्थिरता और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए मजबूत नियामकीय ढांचा भी जरूरी होगा।

आने वाले महीनों में विभिन्न देशों के नियामक Stablecoin से जुड़े नए नियमों पर काम तेज कर सकते हैं। इससे यह तय होगा कि डिजिटल भुगतान का भविष्य पूरी तरह निजी Stablecoin के भरोसे आगे बढ़ेगा या फिर केंद्रीय बैंक और पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली के साथ संतुलित मॉडल विकसित किया जाएगा।

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