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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

1995 के म्यूचुअल फंड जैसा है आज का क्रिप्टो बाजार, BitDelta India CEO ने बताया भविष्य

ताजा खबरेंप्रकाशित25 अग॰ 2026

BitDelta India के CEO Vikaas M. Sachdeva ने क्रिप्टो को 1995 के म्यूचुअल फंड जैसा शुरुआती दौर बताया। जानिए पोर्टफोलियो में डिजिटल परिसंपत्तियों की भूमिका और नियमन पर उनकी राय।

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भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है, लेकिन डिजिटल परिसंपत्तियां अभी भी देश के पारंपरिक निवेश ढांचे में पूरी तरह अपनी जगह नहीं बना पाई हैं। इसी स्थिति की तुलना BitDelta India के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Vikaas M. Sachdeva ने 1995 के भारतीय म्यूचुअल फंड बाजार से की है।

The Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, Sachdeva का मानना है कि जिस तरह 1990 के दशक में म्यूचुअल फंड भारतीय निवेशकों के लिए नया और कम समझा जाने वाला विकल्प था, उसी तरह आज क्रिप्टो भी शुरुआती स्वीकार्यता के दौर में है। उनके अनुसार, सही जानकारी, जागरूकता और स्पष्ट नीतियां मिलने पर डिजिटल परिसंपत्तियां आने वाले वर्षों में ज्यादा बड़े निवेशक वर्ग तक पहुंच सकती हैं।

Sachdeva का यह नजरिया खास इसलिए है क्योंकि उन्होंने अपने करियर में मर्चेंट बैंकिंग, म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो प्रबंधन और वैकल्पिक निवेश जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है। अब उनका ध्यान क्रिप्टो बाजार पर है।

म्यूचुअल फंड से क्रिप्टो तक का सफर

Sachdeva ने अपने करियर की शुरुआत 1990 के दशक में मर्चेंट बैंकिंग से की थी, जब भारत में सार्वजनिक निर्गम यानी IPO का बाजार तेजी से विकसित हो रहा था। इसके बाद उन्होंने परिसंपत्ति प्रबंधन और म्यूचुअल फंड क्षेत्र में वरिष्ठ जिम्मेदारियां संभालीं। आगे चलकर वह पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा और वैकल्पिक निवेश कोष से भी जुड़े।

उनके अनुसार, हर नए निवेश उत्पाद के सामने शुरुआत में भरोसे और जानकारी की चुनौती होती है। म्यूचुअल फंड के शुरुआती दौर में भी निवेशकों को समझाना पड़ता था कि यह उत्पाद कैसे काम करता है और इसमें जोखिम क्या हैं।

उनका मानना है कि क्रिप्टो बाजार भी इसी तरह के चरण से गुजर रहा है। हालांकि क्रिप्टो को लेकर जोखिम और नियामकीय सवाल अधिक जटिल हैं, लेकिन सही शिक्षा के जरिए निवेशकों की समझ बेहतर की जा सकती है।

परिवार कार्यालय और बड़े निवेशकों की बढ़ रही रुचि

The Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के परिवार कार्यालय और बड़े संपन्न निवेशक अब डिजिटल परिसंपत्तियों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं। हालांकि बड़ी संख्या में ऐसे निवेशक अभी सीधे पैसा लगाने के बजाय इस परिसंपत्ति वर्ग को समझने और उसके जोखिम का आकलन करने के चरण में हैं।

Sachdeva का कहना है कि पारंपरिक निवेशक और म्यूचुअल फंड प्रबंधक अभी भी क्रिप्टो को लेकर काफी सावधान हैं। इसका एक कारण इसकी कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव है, जबकि दूसरा कारण नियामकीय स्थिति को लेकर बनी अनिश्चितता है।

फिर भी उनका मानना है कि जैसे-जैसे संस्थागत स्तर पर जानकारी बढ़ेगी और नियम स्पष्ट होंगे, डिजिटल परिसंपत्तियों को लेकर सोच भी बदल सकती है।

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पोर्टफोलियो में क्रिप्टो की कितनी जगह?

Sachdeva के अनुसार, क्रिप्टो को निवेश पोर्टफोलियो का पूरा आधार बनाने के बजाय विविध निवेश रणनीति के एक हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। शेयर, कर्ज आधारित निवेश, सोना और रियल एस्टेट जैसे पारंपरिक विकल्पों के साथ डिजिटल परिसंपत्तियों की भूमिका पर विचार किया जा सकता है।

हालांकि किसी निवेशक के लिए क्रिप्टो का सही हिस्सा उसकी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय स्थिति पर निर्भर करेगा। कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव के कारण इसे पारंपरिक सुरक्षित निवेश की श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा।

यही वजह है कि क्रिप्टो में निवेश से पहले उसके जोखिम और अपनी वित्तीय क्षमता को समझना जरूरी है। केवल तेजी से बढ़ती कीमत देखकर निवेश करना जोखिम बढ़ा सकता है।

नियमन और जागरूकता होंगे सबसे अहम

Sachdeva के मुताबिक, भारत में क्रिप्टो के अगले बड़े विस्तार के लिए शिक्षा और नियामकीय स्पष्टता दोनों जरूरी हैं। उनका मानना है कि RBI, SEBI और वित्त मंत्रालय जैसे संस्थानों की भूमिका और जिम्मेदारियां स्पष्ट होने से निवेशकों और कंपनियों दोनों को बेहतर दिशा मिल सकती है।

भारत में क्रिप्टो से होने वाली आय पर कर व्यवस्था लागू है और कुछ डिजिटल परिसंपत्ति सेवा प्रदाता धन शोधन रोकथाम से जुड़े नियमों के दायरे में हैं। लेकिन व्यापक नियामकीय ढांचे को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं।

फिलहाल Sachdeva की तुलना यह संकेत देती है कि क्रिप्टो बाजार भारत में अभी विकास के शुरुआती चरण में है। जैसे म्यूचुअल फंड को लंबे समय में जागरूकता और संस्थागत ढांचे ने मुख्यधारा में पहुंचाया, वैसे ही डिजिटल परिसंपत्तियों का भविष्य भी शिक्षा, भरोसे और स्पष्ट नियमों पर काफी हद तक निर्भर करेगा।

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