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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

WhatsApp पर 'Hello, This is Divya' से शुरू हुई 21 करोड़ की क्रिप्टो ठगी

ताजा खबरेंप्रकाशित15 जुल॰ 2026

WhatsApp पर "Hello, this is Divya" संदेश से शुरू हुई बातचीत एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के लिए 21 करोड़ रुपये के कथित क्रिप्टो निवेश घोटाले में बदल गई।

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मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सामने आए एक बड़े साइबर धोखाधड़ी मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन क्रिप्टो निवेश से जुड़े जोखिमों को उजागर कर दिया है। एक 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट को कथित तौर पर 21.05 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। पूरा मामला एक साधारण WhatsApp संदेश से शुरू हुआ, जिसमें लिखा था, "Hello, This is Divya." इसके बाद कई महीनों तक चली बातचीत ने पीड़ित को एक फर्जी क्रिप्टो ट्रेडिंग मंच पर निवेश करने के लिए प्रेरित कर दिया।

पुलिस के अनुसार, यह धोखाधड़ी दिसंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच हुई। शुरुआत में पीड़ित को छोटे निवेश पर अच्छा लाभ दिखाया गया, जिससे उसका भरोसा बढ़ता गया। बाद में उसने करोड़ों रुपये अलग अलग खातों में भेज दिए। जब रकम निकालने की कोशिश की गई, तब पता चला कि पूरा निवेश मंच ही संदिग्ध था और दिखाया जा रहा लाभ केवल डिजिटल आंकड़ों तक सीमित था।

दोस्ती से निवेश तक, ऐसे रची गई पूरी साजिश

जांच में सामने आया कि "दिव्या" नाम से संपर्क करने वाली महिला ने पहले सामान्य बातचीत शुरू की। धीरे धीरे दोनों के बीच विश्वास कायम किया गया। कुछ समय बाद उसने खुद को क्रिप्टो निवेश से अच्छा मुनाफा कमाने वाला निवेशक बताया और पीड़ित को भी उसी मंच पर निवेश करने की सलाह दी।

शुरुआती चरण में पीड़ित ने कम राशि निवेश की। कथित तौर पर उसे कुछ रकम निकालने की भी अनुमति दी गई, जिससे उसे लगा कि मंच वास्तविक है। इसके बाद उसने लगातार बड़ी रकम निवेश करनी शुरू कर दी। जांच के अनुसार, सात महीनों में उसने कुल 21.05 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में भेज दिए। फर्जी मंच पर उसके खाते में 33 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ दिखाया जा रहा था, लेकिन यह केवल स्क्रीन पर दिखाई देने वाला आंकड़ा था।

पैसे निकालने की कोशिश में खुली ठगी की पोल

मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित ने अपनी कथित कमाई निकालने का प्रयास किया। पहले उससे कर और सेवा शुल्क के नाम पर अतिरिक्त भुगतान मांगा गया। इसके बाद भी निकासी नहीं हुई। जब उसने लगातार दबाव बनाया, तो संपर्क करने वाले लोगों ने जवाब देना बंद कर दिया। इसी के बाद पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

जांच एजेंसियों ने अब तक लगभग दो करोड़ रुपये की राशि फ्रीज कर दी है। हालांकि बाकी रकम कथित तौर पर अलग अलग खातों में भेज दी गई, निकाली गई या अन्य माध्यमों से आगे स्थानांतरित कर दी गई। पुलिस धन के पूरे प्रवाह का पता लगाने और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

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क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे क्रिप्टो निवेश घोटाले?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के जरिए निवेश से जुड़ी ठगी के मामलों में तेजी आई है। ठग पहले दोस्ती या भरोसे का रिश्ता बनाते हैं, फिर ऊंचे मुनाफे का लालच देकर लोगों को फर्जी निवेश मंचों तक ले जाते हैं। शुरुआत में कुछ लेनदेन सफल दिखाकर पीड़ित का विश्वास जीता जाता है और बाद में बड़ी रकम निवेश करवा ली जाती है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि ऐसे मंच अक्सर वास्तविक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसे दिखते हैं। इनमें नकली लाभ, बनावटी चार्ट और झूठे खाते दिखाकर निवेशकों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि उनका पैसा तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन वास्तव में धन सीधे ठगों के नियंत्रण वाले खातों में पहुंच जाता है।

निवेशकों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि केवल WhatsApp संदेश या सोशल मीडिया के जरिए मिले निवेश सुझावों पर भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है। किसी भी क्रिप्टो या निवेश मंच पर पैसा लगाने से पहले उसकी नियामकीय स्थिति, कंपनी की पहचान और स्वतंत्र स्रोतों से उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति असामान्य रूप से अधिक मुनाफे का दावा करे, जल्दी निवेश का दबाव बनाए या निकासी के लिए बार बार अतिरिक्त शुल्क मांगे, तो उसे तुरंत संदेह की नजर से देखना चाहिए। फिलहाल ग्वालियर का यह मामला देश के सबसे बड़े कथित व्यक्तिगत क्रिप्टो निवेश घोटालों में गिना जा रहा है और जांच एजेंसियां इसमें शामिल पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

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