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लेखक: Pratik Bhuyanस्टाफ संपादक
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RBI के विरोध के बीच भारत की क्रिप्टो पॉलिसी पेपर फिलहाल ठंडे बस्ते में

RBI के विरोध के चलते भारत का क्रिप्टो पॉलिसी पेपर फिलहाल टाल दिया गया है। जानिए सरकार की रणनीति, केंद्रीय बैंक की चिंताएं और इसका बाजार पर असर।

RBI के विरोध के बीच भारत की क्रिप्टो पॉलिसी पेपर फिलहाल ठंडे बस्ते में
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भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर लंबे समय से जारी अनिश्चितता एक बार फिर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार द्वारा प्रस्तावित क्रिप्टो पॉलिसी पेपर को फिलहाल रोक दिया गया है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण Reserve Bank of India यानी RBI का कड़ा रुख बताया जा रहा है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में क्रिप्टो निवेश तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन स्पष्ट नियमों की कमी अभी भी बनी हुई है।

पॉलिसी पेपर क्यों रोका गया

सूत्रों के मुताबिक, सरकार एक विस्तृत चर्चा पत्र लाने की तैयारी कर रही थी, जिसमें क्रिप्टो के नियमन से जुड़ी दिशा तय की जानी थी।

लेकिन RBI ने इस पर गंभीर आपत्ति जताई है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी वित्तीय स्थिरता और मौद्रिक नीति के लिए खतरा बन सकती है। इसी कारण सरकार ने फिलहाल इस पॉलिसी पेपर को आगे बढ़ाने का फैसला टाल दिया है।

RBI की मुख्य चिंताएं

RBI लंबे समय से क्रिप्टो को लेकर सतर्क रहा है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि निजी डिजिटल एसेट्स का तेजी से बढ़ता उपयोग देश की वित्तीय प्रणाली पर असर डाल सकता है।

इसके अलावा, मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध लेनदेन और पूंजी नियंत्रण से जुड़े जोखिम भी चिंता का विषय हैं। RBI के अधिकारी पहले भी यह कह चुके हैं कि क्रिप्टो का कोई आंतरिक मूल्य नहीं होता और यह पारंपरिक वित्तीय सिस्टम के लिए चुनौती बन सकता है।

सरकार की संतुलित रणनीति

हालांकि RBI सख्त रुख अपनाए हुए है, लेकिन सरकार पूरी तरह से प्रतिबंध के पक्ष में नहीं दिख रही है। सरकार फिलहाल क्रिप्टो को पूरी तरह रेगुलेट करने के बजाय टैक्स और निगरानी के जरिए नियंत्रित कर रही है। भारत में क्रिप्टो पर 30% टैक्स और 1% TDS लागू है, जिससे सरकार इस सेक्टर पर नजर बनाए रखती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक “वेट एंड वॉच” रणनीति है, जिसमें सरकार वैश्विक रुझानों को देखते हुए फैसला लेना चाहती है।

वैश्विक परिदृश्य का असर

भारत ने पहले भी संकेत दिए हैं कि वह क्रिप्टो पर कोई बड़ा फैसला लेने से पहले वैश्विक स्तर पर एक समान ढांचा चाहता है। G20 जैसे मंचों पर भी इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है।

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रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार अंतरराष्ट्रीय नियमों के स्पष्ट होने का इंतजार कर रही है, ताकि घरेलू नीति उसी के अनुरूप बनाई जा सके।

इंडस्ट्री में निराशा

क्रिप्टो इंडस्ट्री इस देरी से खुश नहीं है। कई एक्सचेंज और निवेशक लंबे समय से स्पष्ट नियमों की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नीति की कमी के कारण निवेश और इनोवेशन पर असर पड़ रहा है।

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, सख्त टैक्स नियमों के चलते भारत से बड़ी मात्रा में ट्रेडिंग गतिविधि विदेशों की ओर शिफ्ट हो गई है।

मौजूदा स्थिति क्या है

भारत में फिलहाल क्रिप्टो न तो पूरी तरह वैध मुद्रा है और न ही प्रतिबंधित। इसे एक डिजिटल एसेट के रूप में देखा जाता है, जिस पर टैक्स लागू होता है, लेकिन इसके लिए कोई स्पष्ट नियामकीय ढांचा मौजूद नहीं है। इस स्थिति ने निवेशकों और कंपनियों दोनों के लिए अनिश्चितता पैदा कर दी है।

आगे क्या हो सकता है

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहती। जब तक RBI और सरकार के बीच सहमति नहीं बनती, तब तक क्रिप्टो पॉलिसी पर बड़ा कदम उठना मुश्किल है। संभव है कि भविष्य में एक संतुलित ढांचा सामने आए, जिसमें नवाचार और जोखिम दोनों को ध्यान में रखा जाए।

निष्कर्ष

भारत की क्रिप्टो नीति एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में है। RBI की चिंताओं और सरकार की सावधानी भरी रणनीति के चलते पॉलिसी पेपर का टलना यह दिखाता है कि इस क्षेत्र में अभी भी स्पष्ट दिशा तय नहीं हुई है।

जब तक ठोस नियम नहीं बनते, तब तक निवेशकों और कंपनियों को इसी अनिश्चित माहौल में काम करना होगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि भारत क्रिप्टो को लेकर सख्त रुख अपनाता है या एक संतुलित नियामकीय रास्ता चुनता है।

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