
Breaking: भारत Polymarket और Kalshi पर लगाने जा रहा बैन
भारत सरकार ने Polymarket और Kalshi जैसे प्रेडिक्शन मार्केट प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती बढ़ा दी है। जानिए क्या हैं ये प्लेटफॉर्म, क्यों बढ़ रही चिंता और भारत में इनका भविष्य क्या हो सकता है।

भारत में ऑनलाइन प्रेडिक्शन मार्केट प्लेटफॉर्म तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। लोग क्रिकेट मैचों से लेकर चुनाव और आर्थिक फैसलों तक के नतीजों पर पैसे लगा रहे हैं। लेकिन अब केंद्र सरकार ने ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। खास तौर पर Polymarket और Kalshi जैसे विदेशी प्रेडिक्शन मार्केट प्लेटफॉर्म सरकार के निशाने पर हैं।
हाल ही में आई रिपोर्टों के अनुसार, भारत सरकार ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को निर्देश दिया है कि वे इन प्लेटफॉर्म्स की पहुंच सीमित करें। सरकार का मानना है कि ये सेवाएं ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए की श्रेणी में आती हैं।
क्या होते हैं प्रेडिक्शन मार्केट?
प्रेडिक्शन मार्केट ऐसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म होते हैं जहां लोग भविष्य की किसी घटना के नतीजे पर दांव लगाते हैं। उदाहरण के लिए, कौन सी टीम मैच जीतेगी, चुनाव में कौन आगे रहेगा या किसी आर्थिक नीति का क्या असर होगा।
इन प्लेटफॉर्म्स पर उपयोगकर्ता किसी घटना के पक्ष या विपक्ष में कॉन्ट्रैक्ट खरीदते हैं। अगर उनका अनुमान सही निकलता है तो उन्हें मुनाफा मिलता है। Polymarket मुख्य रूप से क्रिप्टो आधारित प्लेटफॉर्म है, जबकि Kalshi अमेरिका में रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करता है।
भारत सरकार क्यों कर रही कार्रवाई?
भारत में हाल ही में लागू ऑनलाइन गेमिंग नियमों के तहत प्रेडिक्शन मार्केट को “ऑनलाइन मनी गेम” माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि ऐसे प्लेटफॉर्म लोगों को जुए जैसी गतिविधियों की ओर बढ़ा सकते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अप्रैल में एक सलाह जारी की थी, जिसमें खास तौर पर Polymarket का नाम लिया गया। मंत्रालय ने कहा कि कुछ “अवैध और ब्लॉक किए गए प्रेडिक्शन मार्केट प्लेटफॉर्म” अब भी भारतीय उपयोगकर्ताओं को सेवाएं दे रहे हैं।
हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्रवाई के बावजूद कई भारतीय उपयोगकर्ता अब भी VPN और अन्य तरीकों से इन प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच बना रहे हैं।
क्रिकेट और चुनावी बाजारों में बढ़ी दिलचस्पी
भारत में क्रिकेट सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है। IPL मैचों से जुड़े प्रेडिक्शन मार्केट्स पर करोड़ों डॉलर का ट्रेड देखा गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, IPL के एक मैच पर अकेले Kalshi में करीब 2.7 करोड़ डॉलर तक का ट्रेड हुआ था।
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सिर्फ खेल ही नहीं, चुनाव और वैश्विक राजनीतिक घटनाओं से जुड़े बाजारों में भी भारतीय उपयोगकर्ताओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि युवा निवेशक इन्हें पारंपरिक सट्टेबाजी से अलग और “डेटा आधारित ट्रेडिंग” के रूप में देख रहे हैं।
दुनिया भर में बढ़ रही बहस
सिर्फ भारत ही नहीं, अमेरिका और दूसरे देशों में भी प्रेडिक्शन मार्केट को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे वित्तीय बाजार का नया रूप मानते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि यह जुए का आधुनिक संस्करण है।
अमेरिका में Kalshi और Polymarket को लेकर कई राज्यों में कानूनी विवाद चल रहे हैं। कई विशेषज्ञों ने इन प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती लत और संदिग्ध ट्रेडिंग गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है।
आगे क्या हो सकता है?
भारत सरकार आने वाले समय में प्रेडिक्शन मार्केट प्लेटफॉर्म्स पर और सख्त कदम उठा सकती है। यदि इंटरनेट ब्लॉकिंग और भुगतान प्रतिबंध पूरी तरह लागू होते हैं, तो भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए इन प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच मुश्किल हो सकती है।
हालांकि तकनीकी जानकारों का कहना है कि पूरी तरह रोक लगाना आसान नहीं होगा, क्योंकि कई प्लेटफॉर्म विकेंद्रीकृत तकनीक और क्रिप्टो पेमेंट का इस्तेमाल करते हैं।
फिलहाल यह साफ है कि भारत में प्रेडिक्शन मार्केट तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन उनके भविष्य का फैसला अब सरकार की अगली कार्रवाई और रेगुलेटरी नीति पर निर्भर करेगा।
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