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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

सूरत क्रिप्टो घोटाला: 24.72 करोड़ की जांच में इंजीनियर गिरफ्तार

ताजा खबरेंप्रकाशित11 जुल॰ 2026

सूरत में 24.72 करोड़ रुपये से जुड़े कथित क्रिप्टो निवेश घोटाले में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर गिरफ्तार किया गया है।

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देश में क्रिप्टो निवेश के नाम पर होने वाली ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में गुजरात के सूरत शहर की साइबर क्राइम सेल ने 24.72 करोड़ रुपये से जुड़े एक कथित साइबर और क्रिप्टो निवेश धोखाधड़ी मामले में 29 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी का बैंक खाता कई राज्यों में दर्ज साइबर ठगी के मामलों से जुड़ा पाया गया है।

पुलिस का कहना है कि मामला तब सामने आया जब सूरत के एक निवेशक ने शिकायत दर्ज कराई कि उसे Telegram के जरिए क्रिप्टो ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच दिया गया। पीड़ित को एक फर्जी निवेश मंच पर खाता खोलने के लिए कहा गया और बाद में उससे 72.73 लाख रुपये अलग अलग बैंक खातों में जमा करा लिए गए। जब न तो मुनाफा मिला और न ही मूल रकम वापस हुई, तब पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई।

Telegram से शुरू हुआ निवेश का जाल

जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए धन के प्रवाह का पता लगाया। अधिकारियों के अनुसार, पीड़ित द्वारा भेजी गई राशि में से लगभग 17 लाख रुपये एक ऐसे बैंक खाते में पहुंचे, जो गिरफ्तार किए गए इंजीनियर से जुड़ा था। पूछताछ में आरोप है कि उसने अपना बैंक खाता और उससे संबंधित दस्तावेज एक फरार आरोपी को सौंप दिए थे, जिसके बदले उसे प्रत्येक लेनदेन पर 2 प्रतिशत कमीशन मिलने वाला था।

पुलिस के मुताबिक, संबंधित बैंक खाते से करीब 1.60 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है। इसके बाद जांच का दायरा और बढ़ाया गया। अंतरराज्यीय साइबर अपराध समन्वय मंच 'समन्वय पोर्टल' पर जांच करने पर पता चला कि यही बैंक खाता देश के अलग अलग राज्यों में दर्ज आठ साइबर धोखाधड़ी मामलों से भी जुड़ा हुआ है। इन सभी मामलों में कथित धोखाधड़ी की कुल राशि लगभग 24.72 करोड़ रुपये बताई गई है।

मनी म्यूल खाते पर जांच का फोकस

जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मामले में बैंक खाते का इस्तेमाल कथित "मनी म्यूल" के रूप में किया गया। ऐसे खातों का उपयोग साइबर अपराधी चोरी या धोखाधड़ी से हासिल रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के लिए करते हैं ताकि धन के असली स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाए।

पुलिस अब उस फरार आरोपी की तलाश कर रही है, जिसे कथित तौर पर बैंकिंग किट सौंपी गई थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे तथा क्या इस धन का कुछ हिस्सा क्रिप्टो परिसंपत्तियों में बदला गया या विदेश भेजा गया। फिलहाल जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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लगातार बढ़ रहे हैं ऑनलाइन निवेश घोटाले

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में Telegram, WhatsApp और सोशल मीडिया के जरिए चलाए जा रहे फर्जी निवेश समूहों की संख्या तेजी से बढ़ी है। शुरुआत में लोगों को छोटे निवेश पर लाभ दिखाया जाता है, जिससे उनका भरोसा जीत लिया जाता है। इसके बाद बड़ी रकम निवेश कराने के बाद ठग संपर्क तोड़ देते हैं।

साइबर अपराध शाखा ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए निवेश प्रस्ताव पर भरोसा न करें। खासकर यदि कोई व्यक्ति क्रिप्टो, विदेशी मुद्रा या शेयर बाजार में कम समय में असामान्य मुनाफे का दावा करता है, तो उसकी स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है। पुलिस ने लोगों से अज्ञात Telegram और WhatsApp समूहों से बाहर निकलने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की है।

निवेशकों के लिए क्या है संदेश?

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर अपराधी अब पारंपरिक ऑनलाइन ठगी के साथ साथ क्रिप्टो निवेश का नाम भी इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ऊंचे रिटर्न का वादा किसी निवेश को सुरक्षित नहीं बनाता। निवेश से पहले मंच की विश्वसनीयता, नियामकीय स्थिति और कंपनी की पृष्ठभूमि की जांच करना बेहद जरूरी है।

सूरत की यह कार्रवाई संकेत देती है कि देश की जांच एजेंसियां अब साइबर धोखाधड़ी और क्रिप्टो से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेनदेन पर पहले से अधिक सख्ती से नजर रख रही हैं। यदि जांच में और कड़ियां जुड़ती हैं, तो आने वाले दिनों में इस मामले में अतिरिक्त गिरफ्तारियां और नई कार्रवाई भी देखने को मिल सकती है।

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