
Crypto से SIP तक, युवाओं की बदली निवेश आदत, कम उम्र में शुरू कर रहे निवेश
भारत के युवाओं में SIP निवेश तेजी से बढ़ रहा है। CAMS के आंकड़ों के मुताबिक 30 साल से कम उम्र के निवेशकों के बीच SIP की संख्या में मजबूत बढ़ोतरी हुई है।

भारत के युवाओं की निवेश आदतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कुछ साल पहले तक जहां शेयर बाजार, क्रिप्टोकरेंसी और रोजाना ट्रेडिंग जैसे विकल्प युवाओं को ज्यादा आकर्षित कर रहे थे, वहीं अब Systematic Investment Plan यानी SIP उनके बीच निवेश का एक प्रमुख तरीका बनता जा रहा है। युवा निवेशक अब नियमित और लंबे समय के निवेश को प्राथमिकता देने लगे हैं। इसके साथ ही सोना, चांदी और म्यूचुअल फंड जैसे विकल्पों में भी उनकी दिलचस्पी बढ़ रही है।
Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, म्यूचुअल फंड रजिस्ट्रार CAMS के आंकड़ों में 30 साल से कम उम्र के निवेशकों के बीच SIP की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2026 में 20 साल से कम उम्र के निवेशकों के बीच चालू SIP की संख्या सालाना आधार पर 92% बढ़कर 2.9 लाख हो गई। वहीं 20 से 30 साल की उम्र वाले निवेशकों के बीच यह संख्या 15% बढ़कर 85.5 लाख पहुंच गई।
कम उम्र में शुरू हो रहा निवेश का सफर
युवाओं के बीच निवेश की शुरुआत अब नौकरी शुरू होने के बाद ही नहीं हो रही है। कई युवा कॉलेज के दौरान ही बचत और निवेश के बारे में जानकारी लेने लगे हैं। डिजिटल मंचों, सोशल मीडिया और परिवार की सलाह ने इस बदलाव को तेज किया है।
रिपोर्ट में बेंगलुरु की 21 वर्षीय Srushti I का उदाहरण दिया गया है, जिन्होंने 15 साल की उम्र में क्रिप्टो से निवेश की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने SIP को अपने निवेश का हिस्सा बनाया। आज वह अपनी आय का करीब 10% निवेश करती हैं और बाजार में रोजाना होने वाले उतार-चढ़ाव पर नजर रखने के बजाय लंबे समय तक निवेश बनाए रखने को प्राथमिकता देती हैं।
यह बदलाव बताता है कि युवाओं का निवेश व्यवहार केवल ज्यादा जोखिम वाले विकल्पों तक सीमित नहीं है। क्रिप्टो और ट्रेडिंग से शुरुआत करने वाले कई निवेशक अब नियमित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं।
SIP की ओर क्यों बढ़ रहा युवाओं का रुझान?
विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका एक कारण पिछले कुछ वर्षों में वायदा कारोबार और रोजाना ट्रेडिंग में युवाओं की बढ़ती दिलचस्पी भी है। ऐसे निवेश में बड़े जोखिम के अनुभव के बाद कुछ निवेशक अब अपेक्षाकृत अनुशासित और लंबे समय वाले विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
Finsafe India की CEO Mrin Agarwal के अनुसार, युवाओं में पहले वायदा कारोबार और रोजाना ट्रेडिंग को लेकर काफी उत्साह था। लेकिन जब उन्हें ऐसे निवेश में जोखिम और नुकसान का अनुभव हुआ, तो SIP जैसे विकल्पों की ओर रुचि बढ़ी।
फिनटेक मंचों पर भी यह बदलाव दिखाई दे रहा है। Groww के आंकड़ों के मुताबिक, 25 साल से कम उम्र के निवेशकों के पास औसतन करीब दो SIP हैं। इस उम्र वर्ग में फ्लेक्सी-कैप फंड लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हैं। सोने और चांदी में नियमित निवेश की लोकप्रियता भी वित्त वर्ष 2026 में बढ़ी है, जिसमें 25 साल से कम उम्र के निवेशकों की भूमिका अहम रही।
क्या आप जानते हैं: AI एजेंट के गलत कदम पर जिम्मेदारी किसकी? कानून के सामने खड़ा हो रहा नया सवाल
जनवरी से जून तक भी जारी रही बढ़ोतरी
युवाओं के बीच SIP का बढ़ता चलन सिर्फ वित्त वर्ष 2026 तक सीमित नहीं रहा। जनवरी से जून 2026 के बीच 20 साल से कम उम्र के निवेशकों की चालू SIP संख्या 20.9% बढ़कर 3.15 लाख हो गई। इसी अवधि में 20 से 30 साल के निवेशकों की SIP संख्या जनवरी के मुकाबले 2.6% बढ़कर जून में 84.8 लाख रही।
मासिक SIP बिक्री में भी बढ़ोतरी देखी गई। 20 साल से कम उम्र के निवेशकों के लिए यह जनवरी के ₹306 करोड़ से बढ़कर जून में ₹334 करोड़ हो गई। 20 से 30 साल के वर्ग में मासिक SIP बिक्री ₹1,811 करोड़ से बढ़कर ₹1,885 करोड़ पहुंच गई।
इस बदलाव के पीछे सिर्फ युवा निवेशक ही नहीं, बल्कि माता-पिता भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। बच्चों की उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत को देखते हुए कई माता-पिता कम उम्र में ही उनके नाम पर SIP शुरू कर रहे हैं। इससे निवेश की आदत भी जल्दी बन रही है और लंबे समय में रकम बढ़ाने का मौका मिल रहा है।
सबसे बड़ी चुनौती, निवेश जारी रखना
युवाओं के बीच SIP की संख्या बढ़ना सकारात्मक संकेत है, लेकिन चुनौती यह है कि वे इसे लंबे समय तक जारी रखें। बाजार में उतार-चढ़ाव या अपेक्षित रिटर्न नहीं मिलने पर कई निवेशक अपनी SIP बंद कर देते हैं।
उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 में SIP बंद होने या अपनी अवधि पूरी करने का अनुपात 91.23% तक पहुंच गया था, हालांकि जुलाई में यह घटकर 81.87% रहा। Zerodha के अनुसार, रद्द होने वाली कई SIP का औसत जीवन सिर्फ दो से तीन साल रहता है, जबकि इक्विटी निवेश के लिए आमतौर पर इससे कहीं लंबी अवधि की जरूरत होती है।
यही वजह है कि विशेषज्ञ युवाओं के बीच वित्तीय शिक्षा को और मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। सोशल मीडिया ने निवेश की जानकारी को आसान बनाया है, लेकिन छोटी अवधि के रिटर्न के बजाय लक्ष्य आधारित और लंबे समय के निवेश को समझना जरूरी है।
कुल मिलाकर, भारत के युवा निवेशक जोखिम वाले विकल्पों से पूरी तरह दूर नहीं हुए हैं, लेकिन उनके निवेश व्यवहार में संतुलन बढ़ रहा है। क्रिप्टो और ट्रेडिंग से लेकर SIP, सोना और चांदी तक, युवा अब अपने पैसे को अलग-अलग साधनों में लगाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह बदलाव भारत की घरेलू बचत और निवेश व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है।
ऐसी ही और ख़बरों और क्रिप्टो विश्लेषण के लिए हमें X और LinkedIn पर फ़ॉलो करें, ताकि कोई भी अपडेट आपसे न छूटे!

