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लेखक: Pratik Bhuyanस्टाफ संपादक
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भूटान ने फिर बेचे बिटकॉइन, $23 मिलियन की निकासी से घटी होल्डिंग

भूटान ने $23 मिलियन के बिटकॉइन ट्रांसफर किए, जिससे उसकी कुल होल्डिंग में बड़ी गिरावट आई है। जानिए क्यों देश लगातार BTC बेच रहा है।

भूटान ने फिर बेचे बिटकॉइन, $23 मिलियन की निकासी से घटी होल्डिंग
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हिमालयी देश Bhutan ने एक बार फिर अपने बिटकॉइन भंडार में कमी की है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश ने करीब $23 मिलियन यानी लगभग 320 बिटकॉइन को ट्रांसफर किया है, जिसे बाजार में बिक्री से जोड़ा जा रहा है।

यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब भूटान पिछले कुछ महीनों से लगातार छोटे-छोटे हिस्सों में अपने बिटकॉइन बेच रहा है। इससे संकेत मिलता है कि यह कोई एक बार की कार्रवाई नहीं बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।

लगातार घट रही है बिटकॉइन होल्डिंग

रिपोर्ट के अनुसार, भूटान की कुल बिटकॉइन होल्डिंग में पिछले कुछ समय में बड़ी गिरावट आई है। पहले जहां देश के पास लगभग 13,000 BTC थे, अब यह घटकर करीब 4,000 BTC के आसपास रह गए हैं।

यानी कुल होल्डिंग में करीब 70 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट बताती है कि देश धीरे-धीरे अपने डिजिटल भंडार को कम कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की शुरुआत से ही $200 मिलियन से ज्यादा के बिटकॉइन की निकासी हो चुकी है। यह दर्शाता है कि बिक्री लगातार और योजनाबद्ध तरीके से की जा रही है।

क्यों बेच रहा है भूटान बिटकॉइन

भूटान ने पिछले कुछ वर्षों में बिटकॉइन को अपनी आर्थिक रणनीति का हिस्सा बनाया था। देश ने अपनी जलविद्युत क्षमता का उपयोग करके बिटकॉइन माइनिंग की और इसे एक नए राजस्व स्रोत के रूप में अपनाया।

लेकिन अब बिक्री के पीछे कई संभावित कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण है घरेलू खर्चों को पूरा करना। पहले भी रिपोर्ट्स में सामने आया था कि सरकार ने बिटकॉइन बेचकर सार्वजनिक खर्च और वेतन जैसी जरूरतों को पूरा किया।

दूसरा कारण पोर्टफोलियो संतुलन हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार जोखिम कम करने के लिए धीरे-धीरे अपनी होल्डिंग घटा रही है। तीसरा कारण बाजार की स्थिति भी हो सकती है। कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच कुछ देश लाभ बुक करने का फैसला लेते हैं।

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बाजार पर क्या पड़ सकता है असर

भूटान जैसे देशों की बिक्री को बाजार में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। जब कोई सरकार बिटकॉइन बेचती है, तो इससे निवेशकों की धारणा पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, यह भी देखा गया है कि भूटान बड़े पैमाने पर एक साथ बिक्री नहीं करता, बल्कि छोटे हिस्सों में लेन-देन करता है। इससे बाजार पर अचानक दबाव कम पड़ता है।

फिर भी, लगातार हो रही निकासी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह एक तरह से “सप्लाई ओवरहैंग” बन सकता है, जिससे कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

आगे की रणनीति पर नजर

भूटान अब भी दुनिया के बड़े सरकारी बिटकॉइन धारकों में शामिल है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह शीर्ष देशों में पांचवें स्थान पर बना हुआ है। इसके साथ ही देश ने डिजिटल एसेट्स को अपने दीर्घकालिक विकास से भी जोड़ा है, जैसे कि नए आर्थिक क्षेत्र और तकनीकी परियोजनाएं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि भूटान अपनी बाकी होल्डिंग को बनाए रखता है या बिक्री जारी रखता है।

कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम दिखाता है कि अब देश भी क्रिप्टो बाजार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और उनके फैसले का असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा सकता है।

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