
भारत में USDT का प्रीमियम 8.5% के पार, ED की कार्रवाई के बाद Stablecoin की कमी से बढ़ी चिंता
भारत में USDT का प्रीमियम 8.5% से ऊपर पहुंच गया है। प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद Stablecoin की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

भारत में सबसे लोकप्रिय Stablecoin USDT की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में असामान्य रूप से बढ़ गई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय बाजार में USDT का प्रीमियम 8.5% से अधिक पहुंच गया है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह अंतर केवल 3% से 4% के बीच रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई के बाद Stablecoin की आपूर्ति प्रभावित होने से यह स्थिति पैदा हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु में कुछ कंपनियों पर हुई जांच के बाद उन माध्यमों पर असर पड़ा जिनके जरिए बड़ी मात्रा में USDT भारत पहुंचता था। इससे बाजार में मांग बनी रही, लेकिन आपूर्ति घट गई और कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली।
विश्लेषकों का कहना है कि यह घटनाक्रम केवल एक Stablecoin की कीमत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के क्रिप्टो बाजार और सीमा पार डिजिटल भुगतान प्रणाली पर भी असर डाल सकता है।
आखिर क्यों बढ़ गया USDT का प्रीमियम?
USDT एक डॉलर से जुड़ा Stablecoin है और इसे क्रिप्टो कारोबार में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य तौर पर भारत में इसकी कीमत डॉलर की विनिमय दर से थोड़ी अधिक रहती है, लेकिन हाल के दिनों में यह अंतर काफी बढ़ गया।
रिपोर्ट के अनुसार, सप्ताहांत के दौरान भारतीय प्लेटफॉर्म पर USDT की कीमत लगभग ₹102.88 तक पहुंच गई, जबकि उसी समय डॉलर की आधिकारिक अंतरबैंक विनिमय दर करीब ₹94.65 थी। यानी भारतीय खरीदारों को USDT प्राप्त करने के लिए सामान्य से कहीं अधिक कीमत चुकानी पड़ी।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मुख्य कारण आपूर्ति में आई कमी है। प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में बेंगलुरु स्थित कुछ कंपनियों पर कार्रवाई की, जिन पर डिजिटल परिसंपत्तियों के माध्यम से अवैध सीमा पार धन हस्तांतरण का आरोप है। माना जा रहा है कि इन कंपनियों के जरिए बड़ी मात्रा में USDT भारतीय बाजार में पहुंचता था। कार्रवाई के बाद यह आपूर्ति चैन प्रभावित हो गई।
निवेशकों और कारोबारियों पर क्या पड़ेगा असर?
भारत में बड़ी संख्या में क्रिप्टो निवेशक USDT का उपयोग अन्य डिजिटल परिसंपत्तियां खरीदने के लिए करते हैं। इसके अलावा कई कारोबारी और विदेशी धन भेजने वाले नेटवर्क भी Stablecoin का उपयोग तेज और कम लागत वाले लेनदेन के लिए करते रहे हैं।
जब किसी Stablecoin का प्रीमियम अचानक बढ़ जाता है, तो निवेशकों की लागत भी बढ़ जाती है। यानी यदि कोई व्यक्ति बिटकॉइन या अन्य क्रिप्टो परिसंपत्ति खरीदना चाहता है, तो पहले उसे महंगा USDT खरीदना पड़ सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि इससे छोटे निवेशकों पर अधिक असर पड़ सकता है। वहीं कुछ कारोबारियों के लिए सीमा पार भुगतान पहले की तुलना में महंगा हो सकता है। हालांकि यह स्थिति स्थायी रहेगी या नहीं, यह आने वाले दिनों में आपूर्ति सामान्य होने पर निर्भर करेगा।
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क्या नियामकीय सख्ती है इसकी वजह?
हाल के महीनों में भारत में डिजिटल परिसंपत्तियों से जुड़े लेनदेन पर निगरानी बढ़ी है। सरकार और जांच एजेंसियां उन मामलों पर विशेष ध्यान दे रही हैं जिनमें क्रिप्टो परिसंपत्तियों का उपयोग अवैध विदेशी धन हस्तांतरण या वित्तीय नियमों से बचने के लिए किया जाता है।
इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय ने कुछ कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की। रिपोर्टों के अनुसार, इन कंपनियों के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के सीमा पार लेनदेन किए जा रहे थे। कार्रवाई के बाद बाजार में USDT की उपलब्धता प्रभावित हुई और कीमतों में तेजी आ गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियामकीय सख्ती का उद्देश्य अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है, लेकिन इसका असर वैध निवेशकों और कारोबारियों पर भी कुछ समय के लिए दिखाई दे सकता है।
आगे क्या रह सकती है स्थिति?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि बाजार में USDT की आपूर्ति दोबारा सामान्य हो जाती है, तो प्रीमियम भी धीरे धीरे पहले के स्तर पर लौट सकता है। लेकिन यदि नियामकीय कार्रवाई और कड़ी होती है या आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो भारतीय बाजार में Stablecoin की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
यह घटनाक्रम इस बात का भी संकेत है कि भारत में क्रिप्टो बाजार अब पहले से कहीं अधिक नियामकीय निगरानी के दायरे में आ चुका है। आने वाले महीनों में Stablecoin से जुड़े लेनदेन, विदेशी धन हस्तांतरण और डिजिटल परिसंपत्तियों के उपयोग को लेकर नए नियम सामने आ सकते हैं।
फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि आपूर्ति कब सामान्य होती है और नियामकीय स्तर पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। तब तक भारतीय निवेशकों के लिए USDT खरीदना पहले की तुलना में अधिक महंगा बना रह सकता है।
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