दक्षिण एशिया में क्रिप्टो को लेकर एक नई प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। लंबे समय तक भारत इस क्षेत्र में सबसे आगे रहा, लेकिन अब पाकिस्तान भी तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के ग्लोबल क्रिप्टो एडॉप्शन इंडेक्स में भारत पहले स्थान पर रहा, जबकि पाकिस्तान तीसरे स्थान पर पहुंच गया। इससे साफ है कि दोनों देशों में डिजिटल संपत्तियों को अपनाने की रफ्तार काफी तेज है।
हालांकि, दोनों देशों का रास्ता अलग है। भारत अभी सतर्क नीति के साथ आगे बढ़ रहा है, जबकि पाकिस्तान ने हाल के महीनों में नियमों और बैंकिंग व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए हैं।
पाकिस्तान ने बदली रणनीति
पाकिस्तान ने 2026 में क्रिप्टो को लेकर बड़ा कदम उठाया। वहां के केंद्रीय बैंक ने लाइसेंस प्राप्त क्रिप्टो कंपनियों और वर्चुअल एसेट सेवा प्रदाताओं को बैंक खाते खोलने की अनुमति दे दी है। यह फैसला 2018 में लगाए गए पुराने प्रतिबंध को हटाने जैसा माना जा रहा है।
इसके पीछे पाकिस्तान का नया वर्चुअल एसेट कानून है, जिसके तहत सरकार ने एक अलग नियामक संस्था बनाई है। अब कोई भी क्रिप्टो कंपनी तभी बैंकिंग प्रणाली में शामिल हो सकती है, जब उसके पास आधिकारिक लाइसेंस हो।
पाकिस्तान ने केवल नियमों तक खुद को सीमित नहीं रखा। देश ने दुनिया की बड़ी क्रिप्टो कंपनियों के साथ भी बातचीत शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने Binance और HTX जैसी कंपनियों को शुरुआती मंजूरी दी है और Binance के साथ 2 अरब डॉलर तक की संपत्तियों को टोकन में बदलने की योजना पर काम शुरू किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान क्रिप्टो को केवल निवेश का साधन नहीं, बल्कि सीमा पार भुगतान, विदेशी निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाना चाहता है।
भारत में अपनाने की रफ्तार तेज, लेकिन नियम सख्त
दूसरी ओर, भारत में क्रिप्टो अपनाने की रफ्तार दुनिया में सबसे ज्यादा बनी हुई है। भारत लगातार कई वर्षों से क्रिप्टो उपयोगकर्ताओं की संख्या और छोटे निवेशकों की भागीदारी के मामले में आगे रहा है।
भारत में खास तौर पर युवाओं की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। हालिया अध्ययन के अनुसार, देश में 61 प्रतिशत क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडर Gen Z वर्ग से हैं। महिलाओं की भागीदारी भी पिछले एक साल में 20 प्रतिशत बढ़ी है।
लेकिन नियमों के मामले में भारत अभी भी काफी सतर्क है। यहां क्रिप्टो पर 30 प्रतिशत कर और हर लेन-देन पर 1 प्रतिशत टीडीएस लगाया जाता है। इसके अलावा, सरकार और रिजर्व बैंक ने अभी तक क्रिप्टो को कानूनी मुद्रा का दर्जा नहीं दिया है।
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भारत का रुख यह है कि पहले निवेशकों की सुरक्षा और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे जोखिमों को नियंत्रित किया जाए, उसके बाद आगे बढ़ा जाए। यही वजह है कि भारत में क्रिप्टो कारोबार तो बढ़ रहा है, लेकिन कंपनियों को अभी भी स्पष्ट नियमों का इंतजार है।
कौन सा मॉडल ज्यादा मजबूत?
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान और भारत दो अलग रास्तों पर चल रहे हैं। पाकिस्तान "नियंत्रित प्रयोग" की नीति अपना रहा है, यानी पहले छोटे स्तर पर नए नियम लागू किए जा रहे हैं और फिर उनका असर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, भारत "नियंत्रित रोक" की नीति पर चल रहा है, जहां सरकार धीरे धीरे कदम बढ़ा रही है।
पाकिस्तान का फायदा यह हो सकता है कि अगर उसके नियम सफल रहते हैं, तो वह विदेशी कंपनियों और निवेश को जल्दी आकर्षित कर सकता है। लेकिन इसके साथ जोखिम भी हैं। वहां अभी भी कानूनी ढांचा पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और कुछ विशेषज्ञों ने मनी लॉन्ड्रिंग तथा ऊर्जा संकट जैसे मुद्दों पर चिंता जताई है।
भारत के पास बड़ा उपयोगकर्ता आधार और मजबूत डिजिटल ढांचा है। इसलिए अगर भारत भविष्य में स्पष्ट नियम बनाता है, तो उसके पास दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो बाजारों में शामिल होने की क्षमता है।
आगे क्या हो सकता है
आने वाले महीनों में यह मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। पाकिस्तान तेजी से नियमों में ढील दे रहा है, जबकि भारत अभी भी सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहा है।
अगर पाकिस्तान अपने नए मॉडल को सफलतापूर्वक लागू कर लेता है, तो वह दक्षिण एशिया में क्रिप्टो के लिए एक नया केंद्र बन सकता है। वहीं, भारत के पास पहले से मौजूद बड़ी संख्या में उपयोगकर्ता और तकनीकी क्षमता है, जो उसे लंबे समय में बढ़त दे सकती है।
फिलहाल इतना तय है कि दक्षिण एशिया अब वैश्विक क्रिप्टो बाजार का सबसे अहम क्षेत्र बनता जा रहा है।
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