
अमेरिका के नए ईरान हमलों से क्रिप्टो बाजार में $80 Bn साफ
अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े नए हमलों के बाद crypto market में भारी गिरावट आई है। जानिए कैसे कुछ घंटों में $80 Bn डूबे, बिटकॉइन और ऑल्टकॉइन पर क्या असर पड़ा और आगे बाजार की दिशा क्या हो सकती है।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे क्रिप्टो बाजार पर दिखाई देने लगा है। अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े ठिकानों पर नए सैन्य हमले किए जाने के बाद वैश्विक बाजारों में घबराहट बढ़ गई और क्रिप्टो बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक सिर्फ कुछ घंटों में क्रिप्टो बाजार से करीब $80 Bn की वैल्यू साफ हो गई।
बिटकॉइन, एथेरियम और कई बड़े ऑल्टकॉइन में तेज गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने जोखिम वाले assets से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे बाजार sentiment तेजी से कमजोर हुआ। Analysts का कहना है कि geopolitical tensions अब क्रिप्टो बाजार के लिए भी बड़ा risk factor बनते जा रहे हैं।
बिटकॉइन और एथेरियम में तेज गिरावट
अमेरिकी हमलों की खबर सामने आने के बाद बिटकॉइन की कीमत तेजी से नीचे फिसली। कई बड़े exchanges पर BTC में अचानक selling pressure बढ़ गया। एथेरियम और दूसरे ऑल्टकॉइन में भी भारी कमजोरी देखने को मिली।
Market data के अनुसार, क्रिप्टो बाजार capitalization कुछ ही घंटों में लगभग $80 Bn घट गया। कई leveraged traders की positions liquidate हो गईं, जिससे गिरावट और तेज हो गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब वैश्विक तनाव बढ़ता है, तब निवेशक आमतौर पर सुरक्षित assets की तरफ भागते हैं। इसी वजह से crypto जैसे volatile assets में बिकवाली बढ़ जाती है।
क्यों डर गया बाजार?
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय से बना हुआ है। लेकिन हालिया सैन्य कार्रवाई ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। Analysts का कहना है कि अगर संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार और financial markets पर पड़ सकता है।
क्रिप्टो बाजार पहले भी geopolitical shocks पर तेजी से react करता रहा है। इस बार भी निवेशकों ने तेजी से risk-off strategy अपनाई।
कुछ analysts का मानना है कि investors फिलहाल capital बचाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने high-risk crypto positions से बाहर निकलना शुरू किया।
Liquidation wave ने बढ़ाया दबाव
Crypto derivatives market में हालिया गिरावट के दौरान भारी liquidation देखने को मिली। कई traders ने leverage लेकर long positions बनाई हुई थीं। जैसे ही कीमतें नीचे गईं, exchanges ने automatic liquidation शुरू कर दी।
इससे बाजार में selling pressure और बढ़ गया। कुछ reports के अनुसार, कुछ ही घंटों में करोड़ों डॉलर की leveraged positions wipe out हो गईं।
विशेषज्ञों का कहना है कि crypto market में leverage बहुत बड़ा risk factor बना हुआ है। छोटी geopolitical news भी बड़े liquidation cascade को जन्म दे सकती है।
तेल की कीमत और डॉलर भी बने वजह
अमेरिका-ईरान तनाव का असर crude oil बाजार पर भी पड़ा। Brent crude oil की कीमतों में तेजी देखने को मिली। जब तेल महंगा होता है, तब global inflation concerns बढ़ जाते हैं और investors risky assets से दूरी बनाने लगते हैं।
इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हुआ। आमतौर पर strong dollar crypto market के लिए negative माना जाता है क्योंकि इससे global liquidity पर दबाव बढ़ता है।
विश्लेषकों का कहना है कि क्रिप्टो बाजार सिर्फ internal factors से नहीं, बल्कि global macroeconomic events से भी तेजी से प्रभावित हो रहा है।
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Fear Index में बढ़ी घबराहट
Crypto Fear and Greed Index भी हालिया गिरावट के बाद तेजी से नीचे आया। Market sentiment फिर “Fear” zone में पहुंच गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि traders फिलहाल cautious mood में हैं।
Social media पर भी panic selling और further downside की चर्चा बढ़ गई है। हालांकि कुछ experienced investors इसे buying opportunity के रूप में भी देख रहे हैं।
इतिहास बताता है कि क्रिप्टो बाजार कई बार बड़े geopolitical shocks के बाद recovery भी दिखा चुका है। लेकिन short-term volatility फिलहाल काफी ज्यादा बनी हुई है।
ऑल्टकॉइन पर सबसे ज्यादा असर
बिटकॉइन की तुलना में छोटे ऑल्टकॉइन में ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। Meme coins और low liquidity tokens में panic selling और तेज दिखाई दी।
एथेरियम, सोलाना और दूसरे बड़े tokens भी दबाव में रहे। Analysts का कहना है कि जब market uncertainty बढ़ती है, तब निवेशक सबसे पहले high-risk assets से बाहर निकलते हैं।
यही वजह है कि ऑल्टकॉइन बाजार में कमजोरी ज्यादा गहरी दिखाई दे रही है।
क्या फिर संभल सकता है बाजार?
कुछ experts का मानना है कि अगर मध्य पूर्व तनाव ज्यादा नहीं बढ़ता, तो क्रिप्टो बाजार आने वाले दिनों में stabilization दिखा सकता है। इसके अलावा institutional investors अब भी बिटकॉइन ETF और long-term accumulation पर नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि short-term में volatility बनी रहने की संभावना है। Traders अब अमेरिकी विदेश नीति, तेल की कीमतों और global stock markets पर करीबी नजर रख रहे हैं।
आगे किस पर रहेगी नजर?
फिलहाल क्रिप्टो बाजार पूरी तरह geopolitical headlines से प्रभावित दिखाई दे रहा है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो crypto assets में और दबाव देखने को मिल सकता है।
लेकिन अगर स्थिति नियंत्रित रहती है, तो market धीरे धीरे recovery की तरफ लौट सकता है।
इतना जरूर साफ है कि क्रिप्टो बाजार अब सिर्फ technology या adoption की कहानी नहीं रह गया है। यह तेजी से global politics और macroeconomic risks से जुड़ा financial market बनता जा रहा है।
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