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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

Coinbase का भारत पर बड़ा दांव, 18-24 महीने में बनेगा सबसे अहम विदेशी बाजार

ताजा खबरेंप्रकाशित27 अग॰ 2026

Coinbase ने अगले 18-24 महीनों के लिए भारत को अपना सबसे अहम विदेशी बाजार बनाया है।

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अमेरिकी क्रिप्टो एक्सचेंज Coinbase ने भारत को अगले 18 से 24 महीनों के लिए अपना सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बाजार बनाने का फैसला किया है। कंपनी के एशिया प्रशांत क्षेत्र के प्रबंध निदेशक John O’Loghlen के मुताबिक, भारत में क्रिप्टो पर ऊंचे कर और नियमों को लेकर अनिश्चितता के बावजूद कंपनी यहां लंबे समय की संभावनाएं देख रही है। यह जानकारी Fortune India की एक विशेष बातचीत में सामने आई है।

Coinbase ने भारत में दोबारा अपनी सेवाएं शुरू करने के बाद अब सिर्फ क्रिप्टो कारोबार तक सीमित रहने के बजाय कई तरह की वित्तीय सेवाएं एक ही मंच पर देने की योजना बनाई है। कंपनी का मानना है कि भारत में बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल इस्तेमाल और क्रिप्टो में रुचि रखने वाला बड़ा उपयोगकर्ता आधार उसे लंबे समय में मजबूत अवसर दे सकता है।

भारत बना Coinbase का सबसे बड़ा विदेशी दांव

Coinbase के लिए भारत पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला सामान्य विस्तार रणनीति से कहीं बड़ा है। John O’Loghlen ने Fortune India को बताया कि कंपनी के नेतृत्व और निदेशक मंडल ने भारत को अगले 18 से 24 महीनों के लिए अपना नंबर एक अंतरराष्ट्रीय बाजार बनाने का फैसला किया है। कंपनी का कहना है कि इस अवधि में उसका ध्यान भारत पर ही सबसे ज्यादा रहेगा।

भारत में Coinbase की वापसी कई साल की कोशिश के बाद हुई है। कंपनी ने 2023 में अपनी सेवाएं रोक दी थीं। इसके बाद उसने वित्तीय खुफिया इकाई के साथ पंजीकरण कराया और भारत के धनशोधन रोधी नियमों के तहत स्थानीय स्तर पर अपना संचालन शुरू किया। Coinbase ने भारत के लिए नया मंच तैयार किया है, जिसे स्थानीय कर और नियामकीय जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

Coinbase ने मई 2026 के अंत में भारत में सीधे रुपये जमा और निकालने की सुविधा भी शुरू की थी। कंपनी के मुताबिक, उपयोगकर्ता बैंक खाते के जरिए सीधे रुपये का इस्तेमाल कर सकते हैं और प्रमुख क्रिप्टो परिसंपत्तियों की खरीद-बिक्री कर सकते हैं।

ऊंचे कर के बावजूद बाजार में बड़ी संभावना

भारत में क्रिप्टो क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में कर व्यवस्था और स्पष्ट नियमों की कमी शामिल है। डिजिटल परिसंपत्तियों से होने वाले लाभ पर 30% कर और लेनदेन पर 1% टीडीएस जैसी व्यवस्था ने कारोबार पर असर डाला है। इसके बावजूद Coinbase को भारत की विशाल आबादी और बड़े क्रिप्टो उपयोगकर्ता आधार में मजबूत अवसर दिखाई देता है। Fortune India के मुताबिक, देश में 100 मिलियन से अधिक क्रिप्टो मालिक होने का अनुमान है।

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कंपनी ने भारत में निवेश भी बढ़ाया है। Coinbase Ventures ने भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंज CoinDCX में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, जिसमें हालिया निवेश के दौरान कंपनी का मूल्यांकन $2.45 बिलियन आंका गया। साथ ही Coinbase की भारत से जुड़ी टीम में 500 से अधिक कर्मचारी हो चुके हैं।

सिर्फ क्रिप्टो नहीं, 'एवरीथिंग एक्सचेंज' की तैयारी

Coinbase की भारत रणनीति का अगला बड़ा हिस्सा उसके व्यापक वित्तीय मंच से जुड़ा है। कंपनी क्रिप्टो के साथ डेरिवेटिव, विकल्प, पारंपरिक शेयर और टोकन आधारित शेयर जैसी सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। हालांकि इन सेवाओं की शुरुआत भारत के स्थानीय नियमों की मंजूरी पर निर्भर करेगी।

कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि भारत में यूपीआई को अपनी भविष्य की सेवाओं से जोड़ना उसकी योजना में शामिल है। Coinbase का कहना है कि स्थिर डिजिटल मुद्राएं भारत की तत्काल भुगतान व्यवस्था का मुकाबला करने के बजाय उसे दूसरे क्षेत्रों में उपयोगी बना सकती हैं, खासकर सीमा पार भुगतान में।

स्थिर डिजिटल मुद्रा और एआई कारोबार पर अगली नजर

Coinbase भारत में भविष्य की वृद्धि के लिए दो क्षेत्रों को खास महत्व दे रहा है, स्थिर डिजिटल मुद्राएं और एआई आधारित कारोबार। O’Loghlen के मुताबिक, अगले 12 से 18 महीनों में एआई आधारित सॉफ्टवेयर और सहायक खरीदारी और वित्तीय गतिविधियों में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

स्थिर डिजिटल मुद्राओं को कंपनी सीमा पार भुगतान और विदेश से भारत भेजे जाने वाले धन के लिए महत्वपूर्ण मानती है। इनका इस्तेमाल तेज और प्रोग्राम किए जा सकने वाले भुगतान के लिए किया जा सकता है। Coinbase पहले से एआई एजेंट के जरिए भुगतान और वित्तीय कामकाज की दिशा में अपने उत्पाद विकसित कर रही है, जिससे यह रणनीति केवल भारत तक सीमित नहीं है।

भारत में क्रिप्टो नियम अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन Coinbase का मानना है कि क्षेत्र को पूरी तरह बंद करने के बजाय आने वाले समय में एक नियामकीय ढांचा विकसित हो सकता है। कंपनी इस प्रक्रिया में भारतीय नियामकों के साथ बातचीत जारी रखने की बात कह रही है।

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