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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

रूस में Crypto P2P ट्रेडिंग पर लगेगी रोक, जुलाई 2027 से जरूरी होगा अधिकृत मध्यस्थ

ताजा खबरेंप्रकाशित16 अक्टू॰ 2026

रूस 1 जुलाई 2027 से सीधे P2P क्रिप्टो लेनदेन पर रोक लगाने की तैयारी कर रहा है। नए नियमों के तहत निवेशकों को अधिकृत मध्यस्थों के जरिए कारोबार करना होगा और निजी वॉलेट पर भी प्रतिबंध लागू हैं।

रूस में क्रिप्टोकरेंसी बाजार को नियंत्रित करने के लिए सरकार और केंद्रीय बैंक ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। रूस का केंद्रीय बैंक 1 जुलाई 2027 से लोगों के बीच सीधे होने वाले क्रिप्टो लेनदेन यानी पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रेडिंग पर रोक लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके बाद आम निवेशकों को क्रिप्टो खरीदने और बेचने के लिए अधिकृत कंपनियों या वित्तीय मध्यस्थों का इस्तेमाल करना होगा।

Cointelegraph की 15 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, Bank of Russia ने अपने नए दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया है कि सीधे व्यक्तियों के बीच क्रिप्टो लेनदेन की अनुमति संक्रमण अवधि समाप्त होने के बाद नहीं रहेगी। यह कदम रूस में क्रिप्टो कारोबार को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था के भीतर लाने की व्यापक योजना का हिस्सा है।

जुलाई 2027 से बदल जाएंगे क्रिप्टो कारोबार के नियम

रूस में क्रिप्टो बाजार से जुड़े नए कानून के प्रमुख प्रावधान 1 सितंबर 2026 से लागू हो चुके हैं। इसके तहत क्रिप्टो एक्सचेंज, ब्रोकर और डिजिटल संपत्तियों को सुरक्षित रखने वाली कंपनियों को केंद्रीय बैंक की निगरानी में काम करना होगा।

हालांकि, कारोबारियों और निवेशकों को नई व्यवस्था अपनाने के लिए कुछ समय दिया गया है। इस संक्रमण अवधि के दौरान व्यक्ति से व्यक्ति के बीच सीधे क्रिप्टो लेनदेन की अनुमति बनी रहेगी, लेकिन 1 जुलाई 2027 से अधिकांश घरेलू लेनदेन के लिए अधिकृत मध्यस्थों का इस्तेमाल जरूरी होगा।

नए नियमों के तहत अधिकृत संस्थाओं को ग्राहकों की गतिविधियों का रिकॉर्ड रखना और नियामकीय शर्तों का पालन करना होगा। सरकार का उद्देश्य क्रिप्टो कारोबार पर निगरानी बढ़ाना और वित्तीय लेनदेन को अधिक पारदर्शी बनाना है।

अपने निजी वॉलेट में क्रिप्टो भेजने पर भी पाबंदी

रिपोर्ट का एक अहम पहलू यह है कि रूस के केंद्रीय बैंक ने डिजिटल खातों से ऐसे निजी वॉलेट में क्रिप्टो भेजने पर भी रोक का उल्लेख किया है, जिनकी निजी कुंजियां खुद उपयोगकर्ता के नियंत्रण में होती हैं। इन्हें स्व-नियंत्रित वॉलेट कहा जाता है।

ऐसे वॉलेट में उपयोगकर्ता अपनी डिजिटल संपत्ति पर सीधे नियंत्रण रखता है और किसी एक्सचेंज या दूसरी कंपनी पर निर्भर नहीं रहता। इसके विपरीत, किसी केंद्रीकृत एक्सचेंज पर रखी संपत्ति को संबंधित मंच संभालता है।

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निजी वॉलेट से जुड़े प्रतिबंध का उद्देश्य डिजिटल संपत्तियों के लेनदेन को अधिकृत व्यवस्था के भीतर रखना हो सकता है। लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं होगा। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि सीधे लेनदेन और निजी वॉलेट पर रोक लगाने के बावजूद लोग वैकल्पिक तरीकों से क्रिप्टो का इस्तेमाल जारी रखने की कोशिश कर सकते हैं।

छोटे निवेशकों के लिए तय होगी खरीद की सीमा

रूस के नए नियामकीय ढांचे में छोटे और बड़े निवेशकों के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। गैर-पेशेवर निवेशक जरूरी परीक्षा पास करने के बाद एक अधिकृत मध्यस्थ के जरिए सालाना अधिकतम 3 लाख रूबल की क्रिप्टो खरीद सकेंगे। वहीं, योग्य निवेशकों को भी परीक्षा पास करनी होगी, लेकिन उनके लिए खरीद की रकम पर यही सीमा लागू नहीं होगी।

केंद्रीय बैंक यह भी तय करेगा कि अधिकृत मंचों पर किन क्रिप्टोकरेंसी में कारोबार किया जा सकता है। इससे निवेशकों को उपलब्ध विकल्पों और कारोबार करने वाली कंपनियों पर नियामकीय नियंत्रण बढ़ेगा।

रूस के सबसे बड़े बैंक Sberbank को हाल ही में क्रिप्टो एक्सचेंज सेवाएं देने की अनुमति मिली है। बैंक ने 1 दिसंबर 2026 से अपने ग्राहकों के लिए क्रिप्टो उत्पाद शुरू करने की योजना बनाई है। यह दिखाता है कि रूस एक ओर क्रिप्टो कारोबार को नियंत्रित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे पारंपरिक वित्तीय संस्थानों के माध्यम से उपलब्ध कराने की तैयारी भी कर रहा है।

रूस में क्रिप्टो भुगतान अब भी प्रतिबंधित

नए नियमों के बावजूद रूस में घरेलू स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं के भुगतान के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा। हालांकि, आयात और निर्यात से जुड़े सीमा पार भुगतानों में क्रिप्टो का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के तहत किया जा सकता है।

इससे साफ है कि रूस का उद्देश्य क्रिप्टोकरेंसी को सामान्य मुद्रा के विकल्प के रूप में स्वीकार करना नहीं, बल्कि उसके कारोबार और निवेश को नियंत्रित व्यवस्था में लाना है।

आने वाले महीनों में सबसे बड़ी चुनौती नए नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करना होगी। यदि निवेशक अधिकृत मंचों पर कारोबार करने लगते हैं, तो नियामकों के लिए लेनदेन की निगरानी आसान हो सकती है। लेकिन निजी वॉलेट और सीधे लेनदेन पर नियंत्रण कितना प्रभावी रहेगा, यह देखना बाकी है।

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