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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

ट्रंप की CLARITY Act पर जोरदार अपील, क्रिप्टो बाजार में फिर बढ़ी उम्मीद

ताजा खबरेंप्रकाशित20 अग॰ 2026

डोनाल्ड ट्रंप ने क्रिप्टो उद्योग के नेताओं के साथ बैठक में CLARITY Act को जल्द पास करने की अपील की। जानिए कानून क्यों अटका है और इसका क्रिप्टो बाजार पर क्या असर होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्रिप्टोकरेंसी के लिए व्यापक नियामकीय ढांचा तैयार करने वाले CLARITY Act को जल्द पास करने की अपील की है। 19 अगस्त को व्हाइट हाउस में क्रिप्टो उद्योग के शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई बैठक में ट्रंप ने कहा कि कांग्रेस को इस विधेयक पर आगे बढ़ना चाहिए। उनके इस बयान के बाद Bitcoin और कई क्रिप्टो कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली।

बैठक में Coinbase, Robinhood, Ripple, Kraken और Gemini जैसी कंपनियों के प्रमुखों के अलावा अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग यानी SEC के चेयरमैन पॉल एटकिंस और कमोडिटी वायदा कारोबार आयोग यानी CFTC के चेयरमैन माइकल सेलिग भी मौजूद थे।

ट्रंप का समर्थन ऐसे समय आया है जब CLARITY Act अमेरिकी सीनेट में अटका हुआ है। सीनेट अगस्त के अवकाश पर जा चुकी है और विधेयक पर अगली महत्वपूर्ण प्रक्रिया सितंबर में होने की उम्मीद है। इससे 2026 में इसके कानून बनने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

CLARITY Act क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

CLARITY Act का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में डिजिटल परिसंपत्तियों के लिए स्पष्ट नियम बनाना है। अभी कई क्रिप्टो परियोजनाओं और कंपनियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसी डिजिटल टोकन को प्रतिभूति माना जाएगा या वस्तु। इसके साथ यह भी स्पष्ट नहीं है कि किसी विशेष क्रिप्टो गतिविधि की निगरानी SEC करेगा या CFTC।

प्रस्तावित कानून इस जिम्मेदारी को अधिक स्पष्ट करने की कोशिश करता है। इससे कंपनियों को यह समझने में आसानी हो सकती है कि उन्हें किन नियमों का पालन करना होगा और किस नियामक के साथ काम करना होगा।

क्रिप्टो उद्योग लंबे समय से ऐसे कानून की मांग कर रहा है। कंपनियों का तर्क है कि स्पष्ट नियम मिलने से अमेरिका में निवेश और नई तकनीक का विकास बढ़ सकता है। ट्रंप ने भी बैठक में कहा कि अमेरिका को डिजिटल परिसंपत्ति क्षेत्र में अपनी बढ़त बनाए रखनी चाहिए और चीन से पीछे नहीं रहना चाहिए।

सीनेट में क्यों अटका हुआ है विधेयक?

CLARITY Act को लेकर सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक मतभेद हैं। रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में 53 सीटें हैं, जबकि सामान्य प्रक्रिया में आगे बढ़ने के लिए 60 वोट की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में विधेयक को डेमोक्रेट सांसदों के समर्थन की भी आवश्यकता होगी।

विपक्ष की एक बड़ी चिंता ट्रंप और उनके परिवार की क्रिप्टो कारोबार में भागीदारी है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप परिवार ने 2025 में क्रिप्टो से जुड़े कारोबारों से 1.4 अरब डॉलर से अधिक की कमाई की। आलोचकों का कहना है कि ऐसे में राष्ट्रपति द्वारा समर्थित क्रिप्टो कानून में राजनीतिक हितों के टकराव को रोकने के लिए मजबूत प्रावधान होने चाहिए। ट्रंप ने हालांकि अपने निजी कारोबारों के दैनिक संचालन में शामिल होने से इनकार किया है।

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बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े कुछ समूह भी विधेयक के कुछ हिस्सों को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि क्रिप्टो कंपनियों को कुछ वित्तीय सेवाएं देने की अनुमति मिलने से पारंपरिक बैंकों के सामने नई प्रतिस्पर्धा पैदा हो सकती है।

बाजार ने कैसे दी प्रतिक्रिया?

ट्रंप के बयान का असर तुरंत क्रिप्टो बाजार पर दिखाई दिया। Bitcoin 70,000 डॉलर के ऊपर पहुंच गया और दिन के दौरान करीब 3.8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। Ether में भी लगभग 3.3 प्रतिशत की बढ़त रही।

क्रिप्टो कंपनियों के शेयरों में भी तेजी आई। Coinbase करीब 5.7 प्रतिशत, MicroStrategy लगभग 5.8 प्रतिशत और Robinhood करीब 1 प्रतिशत ऊपर रहे। इससे संकेत मिला कि निवेशकों को अमेरिकी नियमन में स्पष्टता आने की उम्मीद फिर से मजबूत हुई है।

हालांकि बाजार की यह प्रतिक्रिया विधेयक के कानून बनने की गारंटी नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों में भी CLARITY Act को लेकर उम्मीदें कमजोर हुई थीं। सीनेट में इसकी प्रक्रिया अगस्त अवकाश के बाद आगे बढ़ेगी और अगली महत्वपूर्ण तारीख 15 सितंबर बताई गई है।

अब आगे क्या होगा?

ट्रंप का खुला समर्थन क्रिप्टो उद्योग के लिए सकारात्मक राजनीतिक संकेत जरूर है, लेकिन विधेयक को अभी लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। सीनेट में राजनीतिक सहमति बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा नैतिकता, राजनीतिक हितों और क्रिप्टो कंपनियों के लिए प्रस्तावित नियमों को लेकर बातचीत भी जारी रहेगी।

इस बीच SEC ने भी क्रिप्टो कंपनियों और टोकन जारी करने से जुड़े नियमों को आसान बनाने की दिशा में अलग प्रस्तावों पर काम शुरू किया है। इससे संकेत मिलता है कि CLARITY Act में देरी के बावजूद अमेरिकी नियामक डिजिटल परिसंपत्ति क्षेत्र के लिए नया ढांचा तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।

फिलहाल ट्रंप का संदेश साफ है कि वह CLARITY Act को आगे बढ़ाना चाहते हैं। अब असली परीक्षा अमेरिकी कांग्रेस की है। यदि सितंबर में सीनेट में राजनीतिक सहमति बनती है, तो यह कानून अमेरिका के क्रिप्टो बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। वहीं अगर मतभेद बने रहते हैं, तो व्यापक डिजिटल परिसंपत्ति नियमन का रास्ता एक बार फिर लंबा खिंच सकता है।

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