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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

क्रिप्टो निवेशकों के लिए बड़ी खबर, CBDT की नई गाइडलाइन से बढ़ेगी लेनदेन की निगरानी

ताजा खबरेंप्रकाशित19 अग॰ 2026

CBDT की नई 198 पन्नों की गाइडलाइन से क्रिप्टो लेनदेन की निगरानी बढ़ेगी। जानिए ITR, 30% टैक्स, 1% TDS और नए रिपोर्टिंग नियमों का निवेशकों पर असर।

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भारत में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कर नियमों को लेकर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी CBDT ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बोर्ड ने क्रिप्टो परिसंपत्तियों की रिपोर्टिंग को लेकर 198 पन्नों की नई गाइडलाइन जारी की है। इसका उद्देश्य क्रिप्टो एक्सचेंज और दूसरे संबंधित सेवा प्रदाताओं के लिए लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग तक पहुंचाने की प्रक्रिया को स्पष्ट करना है।

नई व्यवस्था का सीधा मतलब यह नहीं है कि आम निवेशकों पर कोई नया कर या अलग से कोई नया रिटर्न दाखिल करने की जिम्मेदारी लगा दी गई है। असल बदलाव क्रिप्टो सेवा प्रदाताओं की रिपोर्टिंग व्यवस्था में हुआ है। हालांकि इसका अप्रत्यक्ष असर निवेशकों पर जरूर पड़ेगा, क्योंकि आयकर विभाग को क्रिप्टो लेनदेन की अधिक विस्तृत जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।

यह कदम भारत को आर्थिक सहयोग और विकास संगठन यानी OECD के क्रिप्टो एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क, जिसे CARF कहा जाता है, के अनुरूप लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों के बीच क्रिप्टो लेनदेन से जुड़ी कर जानकारी साझा करना आसान बनाना है।

क्रिप्टो एक्सचेंजों को देनी होगी ज्यादा जानकारी

नई व्यवस्था का मुख्य जिम्मा रिपोर्टिंग क्रिप्टो एसेट सेवा प्रदाताओं पर है। इसमें क्रिप्टो एक्सचेंज, कुछ दलाल, डीलर, संरक्षक और अन्य संबंधित सेवा प्रदाता शामिल हो सकते हैं। आयकर अधिनियम 2025 की धारा 509 और आयकर नियम 2026 के नियम 241 से 244 के तहत इनके लिए रिपोर्टिंग और पहचान संबंधी प्रक्रियाएं तय की गई हैं।

इन संस्थाओं को ग्राहकों की पहचान, कर निवास और संबंधित क्रिप्टो लेनदेन की जानकारी व्यवस्थित तरीके से रखनी होगी। इसमें क्रिप्टो की खरीद, बिक्री, अदला-बदली और कुछ प्रकार के हस्तांतरण जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इसके लिए फॉर्म 167 का इस्तेमाल किया जाएगा।

इसका एक बड़ा उद्देश्य यह है कि क्रिप्टो लेनदेन को पारंपरिक वित्तीय गतिविधियों की तरह अधिक पारदर्शी बनाया जा सके। सरकार के अनुसार, डिजिटल परिसंपत्तियों की सीमा पार प्रकृति के कारण पुराने वित्तीय रिपोर्टिंग ढांचे में एक कमी थी, जिसे CARF के जरिए दूर करने की कोशिश की जा रही है।

निवेशकों पर क्या होगा असर?

आम निवेशक के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नई गाइडलाइन अपने आप में कोई नया क्रिप्टो टैक्स नहीं लगाती और न ही हर व्यक्ति के लिए अलग से धारा 509 के तहत रिपोर्ट दाखिल करने की व्यवस्था करती है। धारा 509 में रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी निर्धारित रिपोर्टिंग संस्थाओं पर रखी गई है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि निवेशक अपनी क्रिप्टो गतिविधियों को लेकर लापरवाह हो सकते हैं। एक्सचेंज और अन्य सेवा प्रदाताओं से अधिक जानकारी आयकर विभाग तक पहुंचने के कारण निवेशकों के घोषित आंकड़ों और वास्तविक लेनदेन के बीच अंतर आसानी से सामने आ सकता है।

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यानी यदि किसी व्यक्ति ने क्रिप्टो से लाभ कमाया है, तो उसे अपनी आय की सही जानकारी आयकर रिटर्न में देनी होगी। नुकसान होने की स्थिति में भी लेनदेन का सही रिकॉर्ड रखना जरूरी है। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक अलग-अलग एक्सचेंज और वॉलेट से किए गए सभी लेनदेन का रिकॉर्ड संभालकर रखें और उसे कर विवरण से मिलाएं।

30% टैक्स और 1% TDS अब भी लागू

नई रिपोर्टिंग व्यवस्था को क्रिप्टो के मौजूदा कर नियमों से अलग समझना जरूरी है। भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट यानी VDA से होने वाले लाभ पर 30 प्रतिशत कर लागू है। इसके साथ लागू अधिभार और उपकर भी लग सकते हैं। आयकर विभाग के अनुसार, VDA से होने वाली आय के लिए ITR-2 और ITR-3 में अलग Schedule VDA दिया गया है।

इसके अलावा पात्र लेनदेन पर 1 प्रतिशत TDS की व्यवस्था भी लागू है। यह TDS अंतिम कर नहीं है, बल्कि करदाता के खाते में जमा होने वाला कर क्रेडिट है। अंतिम कर देनदारी अलग से निर्धारित होती है।

VDA से होने वाले लाभ की गणना में अधिग्रहण लागत को छोड़कर सामान्य खर्चों की कटौती नहीं मिलती। साथ ही एक VDA में हुआ नुकसान दूसरे VDA के लाभ से समायोजित नहीं किया जा सकता।

विदेशों में भी पहुंचेगी क्रिप्टो लेनदेन की जानकारी

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर आने वाले वर्षों में दिखाई दे सकता है। भारत CARF के अनुरूप क्रिप्टो लेनदेन की जानकारी साझा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे कर अधिकारियों के लिए सीमा पार क्रिप्टो गतिविधियों की जानकारी हासिल करना आसान हो सकता है।

इसका अर्थ है कि विदेशी मंचों या अलग-अलग देशों में मौजूद क्रिप्टो सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए भी कर अनुपालन का महत्व बढ़ जाएगा। केवल किसी विदेशी मंच पर लेनदेन करने से वह गतिविधि भारतीय कर व्यवस्था की नजर से बाहर नहीं मानी जा सकती।

फिलहाल CBDT की नई गाइडलाइन का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भारत में क्रिप्टो बाजार तेजी से अधिक पारदर्शी और निगरानी वाली व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। निवेशकों पर कोई नया अलग कर नहीं लगाया गया है, लेकिन उनके लेनदेन की जानकारी पहले से अधिक व्यवस्थित तरीके से कर विभाग तक पहुंच सकती है। ऐसे में सही रिकॉर्ड रखना और ITR में क्रिप्टो आय की सही जानकारी देना आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो जाएगा।

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