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Jai Singla द्वारा लिखितstaff editorPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितstaff editor

जैश स्लीपर सेल केस में क्रिप्टो फंडिंग और हनी ट्रैप की जांच तेज

ताजा खबरेंप्रकाशित24 जून 2026

भारत की जांच एजेंसियां जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक कथित स्लीपर सेल मामले में क्रिप्टो फंडिंग और हनी ट्रैप कनेक्शन की जांच कर रही हैं। जांच में डिजिटल भुगतान और विदेशी नेटवर्क की भूमिका पर भी फोकस है।

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भारत की सुरक्षा और जांच एजेंसियां एक ऐसे मामले की जांच में जुटी हैं, जिसमें कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी, हनी ट्रैप नेटवर्क और आतंकी फंडिंग के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल की जा रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक संदिग्ध स्लीपर सेल मामले में डिजिटल परिसंपत्तियों के इस्तेमाल और विदेशी स्रोतों से धन पहुंचने की आशंका की जांच की जा रही है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के वर्षों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार चेतावनी देती रही हैं कि आतंकवादी संगठन पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से बचने के लिए नई तकनीकों और डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं। इसी वजह से जांच का फोकस अब क्रिप्टो लेनदेन, ऑनलाइन संपर्कों और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों पर भी है।

हनी ट्रैप और डिजिटल संपर्कों की जांच

रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसियां उन ऑनलाइन संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं जिनके माध्यम से कुछ संदिग्ध व्यक्तियों तक पहुंच बनाई गई थी। प्रारंभिक जांच में यह संभावना भी देखी जा रही है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को प्रभावित करने या संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई हो।

जांचकर्ताओं का मानना है कि आधुनिक हनी ट्रैप अभियानों में केवल व्यक्तिगत संबंधों का उपयोग नहीं होता, बल्कि डिजिटल पहचान, फर्जी प्रोफाइल और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों का भी सहारा लिया जाता है। इसी कारण एजेंसियां मोबाइल उपकरणों, ऑनलाइन खातों और डिजिटल संचार रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं।

हालांकि अधिकारियों ने अभी तक इस मामले में सभी निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए हैं और जांच जारी है।

क्रिप्टो फंडिंग पर क्यों है विशेष नजर?

जांच एजेंसियों की दिलचस्पी का एक बड़ा कारण संदिग्ध वित्तीय लेनदेन हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ डिजिटल भुगतान और क्रिप्टो ट्रांसफर की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं धन का प्रवाह आतंकी गतिविधियों या उससे जुड़े नेटवर्क तक तो नहीं पहुंचा।

विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग वैध निवेश और भुगतान के लिए किया जाता है, लेकिन इसकी सीमा पार लेनदेन क्षमता और कुछ मामलों में गोपनीयता संबंधी विशेषताओं के कारण अपराधी तत्व भी इसका दुरुपयोग करने की कोशिश कर सकते हैं। इसी वजह से दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियां ब्लॉकचेन विश्लेषण और डिजिटल फॉरेंसिक तकनीकों का उपयोग बढ़ा रही हैं।

भारत में भी पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मामलों की जांच हुई है जिनमें साइबर अपराध, धन शोधन और संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े क्रिप्टो लेनदेन सामने आए थे।

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आतंकवाद के वित्तपोषण पर बढ़ती सख्ती

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकी संगठनों के वित्तीय स्रोतों पर रोक लगाना आतंकवाद विरोधी रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी कारण भारत ने हाल के वर्षों में डिजिटल वित्तीय गतिविधियों की निगरानी बढ़ाई है।

गृह मंत्रालय और अन्य एजेंसियां पहले भी यह संकेत दे चुकी हैं कि आतंकवादी संगठन डिजिटल वॉलेट, क्रिप्टो परिसंपत्तियों और डार्क वेब जैसे माध्यमों का उपयोग करने की कोशिश कर सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है और ब्लॉकचेन आधारित जांच क्षमताओं को मजबूत किया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आज की जांच केवल नकद लेनदेन तक सीमित नहीं है। अब डिजिटल भुगतान, वर्चुअल परिसंपत्तियां, विदेशी सर्वर और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म भी जांच का हिस्सा बन चुके हैं।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल एजेंसियां डिजिटल सबूतों, वित्तीय रिकॉर्ड और संदिग्ध संपर्कों का विश्लेषण कर रही हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या वास्तव में किसी संगठित नेटवर्क ने क्रिप्टो माध्यमों का उपयोग कर धन पहुंचाने की कोशिश की थी और क्या हनी ट्रैप तकनीक का इस्तेमाल भर्ती, संपर्क या सूचना जुटाने के लिए किया गया था।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि जांच में क्रिप्टो फंडिंग से जुड़े ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो यह मामला भारत में डिजिटल परिसंपत्तियों के दुरुपयोग से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण जांचों में से एक बन सकता है।

साथ ही, यह मामला इस बात को भी रेखांकित करता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे अब केवल भौतिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल दुनिया, सोशल मीडिया नेटवर्क और क्रिप्टो लेनदेन भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौतियां बनकर उभरे हैं।

आने वाले दिनों में जांच के आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि संदिग्ध नेटवर्क कितना व्यापक था और उसमें डिजिटल वित्तीय माध्यमों की वास्तविक भूमिका क्या रही। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां मामले के हर पहलू की गहन जांच में जुटी हुई हैं।

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