
ED ने Sriki के खिलाफ क्रिप्टो मनी लॉन्ड्रिंग चार्जशीट दाखिल की
प्रवर्तन निदेशालय ने कथित हैकर श्रीकृष्णा उर्फ Sriki के खिलाफ क्रिप्टो मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट दाखिल की है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बेंगलुरु के चर्चित कथित हैकर श्रीकृष्णा रमेश उर्फ Sriki के खिलाफ क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने विशेष अदालत में करीब 3,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें Sriki के अलावा कुछ अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि साइबर अपराध से हासिल डिजिटल संपत्तियों को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए छिपाने और उन्हें वैध धन के रूप में दिखाने की कोशिश की गई।
यह मामला पिछले कई वर्षों से चर्चा में रहा है। Sriki पर सरकारी और निजी वेबसाइटों में कथित सेंधमारी, बिटकॉइन की चोरी और डिजिटल संपत्तियों के अवैध लेनदेन जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं। अब ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए अदालत में विस्तृत अभियोजन शिकायत दाखिल की है।
जांच एजेंसी ने क्या आरोप लगाए?
चार्जशीट के अनुसार, जांच में यह आरोप लगाया गया है कि साइबर अपराध से प्राप्त बिटकॉइन और अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों को कई माध्यमों से इधर उधर भेजा गया ताकि उनकी वास्तविक उत्पत्ति को छिपाया जा सके। ED का दावा है कि इस दौरान क्रिप्टो लेनदेन, विभिन्न खातों और अन्य वित्तीय माध्यमों का इस्तेमाल कर धन के स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई।
जांच एजेंसी ने इस मामले में एक क्रिप्टो ट्रेडर और एक कारोबारी को भी आरोपी बनाया है। आरोप है कि कथित अवैध धन को अलग अलग चैनलों के जरिए स्थानांतरित कर बाद में वैध संपत्तियों में बदला गया। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई के बाद ही होगा।
ED का कहना है कि उसने डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेजों और ब्लॉकचेन से जुड़े लेनदेन का विश्लेषण कर धन के प्रवाह को समझने की कोशिश की है। एजेंसी के अनुसार, चार्जशीट में इसी जांच से जुड़े विस्तृत साक्ष्य शामिल किए गए हैं।
पहले भी हो चुकी है व्यापक जांच
यह पहली बार नहीं है जब Sriki से जुड़े मामले में ED ने कार्रवाई की हो। इससे पहले अप्रैल 2026 में एजेंसी ने कर्नाटक में कई स्थानों पर छापेमारी की थी। उन छापों का संबंध भी कथित बिटकॉइन चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से बताया गया था। जांच के दौरान कुछ राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के परिसरों की भी तलाशी ली गई थी, क्योंकि एजेंसी कथित लाभार्थियों और धन के प्रवाह की जांच कर रही थी।.
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मामले की शुरुआत कर्नाटक पुलिस की उन प्राथमिकी और जांच से हुई थी, जिनमें आरोप लगाया गया था कि कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वेबसाइटों को निशाना बनाकर बिटकॉइन हासिल किए गए। बाद में इसी आधार पर ED ने धन शोधन के पहलू की जांच शुरू की।
क्रिप्टो जांच में बढ़ रहा ब्लॉकचेन विश्लेषण का इस्तेमाल
हाल के वर्षों में भारत की जांच एजेंसियां क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े मामलों में ब्लॉकचेन विश्लेषण का अधिक इस्तेमाल कर रही हैं। डिजिटल लेनदेन सार्वजनिक ब्लॉकचेन पर दर्ज होने के कारण धन के प्रवाह का विश्लेषण पहले की तुलना में अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। हालांकि यदि लेनदेन कई वॉलेट और विभिन्न सेवाओं के माध्यम से किए जाएं, तो जांच काफी जटिल हो जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी पूरी तरह गुमनाम नहीं होती। आधुनिक जांच तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मदद से कई मामलों में डिजिटल संपत्तियों के प्रवाह का पता लगाया जा सकता है। यही कारण है कि भारत समेत कई देशों की प्रवर्तन एजेंसियां अब साइबर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ब्लॉकचेन फोरेंसिक तकनीकों का उपयोग बढ़ा रही हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल ED की चार्जशीट विशेष अदालत के समक्ष पेश की जा चुकी है। अब अदालत इस मामले में अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और आरोपों की समीक्षा करेगी। आरोपियों को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही किसी प्रकार की जिम्मेदारी तय होगी।
यह मामला भारत में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर केवल इस जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में डिजिटल परिसंपत्तियों से जुड़े अपराधों की जांच, नियमन और निगरानी के तरीके पर भी पड़ सकता है। साथ ही यह मामला इस बात का भी संकेत है कि भारतीय एजेंसियां अब साइबर अपराध और क्रिप्टो आधारित मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में अधिक आक्रामक रुख अपना रही हैं।
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