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Pratik Bhuyan द्वारा लिखित ⁠, Staff Editor.Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षित ⁠, Staff Editor.

रूस का बड़ा क्रिप्टो दांव, सीमा पार भुगतान के लिए नया बिल तैयार

ताजा खबरेंप्रकाशितMay 26, 2026

रूस का नया क्रिप्टो बिल सीमा पार व्यापार में Bitcoin और डिजिटल एसेट्स के इस्तेमाल को बढ़ावा दे सकता है। जानिए क्यों रूस घरेलू भुगतान से दूर लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापार में क्रिप्टो को अपना रहा है।

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रूस ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है। देश की संसद में पेश किए गए नए क्रिप्टो बिल का मुख्य उद्देश्य घरेलू भुगतान में डिजिटल एसेट्स को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आसान बनाना है। पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक बैंकिंग नेटवर्क पर बढ़ते दबाव के बीच रूस अब क्रिप्टो को सीमा पार भुगतान के वैकल्पिक माध्यम के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है।

रूस का नया क्रिप्टो बिल क्या कहता है?

रूस की संसद State Duma ने हाल ही में डिजिटल करेंसी और डिजिटल राइट्स से जुड़े बिल को पहली मंजूरी दी है। यह बिल देश में क्रिप्टो गतिविधियों के लिए औपचारिक कानूनी ढांचा तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस प्रस्ताव के तहत रूस का केंद्रीय बैंक यानी Bank of Russia पूरे क्रिप्टो सिस्टम की निगरानी करेगा। एक्सचेंज, ब्रोकर और दूसरी क्रिप्टो सेवाओं को लाइसेंस के जरिए नियंत्रित किया जाएगा। सरकार का फोकस खुला और विकेंद्रीकृत मॉडल अपनाने के बजाय पूरी तरह नियंत्रित व्यवस्था बनाने पर है।

हालांकि रूस घरेलू लेनदेन में क्रिप्टो को वैध मुद्रा का दर्जा देने के पक्ष में नहीं है। बिल के अनुसार, देश के अंदर भुगतान के लिए केवल रूबल ही कानूनी मुद्रा रहेगा। यानी लोग दुकान, बिजनेस या रोजमर्रा के लेनदेन में Bitcoin या दूसरी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

सीमा पार व्यापार पर क्यों है पूरा फोकस?

रूस का मुख्य लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार भुगतान को आसान बनाना है। यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने कई रूसी बैंकों को SWIFT जैसे वैश्विक भुगतान नेटवर्क से बाहर कर दिया था। इसके बाद रूस के लिए विदेशी व्यापार करना ज्यादा मुश्किल हो गया।

इसी वजह से रूस अब क्रिप्टोकरेंसी और stablecoins को वैकल्पिक भुगतान माध्यम के रूप में देख रहा है। नए बिल के तहत कंपनियों को विदेशी व्यापार में डिजिटल एसेट्स के जरिए भुगतान करने की अनुमति दी जा सकती है। इससे आयात और निर्यात करने वाली कंपनियों को पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस इस मॉडल के जरिए डॉलर आधारित वित्तीय सिस्टम पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।

नियंत्रित तरीके से मिलेगा क्रिप्टो एक्सेस

नया बिल पूरी तरह खुले क्रिप्टो बाजार की अनुमति नहीं देता। रूस केवल लाइसेंस प्राप्त प्लेटफॉर्म्स और संस्थानों को ही डिजिटल एसेट्स के साथ काम करने देगा। आम निवेशकों के लिए भी सीमित और नियंत्रित भागीदारी की योजना बनाई गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, छोटे निवेशकों को क्रिप्टो खरीदने से पहले suitability test देना पड़ सकता है। वहीं बड़े और योग्य निवेशकों को ज्यादा छूट मिल सकती है। रूस का मकसद बाजार को पूरी तरह खोलने के बजाय नियंत्रित प्रयोग करना है।

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Stablecoin और शैडो पेमेंट नेटवर्क पर बढ़ा जोर

रूस पहले से ही कुछ वैकल्पिक डिजिटल भुगतान सिस्टम पर काम कर रहा है। हाल के महीनों में A7A5 नाम का रूबल आधारित stablecoin चर्चा में रहा है, जिसका इस्तेमाल सीमा पार लेनदेन में किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सिस्टम पारंपरिक बैंकिंग नेटवर्क से बाहर काम करता है।

Financial Times की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि रूस ने डिजिटल टोकन, stablecoin और वैकल्पिक वित्तीय नेटवर्क का इस्तेमाल कर अरबों डॉलर के अंतरराष्ट्रीय भुगतान किए हैं।

हालांकि पश्चिमी देशों ने ऐसे सिस्टम पर चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि क्रिप्टो आधारित भुगतान नेटवर्क का इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचने और निगरानी से बाहर लेनदेन के लिए किया जा सकता है।

दुनिया के लिए क्या मायने रखता है रूस का कदम?

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस का मॉडल भविष्य में दूसरे प्रतिबंध झेल रहे देशों के लिए उदाहरण बन सकता है। अगर सीमा पार व्यापार में क्रिप्टो का इस्तेमाल सफल रहता है, तो यह वैश्विक भुगतान व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है।

कई विश्लेषक यह भी मानते हैं कि stablecoins और blockchain आधारित settlement systems आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। ये सिस्टम पारंपरिक बैंकिंग नेटवर्क की तुलना में तेज और सस्ते माने जाते हैं।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल रूस का क्रिप्टो बिल शुरुआती चरण में है और इसे कानून बनने से पहले कई मंजूरियों से गुजरना होगा। लेकिन संकेत साफ हैं कि रूस अब डिजिटल एसेट्स को सिर्फ सट्टेबाजी के साधन के रूप में नहीं, बल्कि रणनीतिक आर्थिक उपकरण के तौर पर देख रहा है।

अगर यह मॉडल सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सीमा पार भुगतान में क्रिप्टो की भूमिका काफी बढ़ सकती है। वहीं दूसरी तरफ इससे वैश्विक रेगुलेशन और आर्थिक निगरानी को लेकर नई बहस भी तेज होने की संभावना है।

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