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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

पाकिस्तान ने कस दी क्रिप्टो पर लगाम, मनी लॉन्ड्रिंग रोकने को बनी नई जांच इकाई

ताजा खबरेंप्रकाशित22 जुल॰ 2026

पाकिस्तान ने क्रिप्टो से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए नई Cryptocurrency Investigation Unit बनाई है।

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पाकिस्तान ने डिजिटल परिसंपत्तियों से जुड़े अपराधों पर निगरानी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। देश की संघीय जांच एजेंसी (FIA) ने एक विशेष क्रिप्टोकरेंसी जांच इकाई की स्थापना की है, जिसका उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण, साइबर अपराध और अन्य अवैध गतिविधियों में डिजिटल परिसंपत्तियों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। यह नई इकाई FIA के हाल ही में शुरू किए गए नेशनल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (NC3) के तहत काम करेगी।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान एक ओर डिजिटल परिसंपत्तियों के लिए नियामकीय ढांचा तैयार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर क्रिप्टो के दुरुपयोग को रोकने के लिए निगरानी भी मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दिखाता है कि सरकार अब केवल क्रिप्टो को बढ़ावा देने पर ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करने पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है।

नई जांच इकाई क्या करेगी?

FIA के अनुसार, नई जांच इकाई का मुख्य काम क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाले संदिग्ध लेनदेन की पहचान करना और वित्तीय अपराधों की जांच करना होगा। इसके अलावा यह इकाई साइबर ठगी, नशीले पदार्थों के कारोबार, मानव तस्करी और आतंकवाद के वित्तपोषण जैसे मामलों में डिजिटल परिसंपत्तियों के इस्तेमाल पर भी नजर रखेगी।

नई व्यवस्था के तहत विशेष जांच दल बनाए जाएंगे, जिन्हें ब्लॉकचेन विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्य एकत्र करने और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे सीमा पार होने वाले वित्तीय अपराधों की जांच पहले की तुलना में अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल परिसंपत्तियों के बढ़ते उपयोग के साथ ऐसी विशेष जांच इकाइयों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। कई देशों ने पहले ही इसी तरह की विशेष टीमें बनाई हैं जो केवल वर्चुअल परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों पर काम करती हैं।

क्रिप्टो अपनाने और निगरानी दोनों पर जोर

पाकिस्तान पिछले एक वर्ष से क्रिप्टो क्षेत्र में तेजी से बदलाव कर रहा है। सरकार ने पहले डिजिटल परिसंपत्तियों के लिए नियामकीय ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाए और इसके लिए पाकिस्तान वर्चुअल एसेट्स रेगुलेटरी अथॉरिटी की स्थापना की। इसका उद्देश्य एक्सचेंजों को लाइसेंस देना, बाजार की निगरानी करना और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नियम लागू करना है।

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हालांकि हाल ही में देश में क्रिप्टो को लेकर धार्मिक बहस भी तेज हुई है। कुछ प्रमुख इस्लामी विद्वानों ने सट्टेबाजी आधारित क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर सवाल उठाए हैं, जिसके बाद नियामकों ने परिसंपत्तियों को अलग अलग श्रेणियों में परखने की प्रक्रिया शुरू की है। सरकार का कहना है कि वास्तविक परिसंपत्तियों से जुड़े डिजिटल टोकन और पूरी तरह सट्टा आधारित टोकनों को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए।

वैश्विक स्तर पर भी बढ़ रही निगरानी

क्रिप्टो उद्योग के तेजी से विस्तार के साथ दुनिया भर में नियामकीय निगरानी भी बढ़ रही है। हाल ही में वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि संगठित अपराध समूह अब भी डिजिटल परिसंपत्तियों का इस्तेमाल अवैध धन के लेनदेन के लिए कर रहे हैं। रिपोर्ट में देशों से नियमन और प्रवर्तन व्यवस्था मजबूत करने की अपील की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की नई जांच इकाई भी इसी वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा है। अब सरकारें केवल क्रिप्टो बाजार को विकसित करने पर ध्यान नहीं दे रहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि इसका इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों के लिए न हो।

आगे क्या रहेगा असर?

नई जांच इकाई बनने के बाद पाकिस्तान में क्रिप्टो लेनदेन की निगरानी और सख्त होने की संभावना है। इससे लाइसेंस प्राप्त सेवा प्रदाताओं और वैध निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है, जबकि अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए जोखिम भी बढ़ेगा।

विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी देश में डिजिटल परिसंपत्ति बाजार के विकास के लिए दो चीजें जरूरी होती हैं। पहला स्पष्ट नियामकीय ढांचा और दूसरा मजबूत प्रवर्तन व्यवस्था। पाकिस्तान अब इन दोनों मोर्चों पर एक साथ आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

फिलहाल यह कदम इस बात का संकेत है कि डिजिटल परिसंपत्तियों का बढ़ता उपयोग सरकारों को नई संस्थागत व्यवस्थाएं बनाने के लिए मजबूर कर रहा है। आने वाले समय में यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो क्षेत्र के अन्य देश भी इसी तरह की विशेष क्रिप्टो जांच इकाइयों का गठन कर सकते हैं।

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