
Harvard University ने बेचा पूरा एथेरियम ETF होल्डिंग, बिटकॉइन निवेश भी घटाया
Harvard University ने अपनी पूरी एथेरियम ETF होल्डिंग बेच दी है और बिटकॉइन ETF निवेश भी घटाया है। 13F फाइलिंग के बाद संस्थागत क्रिप्टो निवेश को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

अमेरिका की प्रतिष्ठित Harvard University ने क्रिप्टो निवेश को लेकर बड़ा फैसला लिया है। यूनिवर्सिटी ने अपने पूरे एथेरियम ETF निवेश को बेच दिया है, जबकि बिटकॉइन ETF में अपनी हिस्सेदारी भी काफी कम कर दी है। यह जानकारी हाल ही में सामने आई रेगुलेटरी फाइलिंग से मिली है, जिसके बाद संस्थागत निवेशकों की रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है।
एथेरियम ETF से पूरी तरह बाहर निकला हार्वर्ड
रिपोर्ट के अनुसार, Harvard Management Company ने BlackRock के iShares Ethereum Trust ETF में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी। यह निवेश यूनिवर्सिटी ने पिछले साल की चौथी तिमाही में खरीदा था। अब पहली तिमाही की नई फाइलिंग में यह होल्डिंग पूरी तरह गायब दिखाई दी।
विश्लेषकों का मानना है कि किसी बड़े संस्थान का एथेरियम ETF से पूरी तरह बाहर निकलना बाजार के लिए अहम संकेत माना जा सकता है। खासकर ऐसे समय में जब ETH की कीमतों में उतार चढ़ाव लगातार बना हुआ है।
बिटकॉइन ETF में भी बड़ी कटौती
सिर्फ एथेरियम ही नहीं, हार्वर्ड ने अपने बिटकॉइन ETF निवेश को भी काफी कम किया है। फाइलिंग के मुताबिक यूनिवर्सिटी ने BlackRock के iShares Bitcoin Trust ETF यानी IBIT में अपनी हिस्सेदारी लगभग 43 प्रतिशत तक घटा दी।
मार्च 2026 के अंत तक हार्वर्ड के पास करीब 30.4 लाख शेयर बचे थे, जबकि पिछली तिमाही में यह संख्या 53.5 लाख थी। उस समय इस निवेश की कुल कीमत लगभग 11.7 करोड़ डॉलर बताई गई थी।
हालांकि यूनिवर्सिटी ने बिटकॉइन निवेश पूरी तरह खत्म नहीं किया है। इससे संकेत मिलता है कि संस्थान अब भी बिटकॉइन को लंबी अवधि के निवेश के रूप में देख रहा है, लेकिन जोखिम कम करने की रणनीति अपना रहा है।
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बाजार में गिरावट का भी पड़ा असर
2026 की पहली तिमाही क्रिप्टो बाजार के लिए काफी कमजोर रही। इसी दौरान बिटकॉइन और एथेरियम दोनों ETF में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बाजार में कमजोरी, वैश्विक आर्थिक दबाव और निवेशकों की घटती जोखिम लेने की क्षमता ने संस्थागत निवेशकों को सतर्क बना दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि हार्वर्ड का यह कदम सिर्फ एक यूनिवर्सिटी का फैसला नहीं है, बल्कि यह व्यापक संस्थागत सोच को भी दिखा सकता है। बड़े फंड अक्सर जोखिम वाले निवेश में तेजी से बदलाव करते हैं और क्रिप्टो अभी भी अस्थिर बाजार माना जाता है।
संस्थागत निवेशकों के लिए क्या है संकेत
क्रिप्टो ETF को पारंपरिक संस्थानों के लिए डिजिटल एसेट में निवेश का आसान और सुरक्षित माध्यम माना जाता है। पिछले एक साल में कई बड़े फंड और यूनिवर्सिटी एंडोमेंट्स ने बिटकॉइन और एथेरियम ETF में निवेश बढ़ाया था।
लेकिन हार्वर्ड की ताजा बिकवाली यह दिखाती है कि संस्थागत निवेशक अब भी बाजार को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। खासकर एथेरियम को लेकर सतर्कता ज्यादा दिखाई दे रही है।
कुछ मार्केट विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में दूसरी बड़ी संस्थाओं की फाइलिंग भी इसी तरह के संकेत दे सकती है। अगर अन्य फंड भी अपनी होल्डिंग घटाते हैं तो इसका असर क्रिप्टो ETF बाजार पर पड़ सकता है।
निवेशकों की नजर अगली फाइलिंग पर
इस खबर के बाद क्रिप्टो समुदाय में अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कुछ लोग इसे बाजार के लिए चेतावनी मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि यह केवल पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग का हिस्सा हो सकता है।
अब निवेशकों की नजर अगली तिमाही की फाइलिंग पर रहेगी। इससे साफ हो पाएगा कि हार्वर्ड का यह फैसला अकेला कदम था या फिर संस्थागत निवेशकों के बीच बदलती रणनीति की शुरुआत।
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