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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

पश्चिम बंगाल में क्रिप्टो निवेश घोटाले पर ED का बड़ा एक्शन, कई ठिकानों पर छापेमारी

ताजा खबरेंप्रकाशित10 जुल॰ 2026

प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल में कथित क्रिप्टो निवेश और चिट फंड धोखाधड़ी मामले में कई स्थानों पर छापेमारी की है। जानिए जांच में किन आरोपों की पड़ताल हो रही है और निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है।

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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल में कथित क्रिप्टो निवेश, चिट फंड और फर्जी शेयर बाजार प्रशिक्षण योजनाओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़े स्तर पर छापेमारी की है। एजेंसी ने राज्य के कई जिलों में एक साथ कार्रवाई करते हुए उन लोगों के परिसरों की तलाशी ली, जिन पर निवेशकों से करोड़ों रुपये जुटाकर ऊंचे मुनाफे का झांसा देने का आरोप है। जांच एजेंसी का मानना है कि इस मामले में जुटाई गई रकम का एक हिस्सा विदेश भेजा गया हो सकता है।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब देश में क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर निवेश ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल परिसंपत्तियों का नाम लेकर लोगों को अधिक रिटर्न का लालच देना अब साइबर और वित्तीय अपराधियों की नई रणनीति बनता जा रहा है।

किन लोगों और योजनाओं की हो रही है जांच?

जांच के दायरे में पश्चिम बर्धमान, हावड़ा और नदिया जिलों के कई ठिकाने शामिल हैं। ED ने पूर्व ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) कर्मचारी दिलीप मलिक, उनके बेटे दिगंत मलिक, सौरव चटर्जी और कारोबारी शुभ्र कांति नाग से जुड़े परिसरों की तलाशी ली। जांच एजेंसी के अनुसार, दिगंत मलिक और उनके पिता पर सोशल मीडिया के जरिए लोगों को क्रिप्टो निवेश में ऊंचे मुनाफे का वादा कर निवेश के लिए प्रेरित करने का आरोप है।

ED यह भी जांच कर रही है कि क्या कथित निवेश योजनाओं से जुटाई गई राशि को अलग अलग खातों और माध्यमों से मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए विदेश भेजा गया। रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसी दुबई से जुड़े संभावित वित्तीय संबंधों की भी पड़ताल कर रही है। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई के बाद ही होगा।

चिट फंड और क्रिप्टो का मिला जुला मॉडल बना जांच का केंद्र

जांच एजेंसियों का कहना है कि इस मामले में पारंपरिक चिट फंड जैसी योजनाओं को आधुनिक क्रिप्टो निवेश के साथ जोड़कर पेश किया गया। आरोप है कि कुछ संस्थाओं ने शेयर बाजार प्रशिक्षण और निवेश सलाह के नाम पर लोगों से धन जुटाया, जबकि कुछ मामलों में क्रिप्टो निवेश को तेज मुनाफे का माध्यम बताकर निवेश कराया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की योजनाओं में अक्सर सोशल मीडिया का व्यापक इस्तेमाल किया जाता है। पहले लोगों को अधिक रिटर्न का भरोसा दिलाया जाता है और शुरुआती निवेशकों को कुछ भुगतान कर भरोसा बनाया जाता है। बाद में बड़ी संख्या में लोगों से धन जुटाने के बाद योजना के ध्वस्त होने का खतरा बढ़ जाता है।

पश्चिम बंगाल पहले भी बड़े चिट फंड घोटालों का गवाह रह चुका है। ऐसे में जांच एजेंसियां अब उन मामलों पर विशेष नजर रख रही हैं जिनमें पारंपरिक वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल परिसंपत्तियों का एक साथ इस्तेमाल किया जा रहा है।

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निवेशकों के लिए क्या है सबसे बड़ी सीख?

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई संस्था कम समय में असामान्य रूप से अधिक मुनाफे का वादा करती है, तो निवेशकों को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है। केवल सोशल मीडिया प्रचार, बड़े दावों या प्रभावशाली प्रस्तुतियों के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए।

क्रिप्टोकरेंसी स्वयं अवैध नहीं है, लेकिन उसके नाम पर चलने वाली हर निवेश योजना भी भरोसेमंद नहीं होती। निवेश से पहले कंपनी का पंजीकरण, उसका कारोबार, नियामकीय स्थिति और जोखिमों की पूरी जानकारी लेना जरूरी है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल ED इस मामले में जब्त दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग या विदेशी धन हस्तांतरण के ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो मामले में आगे और लोगों से पूछताछ या अतिरिक्त कार्रवाई हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत भी है कि जांच एजेंसियां अब क्रिप्टो निवेश के नाम पर चल रही संदिग्ध योजनाओं पर पहले से अधिक सख्त नजर रख रही हैं। ऐसे मामलों में निवेशकों की जागरूकता और नियामकीय निगरानी दोनों की भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण होने वाली है।

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