Cointelegraph
DOGE$0.07272 0.35%
TRX$0.3321 0.85%
LINK$7.70 1.17%
ZEC$468.88 1.51%
ADA$0.1654 0.78%
XRP$1.08 0.40%
ETH$1,740.64 0.38%
BTC$62,746.14 1.13%
XMR$315.22 1.08%
BNB$570.17 0.69%
XLM$0.1811 1.04%
SOL$77.75 0.73%
HYPE$67.30 0.34%
Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

भारत के ₹2,500 करोड़ की चुनौती: क्रिप्टो कानून की कमी के बीच जांच से हड़कंप

ताजा खबरेंप्रकाशित8 जुल॰ 2026

भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर स्पष्ट कानून की कमी के बीच जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। जानिए नियामकीय शून्य का निवेशकों, उद्योग और प्रवर्तन पर क्या असर पड़ रहा है।

why-cryptocurrency-is-booming-in-india-despite-national-ban-fears

भारत में क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके लिए अब भी कोई व्यापक और स्पष्ट नियामकीय ढांचा मौजूद नहीं है। ऐसे में प्रवर्तन एजेंसियां विभिन्न मौजूदा कानूनों के तहत कार्रवाई कर रही हैं, जबकि उद्योग लंबे समय से एक स्पष्ट कानूनी व्यवस्था की मांग कर रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यही नियामकीय शून्य देश में डिजिटल परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों को और जटिल बना रहा है।

हाल के दिनों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बेंगलुरु में कई क्रिप्टो भुगतान कंपनियों से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन कंपनियों के माध्यम से स्टेबलकॉइन का इस्तेमाल कर 2,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि विदेश भेजी गई। दिलचस्प बात यह है कि यह कार्रवाई धन शोधन कानून के बजाय विदेशी मुद्रा प्रबंधन और अन्य लागू प्रावधानों के तहत की गई, जिसने भारत में क्रिप्टो नियमन को लेकर नई बहस छेड़ दी।

स्पष्ट कानून नहीं, इसलिए अलग अलग कानूनों का सहारा

भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित करने वाला कोई समग्र कानून भी लागू नहीं है। यही कारण है कि जांच एजेंसियां मामले की प्रकृति के अनुसार विदेशी मुद्रा प्रबंधन, आयकर, कंपनी कानून, सूचना प्रौद्योगिकी कानून या धन शोधन निवारण कानून जैसे अलग अलग कानूनी प्रावधानों का उपयोग करती हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति से उद्योग और निवेशकों दोनों के सामने अनिश्चितता बनी रहती है। कई बार कंपनियों को यह स्पष्ट नहीं होता कि किस प्रकार के लेनदेन पर कौन से नियम लागू होंगे। इससे अनुपालन की लागत भी बढ़ती है और निवेश का माहौल प्रभावित हो सकता है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि स्पष्ट नियम होने से वैध कारोबार करने वाली कंपनियों और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल संस्थाओं के बीच अंतर करना आसान हो जाएगा।

प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई क्यों बढ़ रही है?

पिछले कुछ वर्षों में भारत में क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग निवेश के अलावा सीमा पार भुगतान, डिजिटल संपत्ति हस्तांतरण और अन्य वित्तीय सेवाओं में भी बढ़ा है। इसके साथ ही जांच एजेंसियों ने मनी लॉन्ड्रिंग, कर चोरी, साइबर अपराध और विदेशी मुद्रा नियमों के संभावित उल्लंघन से जुड़े मामलों की निगरानी भी तेज कर दी है।

हालिया मामले में ED का आरोप है कि कुछ कंपनियों ने स्टेबलकॉइन के माध्यम से बड़ी रकम विदेश भेजी। जांच के दौरान बैंक खातों में रखी लगभग 6 करोड़ रुपये की राशि भी फ्रीज की गई। हालांकि मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और जांच जारी है।

क्या आप जानते हैं - क्रिप्टो हैक से नुकसान में 47% की गिरावट, फिर भी सुरक्षा पर खतरा बरकरार: CertiK रिपोर्ट

विश्लेषकों का कहना है कि ब्लॉकचेन तकनीक लेनदेन का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराती है, लेकिन यदि कई वॉलेट, विदेशी मंच और अलग अलग नेटवर्क का उपयोग किया जाए तो जांच काफी जटिल हो सकती है।

उद्योग चाहता है स्पष्ट नियामकीय ढांचा

क्रिप्टो उद्योग का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल परिसंपत्ति बाजारों में शामिल हो सकता है, लेकिन इसके लिए स्पष्ट और स्थिर नियम जरूरी हैं। उद्योग से जुड़े संगठनों का मानना है कि लाइसेंस व्यवस्था, उपभोक्ता सुरक्षा, कर नियम और अनुपालन से जुड़े दिशानिर्देश स्पष्ट होने से वैध कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।

कई विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को जोखिम आधारित नियमन अपनाना चाहिए, जिसमें निवेशकों की सुरक्षा, वित्तीय स्थिरता और नवाचार के बीच संतुलन बनाया जाए। उनका कहना है कि पूरी तरह प्रतिबंध लगाने या पूरी तरह खुली व्यवस्था अपनाने के बजाय संतुलित नियामकीय मॉडल अधिक प्रभावी हो सकता है।

आगे क्या हो सकता है?

भारत सरकार पहले भी संकेत दे चुकी है कि क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े नियमों पर वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों का अध्ययन किया जा रहा है। इसी वजह से अंतिम नीति बनाने से पहले अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को भी ध्यान में रखा जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक व्यापक कानून लागू नहीं होता, तब तक प्रवर्तन एजेंसियां मौजूदा कानूनी प्रावधानों के आधार पर कार्रवाई जारी रखेंगी। इससे क्रिप्टो उद्योग में नियामकीय अनिश्चितता बनी रह सकती है।

फिलहाल भारत में क्रिप्टो बाजार तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन स्पष्ट नियमों की अनुपस्थिति निवेशकों, कंपनियों और नियामकों सभी के लिए चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में यदि व्यापक नियामकीय ढांचा तैयार होता है, तो इससे उद्योग को अधिक पारदर्शिता, निवेशकों को बेहतर सुरक्षा और प्रवर्तन एजेंसियों को स्पष्ट कानूनी आधार मिलने की उम्मीद की जा रही है।

ऐसी ही और ख़बरों और क्रिप्टो विश्लेषण के लिए हमें X और LinkedIn पर फ़ॉलो करें, ताकि कोई भी अपडेट आपसे न छूटे!

Cointelegraph स्वतंत्र और पारदर्शी पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्ध है। यह समाचार लेख Cointelegraph की संपादकीय नीति के अनुरूप तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य सटीक तथा समय पर जानकारी प्रदान करना है। पाठकों को जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हमारी संपादकीय नीति पढ़ें https://cointelegraph.in/editorial-policy

इस विषय पर अधिक