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Jai Singla द्वारा लिखित ⁠, Staff Editor.Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षित ⁠, Staff Editor.

कॉइनबेस की धमाकेदार वापसी, अब सीधे रुपये जमा कर खरीद सकेंगे बिटकॉइन और क्रिप्टो

ताजा खबरेंप्रकाशितJun 2, 2026

कॉइनबेस ने भारत में सीधे भारतीय रुपये की सुविधा शुरू कर दी है। अब उपयोगकर्ता सीधे बैंक खाते से रुपये जमा कर बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टो मुद्राएं खरीद-बेच सकेंगे। जानिए इस कदम का भारतीय क्रिप्टो बाजार पर क्या असर होगा।

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अमेरिकी क्रिप्टो विनिमय मंच कॉइनबेस ने भारत में अपनी सेवाओं का बड़ा विस्तार करते हुए सीधे भारतीय रुपये की सुविधा शुरू कर दी है। इस कदम के बाद भारतीय उपयोगकर्ता अब अपने बैंक खाते से सीधे रुपये जमा कर सकेंगे, क्रिप्टो परिसंपत्तियों की खरीद-बिक्री कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर रकम वापस बैंक खाते में निकाल भी सकेंगे।

कॉइनबेस की यह वापसी ऐसे समय में हुई है जब भारत दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो अपनाने वाले बाजारों में गिना जाता है। हालांकि देश में 30% क्रिप्टो कर और 1% स्रोत पर कर कटौती जैसे नियम लागू हैं, फिर भी भारतीय निवेशकों की रुचि डिजिटल परिसंपत्तियों में बनी हुई है।

भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए क्या बदला?

अब तक कई भारतीय उपयोगकर्ताओं को विदेशी क्रिप्टो विनिमय मंचों तक पहुंचने के लिए व्यक्ति से व्यक्ति लेनदेन या दूसरे वैकल्पिक तरीकों का सहारा लेना पड़ता था। कॉइनबेस की नई रुपये आधारित व्यवस्था के बाद यह प्रक्रिया काफी आसान हो गई है।

कंपनी ने त्वरित भुगतान सेवा के माध्यम से सीधे जमा और निकासी की सुविधा शुरू की है। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ता सीधे अपने बैंक खाते से कॉइनबेस खाते में रुपये भेज सकते हैं और जरूरत पड़ने पर धनराशि वापस बैंक खाते में स्थानांतरित कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय खुदरा निवेशकों के लिए क्रिप्टो कारोबार में प्रवेश करना पहले की तुलना में आसान हो जाएगा।

तत्काल कारोबार के साथ वायदा सौदों की भी सुविधा

कॉइनबेस ने सिर्फ रुपये जमा करने की सुविधा ही नहीं जोड़ी है, बल्कि भारतीय उपयोगकर्ताओं को तत्काल कारोबार और स्थायी वायदा अनुबंधों तक भी पहुंच दी है।

तत्काल कारोबार में निवेशक सीधे बिटकॉइन, एथेरियम और अन्य क्रिप्टो मुद्राएं खरीद या बेच सकते हैं। वहीं वायदा उत्पाद उन कारोबारियों को आकर्षित कर सकते हैं जो उन्नत कारोबारी रणनीतियों का उपयोग करना चाहते हैं।

इसके अलावा कंपनी ने भारतीय ग्राहकों के लिए स्थानीय रुपये आधारित आदेश पुस्तिकाएं भी तैयार की हैं ताकि बाजार में धन उपलब्धता बेहतर हो और कारोबार का अनुभव अधिक सहज बने।

भारत पर कॉइनबेस का बढ़ता ध्यान

कॉइनबेस पिछले कुछ वर्षों से भारतीय ब्लॉकचेन पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश करता रहा है। कंपनी पहले से भारतीय क्रिप्टो विनिमय मंच कॉइनडीसीएक्स में निवेश कर चुकी है और अपने आधार तंत्र के जरिए भारतीय विकासकर्ताओं और नवउद्यमों को भी समर्थन देती रही है।

कॉइनबेस के एशिया प्रशांत क्षेत्र के नेतृत्व ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण क्रिप्टो बाजारों में से एक बताया है। कंपनी का मानना है कि भारत में विकासकर्ताओं की क्षमता, ब्लॉकचेन नवाचार और क्रिप्टो अपनाने की मजबूत संभावनाएं मौजूद हैं।

यही वजह है कि कॉइनबेस अब भारतीय खुदरा बाजार में अधिक सक्रिय तरीके से अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है।

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बाइनेंस और अन्य मंचों को मिलेगी चुनौती

क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि सीधे रुपये की सुविधा कॉइनबेस को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे सकती है।

अब तक कई विदेशी मंच भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए सहज बैंकिंग सुविधा उपलब्ध नहीं करा पा रहे थे। ऐसे में कॉइनबेस की सीधी बैंकिंग व्यवस्था उसे अन्य वैश्विक मंचों से अलग बनाती है।

विश्लेषकों के अनुसार आने वाले महीनों में भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए क्रिप्टो विनिमय मंचों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है, जिससे बेहतर सेवाएं और उत्पाद देखने को मिल सकते हैं।

नियामकीय माहौल अब भी चुनौतीपूर्ण

हालांकि कॉइनबेस की वापसी क्रिप्टो क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, लेकिन भारत का नियामकीय माहौल अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

देश में क्रिप्टो लाभ पर 30% कर और लेनदेन पर 1% स्रोत पर कर कटौती लागू है। साथ ही विनिमय मंचों को वित्तीय खुफिया इकाई के नियमों का पालन करना होता है।

कॉइनबेस ने कहा है कि वह वित्तीय खुफिया इकाई के साथ पंजीकृत है और भारतीय कानूनों के अनुरूप काम कर रही है।

भारतीय क्रिप्टो बाजार के लिए क्या मायने हैं?

विशेषज्ञों का कहना है कि कॉइनबेस द्वारा सीधे रुपये की सुविधा शुरू करना केवल सेवाओं के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के क्रिप्टो पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते वैश्विक भरोसे का संकेत भी है।

जब दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो मंचों में से एक भारत में अपनी सेवाएं मजबूत करता है, तो यह संस्थागत रुचि और बाजार की परिपक्वता दोनों को दर्शाता है।

इससे नए निवेशकों को अधिक विकल्प मिल सकते हैं, जबकि मौजूदा उपयोगकर्ताओं को बेहतर धन उपलब्धता और आसान बैंकिंग सुविधा का लाभ मिल सकता है।

आगे किस पर रहेगी नजर?

अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि कॉइनबेस भारत में कितनी तेजी से नए उपयोगकर्ता जोड़ पाता है और क्या यह घरेलू मंचों को कड़ी टक्कर दे पाता है।

साथ ही क्षेत्र से जुड़े लोग यह भी देखेंगे कि भारत में क्रिप्टो नियम किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। अगर नियामकीय स्पष्टता बढ़ती है, तो भारत वैश्विक क्रिप्टो क्षेत्र के लिए और भी महत्वपूर्ण बाजार बन सकता है।

फिलहाल इतना साफ है कि सीधे रुपये की सुविधा के साथ कॉइनबेस ने भारतीय क्रिप्टो बाजार में अपनी सबसे बड़ी वापसी कर ली है और इससे देश के क्रिप्टो पारिस्थितिकी तंत्र में प्रतिस्पर्धा और गतिविधियां दोनों बढ़ सकती हैं।

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