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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

दक्षिण अफ्रीका ने क्रिप्टो टैक्स मसौदा जारी किया, क्या भारत भी अपनाएगा ऐसा मॉडल?

ताजा खबरेंप्रकाशित6 जुल॰ 2026

दक्षिण अफ्रीका ने क्रिप्टोकरेंसी पर नए कर दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी किया है। जानिए ट्रेडिंग, स्वैप, दान और निवेश पर प्रस्तावित नियम क्या हैं और इनका निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा।

दक्षिण अफ्रीका की कर वसूली एजेंसी साउथ अफ्रीकन रेवेन्यू सर्विस (SARS) ने क्रिप्टोकरेंसी पर नए कर दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी किया है। प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि देश में क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर मौजूदा आयकर और पूंजीगत लाभ कर कानून कैसे लागू होंगे। यदि ये दिशा-निर्देश लागू होते हैं, तो लाखों क्रिप्टो निवेशकों और ट्रेडरों को अपनी गतिविधियों की अधिक विस्तृत जानकारी कर विभाग को देनी पड़ सकती है।

SARS ने साफ किया है कि यह कोई नया कर कानून नहीं है। बल्कि इसका मकसद मौजूदा कानूनों के तहत क्रिप्टो परिसंपत्तियों के कर निर्धारण को स्पष्ट करना है। एजेंसी ने इस मसौदे पर 31 अगस्त 2026 तक आम लोगों और उद्योग से सुझाव भी मांगे हैं।

दक्षिण अफ्रीका अफ्रीका के सबसे बड़े क्रिप्टो बाजारों में गिना जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 58 लाख लोग किसी न किसी रूप में क्रिप्टो परिसंपत्तियों में निवेश कर चुके हैं। ऐसे में नए दिशा-निर्देश बड़ी संख्या में निवेशकों को प्रभावित कर सकते हैं।

किन लेनदेन पर लगेगा कर?

मसौदा दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल क्रिप्टो खरीदकर रखने पर कर नहीं लगेगा। लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति क्रिप्टो बेचता है, दूसरे टोकन से अदला-बदली करता है, भुगतान के रूप में उसका उपयोग करता है या किसी अन्य तरीके से उसका निपटान करता है, वह कर योग्य घटना मानी जा सकती है।

SARS ने यह भी स्पष्ट किया है कि क्रिप्टो परिसंपत्तियों को विदेशी मुद्रा या कानूनी मुद्रा नहीं माना जाएगा। इन्हें अमूर्त संपत्ति की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए इनका कर निर्धारण भी उसी आधार पर किया जाएगा।

इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति क्रिप्टो परिसंपत्तियां उपहार के रूप में देता है, तो कुछ परिस्थितियों में उस पर दान कर भी लागू हो सकता है। मसौदे में इस संबंध में भी विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

निवेशक और ट्रेडर में कैसे होगा अंतर?

नए मसौदे की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कर विभाग केवल लेनदेन की संख्या नहीं देखेगा, बल्कि निवेशक की मंशा को भी महत्व देगा।

यदि कोई व्यक्ति बार-बार खरीद और बिक्री कर मुनाफा कमाने की कोशिश करता है, तो उसे ट्रेडर माना जा सकता है और उसकी आय पर सामान्य आयकर के नियम लागू हो सकते हैं। दूसरी ओर यदि किसी ने लंबी अवधि के निवेश के उद्देश्य से क्रिप्टो खरीदा है, तो उस पर पूंजीगत लाभ कर के नियम लागू हो सकते हैं। अंतिम फैसला प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के आधार पर होगा।

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SARS ने कहा है कि किसी व्यक्ति की मंशा समय के साथ बदल भी सकती है। इसलिए कर निर्धारण करते समय खरीद, होल्डिंग अवधि और बिक्री सहित सभी तथ्यों का मूल्यांकन किया जाएगा।

निगरानी और अनुपालन पर रहेगा जोर

कर विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में क्रिप्टो लेनदेन की निगरानी और सख्त हो सकती है। इसके लिए एजेंसी ने एक विशेष इकाई भी बनाई है, जिसका उद्देश्य डिजिटल परिसंपत्तियों से जुड़े कर अनुपालन को मजबूत करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट दिशा-निर्देश आने से ईमानदार निवेशकों को अपने कर दायित्व समझने में आसानी होगी। वहीं दूसरी ओर कर चोरी और गलत जानकारी देने वाले लोगों पर कार्रवाई करना भी आसान हो जाएगा।

उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि नियमों की स्पष्टता बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती है, क्योंकि इससे लंबे समय से बनी अनिश्चितता कम होगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

दुनिया में बढ़ रहा है नियमन का दायरा

दक्षिण अफ्रीका का यह कदम ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई देश क्रिप्टो परिसंपत्तियों के लिए स्पष्ट कर और नियामकीय ढांचा तैयार कर रहे हैं। अफ्रीका में भी कई देश डिजिटल परिसंपत्तियों के लिए अलग नियम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं ताकि निवेशकों की सुरक्षा बढ़ाई जा सके और कर व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

फिलहाल यह मसौदा सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया गया है और अंतिम नियम अभी लागू नहीं हुए हैं। हालांकि यदि इन्हें मंजूरी मिलती है, तो दक्षिण अफ्रीका के क्रिप्टो निवेशकों के लिए कर अनुपालन पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और सख्त हो जाएगा। इससे यह भी संकेत मिलता है कि वैश्विक स्तर पर सरकारें अब क्रिप्टो बाजार को कर व्यवस्था के दायरे में अधिक प्रभावी तरीके से लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं।

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