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Rajeev Ranjan Roy द्वारा लिखितस्टाफ लेखकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

ड्राफ्ट आयकर नियम 2026: PAN की सीमा बढ़ेगी, क्रिप्टो लेनदेन पर सख्त निगरानी, टैक्स सिस्टम होगा आसान

बाजारप्रकाशित10 फ़र॰ 2026

ड्राफ्ट इनकम टैक्स नियम 2026 में PAN नियमों में ढील का प्रस्ताव है, जबकि क्रिप्टो लेनदेन पर निगरानी सख्त होगी। CBDC को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान मान्यता और ITR प्रक्रिया सरल बनाने की तैयारी है।

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केंद्र सरकार ने आयकर व्यवस्था को सरल और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ड्राफ्ट इनकम-टैक्स रूल्स, 2026 जारी किए हैं। प्रस्तावित नियमों में PAN की अनिवार्यता से जुड़े थ्रेशोल्ड बढ़ाने, क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल एसेट्स की रिपोर्टिंग को कड़ा करने तथा टैक्स रिटर्न और फॉर्म्स की संख्या में बड़ी कटौती जैसे अहम बदलाव शामिल हैं।

ये नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 का हिस्सा होंगे। सरकार ने ड्राफ्ट पर 22 फरवरी 2026 तक जनता और हितधारकों से सुझाव मांगे हैं।

PAN अनिवार्यता की सीमा बढ़ने से आम करदाताओं को राहत

ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, PAN देने की बाध्यता को केवल हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शनों तक सीमित किया जा रहा है।

प्रस्तावित सीमाएं इस प्रकार हैं:

  • बैंक खातों में ₹10 लाख या उससे अधिक की नकद जमा या निकासी पर PAN अनिवार्य
  • ₹5 लाख से अधिक कीमत के मोटर वाहन (दो-पहिया समेत) की खरीद पर PAN जरूरी
  • जमीन या मकान जैसे अचल संपत्ति सौदों में ₹20 लाख की सीमा
  • होटल, रेस्टोरेंट, इवेंट या लग्जरी सेवाओं में ₹1 लाख से अधिक के बिल पर PAN अनिवार्य

सरकार का मानना है कि इससे छोटे और रोजमर्रा के लेनदेन में आम लोगों पर टैक्स अनुपालन का बोझ कम होगा।

क्रिप्टो एक्सचेंजों पर रिपोर्टिंग नियम और सख्त

डिजिटल एसेट्स को लेकर सरकार ने निगरानी और कड़ी करने का प्रस्ताव रखा है। ड्राफ्ट नियमों के तहत क्रिप्टो एक्सचेंजों और वर्चुअल डिजिटल एसेट सेवा प्रदाताओं को टैक्स विभाग को विस्तृत जानकारी देनी होगी।

इनमें शामिल हैं:

  • ग्राहकों की पहचान संबंधी विवरण
  • लेनदेन का स्रोत और मूल्य
  • क्रिप्टो ट्रांजैक्शनों का पूरा रिकॉर्ड

इस कदम का उद्देश्य क्रिप्टो से जुड़े टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के जोखिम को कम करना है।

इसके साथ ही केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को आधिकारिक तौर पर इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के माध्यम के रूप में मान्यता दी गई है, जिससे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा।

टैक्स रिटर्न और फॉर्म्स होंगे कम

नए नियमों में टैक्स फाइलिंग को सरल बनाने पर खास जोर दिया गया है। मौजूदा 511 नियमों को घटाकर 333 किया जाएगा। टैक्स फॉर्म्स की संख्या 399 से घटाकर 190 करने का प्रस्ताव है।

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कई रिटर्न फॉर्म्स में प्री-फिल्ड डेटा उपलब्ध होगा, जिससे गलतियों की संभावना कम होगी और रिटर्न फाइल करना आसान बनेगा। टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम ‘व्यापार करने में आसानी’ की दिशा में अहम माना जा रहा है।

HRA नियमों में बदलाव, बड़े शहरों को राहत

हाउस रेंट अलाउंस (HRA) से जुड़े नियमों में भी अहम संशोधन प्रस्तावित है। श्रेणी-1 महानगरों की सूची में अब बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद और हैदराबाद को भी शामिल किया गया है। इससे इन शहरों में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को ज्यादा टैक्स छूट का लाभ मिलेगा।

सरकार का मकसद क्या है?

सीबीडीटी के अधिकारियों के अनुसार, नए आयकर नियमों का मकसद टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-फ्रेंडली बनाना है। हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शनों पर फोकस कर टैक्स प्रशासन को बेहतर जानकारी मिलेगी, जबकि आम करदाताओं के लिए अनुपालन बोझ कम होगा।

निष्कर्ष

ड्राफ्ट आयकर नियम 2026 में प्रस्तावित बदलाव भारत की कर व्यवस्था को नए दौर के अनुरूप ढालने की कोशिश है। PAN थ्रेशोल्ड में बढ़ोतरी से आम लोगों को राहत मिलेगी, वहीं क्रिप्टो और डिजिटल एसेट्स पर सख्त नियम पारदर्शिता बढ़ाएंगे। अब सभी की नजरें जनता और विशेषज्ञों से मिलने वाले सुझावों पर टिकी है, जिनके बाद इन नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

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यह लेख Cointelegraph की Editorial Policy के अनुसार तैयार किया गया है और केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह निवेश सलाह या अनुशंसाएं नहीं है। सभी निवेश और व्यापार में जोखिम होता है; पाठकों को स्वतंत्र शोध करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

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