
$62,000 के स्तर पर पहुंचा बिटकॉइन, क्या अभी और गिर सकता है क्रिप्टो बाजार?
बिटकॉइन $62,000 के महत्वपूर्ण स्तर के करीब पहुंच गया है। तेज बिकवाली, ईटीएफ से निकासी और अरबों डॉलर की लिक्विडेशन के बीच निवेशक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि बाजार की गिरावट कहां जाकर थमेगी।

क्रिप्टो बाजार में एक बार फिर तेज उथल-पुथल देखने को मिल रही है। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन हाल के दिनों में भारी दबाव में रही है और इसकी कीमत $62,000 के महत्वपूर्ण स्तर के करीब पहुंच गई है। केवल चार दिनों के भीतर बिटकॉइन में करीब 17% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे पूरे डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में चिंता का माहौल बन गया है। इस दौरान अरबों डॉलर की लिक्विडेशन हुई और हजारों निवेशकों की ट्रेडिंग पोजिशन बंद हो गईं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट केवल कीमतों में सामान्य सुधार नहीं है। इसके पीछे कई ऐसे कारक हैं जो निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं। इनमें संस्थागत निवेश में कमी, ईटीएफ से लगातार निकासी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता प्रमुख हैं।
चार दिनों में तेज गिरावट से बढ़ी चिंता
बिटकॉइन ने हाल ही में $62,000 के आसपास का स्तर छुआ, जो पिछले कई महीनों के सबसे कमजोर स्तरों में से एक माना जा रहा है। कुछ समय के लिए कीमत $61,500 तक भी फिसल गई थी। इस गिरावट के साथ ही पूरे क्रिप्टो बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली।
आंकड़ों के अनुसार, केवल 24 घंटे के भीतर $1.5 अरब से अधिक की लीवरेज्ड पोजिशन समाप्त हो गईं। कई ट्रेडर्स ने तेजी की उम्मीद में बड़े दांव लगाए थे, लेकिन कीमतों में अचानक आई गिरावट ने उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया। कुछ रिपोर्टों में कुल लिक्विडेशन का आंकड़ा $4.5 अरब तक बताया गया है, जो हाल के समय की सबसे बड़ी बिकवाली घटनाओं में से एक है।
विश्लेषकों का मानना है कि जब बड़ी संख्या में लीवरेज्ड पोजिशन खत्म होती हैं, तो बाजार में अतिरिक्त बिकवाली का दबाव पैदा होता है, जिससे गिरावट और तेज हो सकती है।
ईटीएफ निकासी और संस्थागत मांग में कमजोरी
मौजूदा गिरावट का एक बड़ा कारण स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ से लगातार धन निकासी को माना जा रहा है। हाल के दिनों में इन निवेश साधनों से लगभग $1 अरब की निकासी दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि कुछ बड़े निवेशक फिलहाल जोखिम कम करने की रणनीति अपना रहे हैं।
इसके अलावा, बाजार में यह भी चर्चा है कि निवेशकों का एक हिस्सा अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों और सोने जैसी पारंपरिक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहा है। इससे क्रिप्टो बाजार में नए धन का प्रवाह कमजोर पड़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संस्थागत मांग जल्द मजबूत नहीं होती, तो बिटकॉइन को निकट अवधि में और दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
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क्या $60,000 के नीचे जा सकता है बिटकॉइन?
बाजार विश्लेषकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बिटकॉइन $60,000 के स्तर को बचा पाएगा। कई तकनीकी विशेषज्ञ इसे महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र मान रहे हैं। यदि यह स्तर टूटता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है।
हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा गिरावट के बाद बाजार में स्थिरता लौट सकती है। उनका तर्क है कि तेज बिकवाली के बाद अक्सर खरीदारी की नई मांग उभरती है, जिससे कीमतों को सहारा मिल सकता है। हाल ही में $61,500 तक गिरने के बाद बिटकॉइन ने कुछ सुधार भी दिखाया और दोबारा $64,000 के करीब पहुंचा।
निवेशकों की नजर अगले संकेतों पर
फिलहाल बाजार की दिशा कई बाहरी कारकों पर निर्भर करती दिखाई दे रही है। वैश्विक आर्थिक हालात, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, ईटीएफ में निवेश प्रवाह और संस्थागत गतिविधियां आने वाले दिनों में बिटकॉइन की चाल तय कर सकती हैं।
क्रिप्टो बाजार ने पहले भी कई बार बड़ी गिरावटों का सामना किया है और बाद में मजबूत वापसी की है। लेकिन इस बार निवेशक विशेष रूप से सतर्क हैं क्योंकि बाजार एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां $60,000 का स्तर मनोवैज्ञानिक और तकनीकी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यह स्तर कायम रहता है तो भरोसा लौट सकता है, लेकिन इसके नीचे फिसलने पर बाजार में डर और बढ़ सकता है।
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