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Jai Singla द्वारा लिखितstaff editorPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितstaff editor

₹226 करोड़ के क्रिप्टो आतंकी फंडिंग मामले में दो और गिरफ्तार, जानिए पूरी कहानी

ताजा खबरेंप्रकाशितJun 8, 2026

गुजरात पुलिस ने ₹226 करोड़ के कथित क्रिप्टो आतंकी फंडिंग नेटवर्क मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में डार्क वेब, साइबर अपराध, मोनेरो और यूएसडीटी के जरिए धन के लेनदेन के आरोप सामने आए हैं।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए कथित आतंकी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय अवैध वित्तीय नेटवर्क से जुड़े मामले में जांच एजेंसियों को एक और बड़ी सफलता मिली है। गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCoE) ने ₹226 करोड़ के कथित क्रिप्टो नेटवर्क मामले में दो और लोगों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों के साथ इस मामले में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या 12 हो गई है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि यह नेटवर्क केवल क्रिप्टो लेनदेन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार डार्क वेब, साइबर धोखाधड़ी, मादक पदार्थों की तस्करी और कथित आतंकी फंडिंग गतिविधियों से भी जुड़े हो सकते हैं। मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल परिसंपत्तियों का उपयोग अवैध वित्तीय गतिविधियों में किस हद तक किया जा सकता है।

कैसे सामने आया पूरा नेटवर्क?

पुलिस के अनुसार, हाल ही में गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी गुजरात के भावनगर जिले के रहने वाले हैं। जांच में आरोप है कि उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति के केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर एक क्रिप्टो वॉलेट संचालित किया। अधिकारियों का कहना है कि इसी वॉलेट में लगभग 5,000 यूएसडीटी प्राप्त हुए थे, जिन्हें जांच एजेंसियां संदिग्ध स्रोतों से जुड़ा धन मान रही हैं।

जांच के दौरान ब्लॉकचेन विश्लेषण तकनीक की मदद से संदिग्ध लेनदेन की पहचान की गई। इसके बाद अधिकारियों ने विभिन्न वॉलेट और खातों के बीच धन के प्रवाह का अध्ययन किया, जिससे एक बड़े नेटवर्क के संकेत मिले। पुलिस का दावा है कि धन को कई स्तरों पर अलग-अलग खातों और वॉलेट के माध्यम से घुमाया गया ताकि उसके वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके।

डार्क वेब और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की जांच

यह मामला पहली बार मई 2026 में चर्चा में आया था, जब गुजरात पुलिस ने अहमदाबाद, मुंबई और हरियाणा से कई लोगों को गिरफ्तार किया था। शुरुआती जांच में कथित तौर पर एक डार्क वेब मंच से जुड़े क्रिप्टो लेनदेन का पता चला था। इसके बाद जांच एजेंसियों ने कई अन्य वॉलेट और उपयोगकर्ताओं तक पहुंच बनाई।

अधिकारियों के अनुसार, जांच में कुल लगभग ₹226.54 करोड़ के लेनदेन का पता चला है। पुलिस का दावा है कि इन लेनदेन का एक हिस्सा ऐसे स्रोतों से जुड़ा हो सकता है जिन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

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जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस नेटवर्क के विदेशी संचालकों या अन्य देशों में मौजूद वित्तीय चैनलों से सीधे संबंध थे। इसी कारण मामले में अंतरराष्ट्रीय पहलू भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मोनेरो और यूएसडीटी के इस्तेमाल पर बढ़ी चिंता

जांच में सामने आया है कि कथित नेटवर्क ने धन के स्रोत और गंतव्य को छिपाने के लिए विभिन्न क्रिप्टो परिसंपत्तियों का इस्तेमाल किया। अधिकारियों का कहना है कि विशेष रूप से गोपनीयता केंद्रित क्रिप्टोकरेंसी मोनेरो और स्थिर मुद्रा यूएसडीटी का उपयोग धन को कई चरणों में स्थानांतरित करने के लिए किया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, मोनेरो जैसी क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन की जानकारी को छिपाने के लिए जानी जाती है, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक जटिल हो जाती है। हालांकि आधुनिक ब्लॉकचेन विश्लेषण उपकरणों की मदद से एजेंसियां अब पहले की तुलना में अधिक प्रभावी तरीके से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर पा रही हैं।

भारत में बढ़ती निगरानी और आगे की जांच

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारत में साइबर अपराध और क्रिप्टो आधारित वित्तीय धोखाधड़ी पर निगरानी लगातार बढ़ाई जा रही है। हाल के वर्षों में विभिन्न एजेंसियों ने कई बड़े मामलों में कार्रवाई की है, जिनमें डिजिटल धोखाधड़ी, हवाला नेटवर्क और क्रिप्टो के जरिए धन शोधन के आरोप शामिल रहे हैं।

फिलहाल गुजरात पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि विदेशी वित्तीय चैनलों, संभावित सहयोगियों और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

क्रिप्टो बाजार के बढ़ते आकार के साथ यह मामला इस बात का संकेत देता है कि डिजिटल परिसंपत्तियों के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार के साथ-साथ निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।

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