
CoinDCX के सुमित गुप्ता से खास बातचीत: AI, Crypto और भारत का नियमन
CoinDCX के सह-संस्थापक सुमित गुप्ता ने AI और क्रिप्टो, स्टेबलकॉइन, RWA टोकनाइजेशन और भारत में डिजिटल एसेट्स के नियमन पर अपनी राय साझा की।

हमें CoinDCX के सह-संस्थापक सुमित गुप्ता के साथ एक विशेष इंटरव्यू करने का अवसर मिला। इस बातचीत में हमने मौजूदा क्रिप्टो बाजार की स्थिति, इस क्षेत्र के भविष्य की संभावनाओं, AI और क्रिप्टो के बढ़ते मेल और उद्योग से जुड़े कई अन्य अहम मुद्दों पर चर्चा की।
आगे पढ़िए और जानिए कि क्रिप्टो उद्योग के प्रमुख विशेषज्ञों में से एक सुमित गुप्ता बाजार के मौजूदा रुझानों, भविष्य के अवसरों और आने वाली चुनौतियों को लेकर क्या सोचते हैं:
Q1. AI और क्रिप्टो की अक्सर एक साथ चर्चा होती है, लेकिन आज इन दोनों के बीच यह संबंध वास्तव में कितना मजबूत है?
इन दोनों के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहा है और अब यह केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके वास्तविक उपयोग भी सामने आ रहे हैं। AI आधारित डिजिटल परिसंपत्तियों को बढ़ावा मिल रहा है, क्योंकि वे विकेंद्रीकृत कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग नेटवर्क और अगली पीढ़ी के अनुप्रयोगों को समर्थन देने वाले बुनियादी ढांचे को सक्षम बना रही हैं। CoinDCX की H1 2026 निवेश रिपोर्ट में Bittensor (TAO) और RENDER जैसे AI बुनियादी ढांचे से जुड़े टोकन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की रुचि अब अल्पकालिक तेजी के बजाय वास्तविक तकनीकी उपयोगिता वाले प्रोजेक्ट्स की ओर बढ़ रही है।
आने वाले समय में AI और ब्लॉकचेन एक-दूसरे के पूरक बनने की संभावना है। AI स्वचालन और विश्लेषण के जरिए विकेंद्रीकृत नेटवर्क को अधिक बुद्धिमान बना सकता है, जबकि ब्लॉकचेन पारदर्शिता, सत्यापन और भरोसा प्रदान करता है। दोनों मिलकर अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे अनुप्रयोगों को बढ़ावा दे सकते हैं, जो अधिक सुरक्षित, कुशल और उपयोगकर्ताओं की जरूरतों के अनुरूप हों।
Q2. अब से पांच साल बाद क्रिप्टो की मुख्यधारा की कहानी में इनमें से किसका अधिक महत्व होगा: स्टेबलकॉइन, टोकनाइजेशन या AI से जुड़े उपयोग?
ये सभी नवाचार एक साथ आगे बढ़ेंगे, लेकिन लंबे समय में टोकनाइजेशन का प्रभाव सबसे व्यापक होने की संभावना है, क्योंकि यह ब्लॉकचेन तकनीक को मुख्यधारा के वित्तीय बुनियादी ढांचे तक पहुंचाता है। मेरा व्यक्तिगत मानना है कि वास्तविक दुनिया की परिसंपत्तियों (RWA) का टोकनाइजेशन सबसे मजबूत उभरती अवधारणाओं में से एक है। इसमें संस्थागत भागीदारी बढ़ रही है और ब्लॉकचेन पर आधारित वित्तीय उत्पादों का भी विस्तार हो रहा है।
इसी समय, स्टेबलकॉइन के कुशल डिजिटल भुगतान और लेनदेन का आधार बनने की उम्मीद है, जबकि AI आधारित अनुप्रयोग ब्लॉकचेन नेटवर्क के साथ उपयोगकर्ताओं के जुड़ने के तरीके को बेहतर बनाएंगे। ये रुझान एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय एक-दूसरे के पूरक हैं। साथ मिलकर ये ब्लॉकचेन के मुख्यधारा में इस्तेमाल को तेज करेंगे, क्योंकि इससे ब्लॉकचेन का बुनियादी ढांचा रोजमर्रा के वित्तीय उपयोग के लिए अधिक व्यावहारिक, सुलभ और प्रासंगिक बनेगा।
Q3. आपकी राय में भारत को वर्चुअल डिजिटल एसेट्स को किस रूप में वर्गीकृत करना चाहिए: संपत्ति, कमोडिटी, सिक्योरिटी या पूरी तरह नई परिसंपत्ति श्रेणी?
वर्चुअल डिजिटल एसेट्स एक विविध क्षेत्र का हिस्सा हैं, जिसमें भुगतान, उपयोगिता, शासन और टोकनाइज्ड वास्तविक दुनिया की परिसंपत्तियां शामिल हैं। इस विविधता को देखते हुए, सिद्धांत आधारित नियामकीय ढांचा एक उचित तरीका होगा। ऐसा ढांचा अलग-अलग VDA की विशिष्ट और मूल विशेषताओं को ध्यान में रखे।
CoinDCX ने लगातार स्पष्ट नियमन और जिम्मेदार नवाचार की वकालत की है। दुनियाभर के बाजारों में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के लिए अधिक स्पष्ट नियम बनाए जा रहे हैं। ऐसे में भारत के पास एक संतुलित दृष्टिकोण तैयार करने का अवसर है, जो उपभोक्ताओं की सुरक्षा करे, नवाचार को बढ़ावा दे और देश को तेजी से बदलती Web3 अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद करे।
Q4. आपकी राय में कौन सा क्रिप्टो नियामकीय ढांचा, जैसे MiCA, VARA या CLARITY, सबसे बेहतर तरीके से तैयार किया गया है और भारत के लिए इसे अपनाना सबसे उपयुक्त होगा?
हर ढांचे से महत्वपूर्ण सीख मिलती है। MiCA ने पूरे यूरोप में लाइसेंसिंग और उपभोक्ता सुरक्षा के लिए व्यापक मानक स्थापित किए हैं, जबकि VARA वर्चुअल एसेट्स के लिए एक समर्पित नियामक के महत्व को दिखाता है। दुनियाभर में व्यापक रुझान यह है कि नियामक अब प्रायोगिक परियोजनाओं से आगे बढ़कर ऐसे व्यापक नियम तैयार कर रहे हैं, जो कारोबार और उपभोक्ताओं के लिए अधिक स्पष्टता प्रदान करते हैं।
हालांकि, भारत के लिए सबसे प्रभावी तरीका अपना खुद का ढांचा तैयार करना होगा, जिसमें वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को शामिल किया जाए और साथ ही देश के विशिष्ट वित्तीय तंत्र तथा डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को ध्यान में रखा जाए। एक संतुलित और सिद्धांत आधारित ढांचा, जो पारदर्शिता, नवाचार, उपभोक्ता सुरक्षा और नियामकीय स्पष्टता को बढ़ावा दे, भारत को वैश्विक Web3 क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद कर सकता है।
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