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लेखक: Pratik Bhuyanस्टाफ संपादक
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क्रिप्टो नियमों पर बड़ी पहल, SEC और CFTC ने जारी किया नया ढांचा

अमेरिकी नियामक SEC और CFTC ने क्रिप्टो परिसंपत्तियों के वर्गीकरण पर संयुक्त व्याख्या जारी की है। नए ढांचे में डिजिटल कमोडिटी, स्टेबलकॉइन और डिजिटल सिक्योरिटी जैसी श्रेणियों को स्पष्ट किया गया है।

क्रिप्टो नियमों पर बड़ी पहल, SEC और CFTC ने जारी किया नया ढांचा
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क्रिप्टोकरेंसी उद्योग में लंबे समय से जारी नियामकीय अनिश्चितता को दूर करने की दिशा में अमेरिका की दो प्रमुख वित्तीय एजेंसियों ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग और कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग आयोग ने मिलकर एक संयुक्त व्याख्या जारी की है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि अलग-अलग प्रकार की क्रिप्टो संपत्तियों को किस तरह वर्गीकृत किया जाएगा।

इस पहल को डिजिटल एसेट उद्योग के लिए एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। U.S. Securities and Exchange Commission (SEC) और Commodity Futures Trading Commission (CFTC) की यह संयुक्त व्याख्या क्रिप्टो परिसंपत्तियों के लिए एक नया ढांचा प्रस्तुत करती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहला अवसर है जब दोनों एजेंसियों ने मिलकर क्रिप्टो परिसंपत्तियों की प्रकृति और उनके नियमन को लेकर विस्तृत मार्गदर्शन जारी किया है। इससे उद्योग में लंबे समय से चली आ रही अस्पष्टता कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

पांच श्रेणियों में बांटा गया क्रिप्टो बाजार

नई व्याख्या के तहत क्रिप्टो परिसंपत्तियों को पांच मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें डिजिटल कमोडिटी, डिजिटल कलेक्टिबल, डिजिटल टूल, स्टेबलकॉइन और डिजिटल सिक्योरिटी शामिल हैं।

डिजिटल कमोडिटी वे क्रिप्टो टोकन हैं जिनकी कीमत मुख्य रूप से नेटवर्क की कार्यप्रणाली और बाजार की मांग-आपूर्ति पर निर्भर करती है। उदाहरण के तौर पर Bitcoin और Ethereum जैसे टोकन को इस श्रेणी में रखा गया है। इन परिसंपत्तियों को सामान्य तौर पर प्रतिभूति यानी सिक्योरिटी नहीं माना गया है।

डिजिटल कलेक्टिबल उन टोकनों को कहा गया है जो किसी डिजिटल वस्तु, कला, गेमिंग आइटम या अन्य संग्रहणीय सामग्री से जुड़े होते हैं। इसी तरह डिजिटल टूल ऐसे टोकन होते हैं जिनका उपयोग किसी सेवा, सदस्यता या डिजिटल पहचान जैसे कार्यों के लिए किया जाता है।

स्टेबलकॉइन को एक अलग श्रेणी में रखा गया है। इनका उद्देश्य किसी स्थिर संपत्ति जैसे अमेरिकी डॉलर के साथ मूल्य को जोड़कर रखना होता है। हालांकि सभी स्टेबलकॉइन एक जैसे नहीं होते और उनकी संरचना के आधार पर नियामकीय स्थिति अलग हो सकती है।

कब सिक्योरिटी बन सकती है क्रिप्टो संपत्ति

इस नई व्याख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी बताता है कि किन परिस्थितियों में कोई क्रिप्टो संपत्ति निवेश अनुबंध के रूप में देखी जा सकती है। यदि किसी टोकन को इस तरह बेचा जाए कि निवेशकों को किसी कंपनी या प्रोजेक्ट की प्रबंधकीय कोशिशों से लाभ की उम्मीद हो, तो वह सिक्योरिटी की श्रेणी में आ सकता है।

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हालांकि एजेंसियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई क्रिप्टो संपत्ति किसी समय निवेश अनुबंध के साथ जुड़ी हो, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह हमेशा के लिए सिक्योरिटी ही रहेगी। जब निवेशकों की लाभ की उम्मीद प्रोजेक्ट की टीम से अलग हो जाती है या प्रोजेक्ट अपने वादे पूरे कर देता है, तो ऐसी परिसंपत्ति फिर से गैर-सिक्योरिटी श्रेणी में आ सकती है।

कुछ गतिविधियों पर भी मिली स्पष्टता

इस व्याख्या में क्रिप्टो से जुड़ी कुछ गतिविधियों पर भी स्पष्टता दी गई है। उदाहरण के लिए प्रोटोकॉल माइनिंग, स्टेकिंग और एयरड्रॉप जैसी गतिविधियों को सामान्य परिस्थितियों में सिक्योरिटी ऑफरिंग नहीं माना गया है। एजेंसियों का कहना है कि ये गतिविधियां अक्सर नेटवर्क को सुरक्षित रखने या तकनीकी प्रक्रियाओं से जुड़ी होती हैं।

हालांकि यह भी कहा गया है कि यदि किसी परियोजना में ऐसे वादे किए जाएं जिनसे निवेशकों को निश्चित लाभ का भरोसा दिलाया जाए, तो नियामक स्थिति बदल सकती है। इसलिए परियोजनाओं को अपने निवेशकों से किए गए वादों और संचार को सावधानी से संभालने की सलाह दी गई है।

उद्योग और निवेशकों के लिए क्या मायने

क्रिप्टो उद्योग लंबे समय से स्पष्ट नियमों की मांग कर रहा था। कई कंपनियों और निवेशकों का मानना था कि अस्पष्ट नियमों के कारण नवाचार और निवेश दोनों प्रभावित हो रहे थे। नई व्याख्या को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कंपनियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके टोकन किस श्रेणी में आते हैं और उन पर कौन से नियम लागू होंगे।

हालांकि यह मार्गदर्शन अभी औपचारिक कानून नहीं है, लेकिन इसे भविष्य के नियमों की दिशा का संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में अमेरिकी संसद और नियामक एजेंसियां इस ढांचे के आधार पर और व्यापक नियम बना सकती हैं।

फिलहाल इस पहल ने क्रिप्टो उद्योग में एक नई चर्चा शुरू कर दी है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट नियमों से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और डिजिटल एसेट बाजार में दीर्घकालिक स्थिरता आ सकती है।

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