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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

क्रिप्टो टैक्स में बदलाव की चर्चा तेज, क्या घटेगा 30% टैक्स और 1% टीडीएस?

ताजा खबरेंप्रकाशित18 अग॰ 2026

भारत में क्रिप्टो पर 30% टैक्स और 1% टीडीएस को लेकर फिर बहस तेज हुई है। जानिए क्या सरकार टैक्स नियमों में बदलाव कर सकती है और निवेशकों पर इसका क्या असर होगा।

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भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर लागू कर व्यवस्था में बदलाव की अटकलों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। भारतीय जनता पार्टी में हालिया संगठनात्मक बदलाव के बाद सोशल मीडिया और क्रिप्टो समुदाय में यह चर्चा शुरू हुई कि क्या सरकार वर्चुअल डिजिटल एसेट यानी क्रिप्टो पर लागू 30% टैक्स और 1% टीडीएस में राहत दे सकती है।

हालांकि अभी तक केंद्र सरकार, वित्त मंत्रालय या केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव घोषित नहीं किया गया है। मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह लागू है। इसलिए टैक्स में बदलाव की मौजूदा चर्चा को फिलहाल अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

फिर भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारतीय क्रिप्टो उद्योग लंबे समय से कर व्यवस्था में बदलाव की मांग करता रहा है। कारोबारियों का कहना है कि मौजूदा नियम खासकर ज्यादा कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए पूंजी की लागत बढ़ाते हैं और इससे घरेलू मंचों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है।

30% टैक्स और 1% टीडीएस क्यों बना मुद्दा?

भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट से होने वाली आय पर 30% कर लागू है। इसके अलावा कुछ क्रिप्टो लेनदेन पर 1% टीडीएस भी काटा जाता है। इसमें लागू अधिभार और स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर अलग से शामिल हो सकते हैं।

उद्योग की सबसे बड़ी चिंता 1% टीडीएस को लेकर है। यह कर केवल मुनाफे पर नहीं, बल्कि लेनदेन की पूरी राशि पर लागू हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति 30 लाख रुपये की क्रिप्टो बिक्री करता है, तो 30,000 रुपये टीडीएस के रूप में काटे जा सकते हैं। यह रकम बाद में कर देनदारी में समायोजित हो सकती है, लेकिन तत्काल तौर पर कारोबारी की उपलब्ध पूंजी कम हो जाती है।

बार-बार खरीद और बिक्री करने वाले कारोबारियों के लिए यह समस्या और बड़ी हो जाती है। एक ही पूंजी कई बार इस्तेमाल होने पर हर लेनदेन के साथ टीडीएस कट सकता है।

विदेशी मंचों की ओर बढ़ा भारतीय कारोबार

टैक्स व्यवस्था को लेकर बहस का एक बड़ा कारण भारतीय कारोबारियों का विदेशी क्रिप्टो मंचों की ओर जाना भी है। Esya Centre के एक अध्ययन के अनुसार, जुलाई 2022 से अक्टूबर 2023 के बीच भारतीयों ने विदेशी मंचों पर 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के वर्चुअल डिजिटल एसेट कारोबार किए। अध्ययन में अनुमान लगाया गया कि इस अवधि में भारतीय क्रिप्टो कारोबार का 90% से अधिक हिस्सा विदेशी मंचों पर चला गया था।

इसी आधार पर विशेषज्ञों और उद्योग संगठनों ने 1% टीडीएस को घटाकर 0.01% करने का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि इससे लेनदेन की निगरानी बनी रह सकती है, लेकिन निवेशकों की कारोबार में लगी पूंजी पर दबाव कम होगा।

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हालांकि विदेशी मंचों पर कारोबार बढ़ने से सरकार के सामने एक दूसरी चुनौती भी है। यदि भारतीय निवेशक घरेलू मंचों के बजाय विदेशी सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, तो देश के भीतर कारोबार और उससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियां कम हो सकती हैं।

क्या सरकार सच में बदल सकती है क्रिप्टो टैक्स व्यवस्था?

फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं है कि सरकार 30% टैक्स या 1% टीडीएस को तुरंत बदलने जा रही है। 2026 के बजट में भी इन दोनों प्रमुख प्रावधानों को बरकरार रखा गया था। इसलिए किसी बदलाव के लिए वित्त मंत्रालय की घोषणा, सीबीडीटी के नए निर्देश, कानून में संशोधन या भविष्य के बजट में प्रस्ताव जरूरी होगा।

क्रिप्टो उद्योग की ओर से केवल टीडीएस घटाने की ही मांग नहीं है। कुछ कारोबारी नुकसान को दूसरे लाभ से समायोजित करने की अनुमति और क्रिप्टो आय पर लागू 30% कर की समीक्षा की भी मांग कर रहे हैं। लेकिन ये फिलहाल उद्योग की मांगें हैं, सरकार की घोषित नीति नहीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार के सामने अब संतुलन बनाने की चुनौती है। एक तरफ कर संग्रह और लेनदेन की निगरानी जरूरी है, तो दूसरी ओर अत्यधिक कर बोझ से घरेलू कारोबार विदेशी मंचों की ओर जा सकता है।

फिलहाल भारतीय क्रिप्टो निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि मौजूदा नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 30% कर और लागू 1% टीडीएस अभी भी प्रभावी हैं। भविष्य में यदि सरकार टैक्स ढांचे में बदलाव करती है, तो उसका असर घरेलू क्रिप्टो कारोबार, निवेशकों की लागत और विदेशी मंचों की ओर जाने वाली पूंजी पर सीधे दिखाई दे सकता है।

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