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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

क्या शुरू होने जा रहा है अमेरिका का ‘बिटकॉइन 2.0’? नई योजना ने बढ़ाई वैश्विक चर्चा

ताजा खबरेंप्रकाशित10 जून 2026

अमेरिका में बिटकॉइन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। रणनीतिक बिटकॉइन भंडार और 20 साल तक होल्ड करने के प्रस्ताव को कुछ विशेषज्ञ "अमेरिका का बिटकॉइन 2.0" बता रहे हैं। जानिए इसके पीछे की योजना और संभावित असर।

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अमेरिका में बिटकॉइन को लेकर एक नई बहस तेजी से उभर रही है। जहां कुछ साल पहले तक क्रिप्टोकरेंसी को मुख्य रूप से निजी निवेश और तकनीकी नवाचार के नजरिए से देखा जाता था, वहीं अब इसे राष्ट्रीय रणनीति और आर्थिक सुरक्षा के संदर्भ में भी समझा जा रहा है। इसी बदलाव को कई विश्लेषक "अमेरिका का बिटकॉइन 2.0" नाम दे रहे हैं। इसका केंद्र बिंदु वह प्रस्ताव है जिसमें अमेरिकी सरकार के बिटकॉइन भंडार को कानूनी आधार देने और लंबे समय तक सुरक्षित रखने की बात कही गई है।

हाल के महीनों में अमेरिकी प्रशासन और सांसदों की ओर से डिजिटल परिसंपत्तियों को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। इससे यह धारणा मजबूत हुई है कि बिटकॉइन अब केवल एक निवेश साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक रणनीति का हिस्सा भी बन सकता है।

रणनीतिक बिटकॉइन भंडार को कानूनी रूप देने की तैयारी

अमेरिकी कांग्रेस में पेश किए गए अमेरिकी रिजर्व आधुनिकीकरण अधिनियम (ARMA) ने इस चर्चा को नई दिशा दी है। प्रस्ताव के अनुसार संघीय सरकार के नियंत्रण में मौजूद बिटकॉइन को कम से कम 20 वर्षों तक सुरक्षित रखा जाएगा। इसके साथ ही वित्त मंत्रालय को चरणबद्ध तरीके से अतिरिक्त बिटकॉइन खरीदने का अधिकार भी दिया जा सकता है।

यह प्रस्ताव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश को स्थायी कानूनी आधार देने की कोशिश माना जा रहा है जिसमें रणनीतिक बिटकॉइन भंडार की अवधारणा सामने आई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह कानून बनता है, तो भविष्य में किसी भी प्रशासन के लिए इसे आसानी से बदलना संभव नहीं होगा।

सरकारी एजेंसियों के पास पहले से जब्त किए गए हजारों बिटकॉइन मौजूद हैं, जो विभिन्न आपराधिक मामलों और साइबर अपराध जांच के दौरान हासिल हुए थे। नई योजना इन परिसंपत्तियों को दीर्घकालिक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में देखने की दिशा में कदम मानी जा रही है।

क्यों कहा जा रहा है ‘बिटकॉइन 2.0’?

विश्लेषकों के अनुसार बिटकॉइन के पहले चरण में मुख्य जोर व्यक्तिगत निवेश, भुगतान और तकनीकी प्रयोगों पर था। लेकिन अब चर्चा इस बात पर हो रही है कि क्या सरकारें भी बिटकॉइन को सोने जैसी रणनीतिक संपत्ति के रूप में रख सकती हैं।

यही सोच "बिटकॉइन 2.0" की अवधारणा को जन्म दे रही है। इस मॉडल में बिटकॉइन को केवल एक डिजिटल मुद्रा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय भंडार और आर्थिक शक्ति के साधन के रूप में देखा जाता है। कुछ समर्थकों का मानना है कि सीमित आपूर्ति वाला बिटकॉइन भविष्य में मूल्य संरक्षण का माध्यम बन सकता है।

यह विचार पूरी तरह नया नहीं है। दुनिया के कई देशों ने दशकों से सोने और विदेशी मुद्राओं का भंडार रखा है। अब कुछ नीति विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल युग में बिटकॉइन भी ऐसी परिसंपत्तियों की सूची में शामिल हो सकता है।

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समर्थक और आलोचक आमने-सामने

इस प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि बिटकॉइन की सीमित आपूर्ति इसे मुद्रास्फीति के खिलाफ संभावित सुरक्षा प्रदान करती है। उनका तर्क है कि यदि अमेरिका शुरुआती चरण में पर्याप्त भंडार तैयार कर लेता है, तो भविष्य में उसे आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिल सकता है।

दूसरी ओर आलोचक बिटकॉइन की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव को लेकर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि किसी राष्ट्रीय भंडार का आधार ऐसी परिसंपत्ति नहीं होना चाहिए जिसकी कीमत कुछ महीनों में बड़े स्तर पर बदल सकती हो। इसके अलावा कई विशेषज्ञ अभी भी पारंपरिक भंडार परिसंपत्तियों को अधिक सुरक्षित मानते हैं।

कुछ अर्थशास्त्रियों का यह भी कहना है कि सरकारों को डिजिटल परिसंपत्तियों के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि नवाचार और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बना रहे।

वैश्विक बाजार पर क्या पड़ सकता है असर?

यदि अमेरिका रणनीतिक बिटकॉइन भंडार को स्थायी कानूनी आधार देता है, तो इसका असर केवल अमेरिकी बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया भर के नीति निर्माता और केंद्रीय संस्थान इस कदम पर नजर रखेंगे। कई देशों में पहले से डिजिटल परिसंपत्तियों को लेकर चर्चा चल रही है और अमेरिका का निर्णय उस बहस को नई दिशा दे सकता है।

फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है और इसके कानून बनने में समय लग सकता है। लेकिन एक बात स्पष्ट है कि बिटकॉइन को लेकर चर्चा अब केवल निवेशकों और तकनीकी समुदाय तक सीमित नहीं रही। अमेरिका में चल रही यह बहस संकेत देती है कि डिजिटल परिसंपत्तियां वैश्विक आर्थिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि "बिटकॉइन 2.0" की यह अवधारणा कितनी दूर तक जाती है और क्या यह वास्तव में वित्तीय व्यवस्था में एक नए अध्याय की शुरुआत साबित होती है।

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