
31 जुलाई से पहले क्रिप्टो निवेशक जान लें ITR फाइलिंग की ये जरूरी बातें
31 जुलाई की ITR समय सीमा से पहले क्रिप्टो निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जानिए 30% टैक्स, 1% टीडीएस, सही रिपोर्टिंग और आम गलतियों से बचने का पूरा तरीका।

31 जुलाई की आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा नजदीक आते ही लाखों करदाता अपने दस्तावेज व्यवस्थित करने में जुटे हैं। लेकिन जिन लोगों ने पिछले वित्त वर्ष में क्रिप्टो परिसंपत्तियों में निवेश या ट्रेडिंग की है, उनके लिए कुछ अतिरिक्त सावधानियां जरूरी हैं। कर विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल परिसंपत्तियों से जुड़ी आय की गलत या अधूरी जानकारी आयकर विभाग की नजर में आ सकती है।
भारत में क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर पहले से विशेष कर नियम लागू हैं। बिक्री, अदला बदली या अन्य प्रकार के हस्तांतरण से होने वाले लाभ पर 30 प्रतिशत कर लगता है, जबकि कई लेनदेन पर 1 प्रतिशत टीडीएस भी लागू होता है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी लेनदेन का मिलान करना जरूरी माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई निवेशक केवल लाभ और हानि का अनुमान लगाकर रिटर्न भर देते हैं, जबकि सही रिकॉर्ड और कर दस्तावेजों का मिलान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
सबसे पहले तैयार रखें सभी रिकॉर्ड
कर सलाहकारों का कहना है कि रिटर्न भरने से पहले निवेशकों को अपने सभी क्रिप्टो लेनदेन का पूरा विवरण एक जगह इकट्ठा कर लेना चाहिए। इसमें खरीद और बिक्री का इतिहास, एक्सचेंज से प्राप्त लाभ और हानि रिपोर्ट, टीडीएस का विवरण तथा वॉलेट से जुड़े रिकॉर्ड शामिल होने चाहिए।
यदि किसी निवेशक ने एक से अधिक एक्सचेंज या वॉलेट का उपयोग किया है, तो सभी आंकड़ों का मिलान करना जरूरी है। केवल किसी एक मंच की रिपोर्ट पर निर्भर रहने से वास्तविक लाभ या हानि की गणना में अंतर आ सकता है।
कर विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि एक्सचेंज द्वारा उपलब्ध कराए गए कर विवरण को फॉर्म 26AS और वार्षिक सूचना विवरण से भी मिलाकर देखना चाहिए, ताकि टीडीएस या रिपोर्टिंग में किसी प्रकार का अंतर समय रहते सामने आ सके।
इन गलतियों से बचना जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे आम गलती यह होती है कि निवेशक केवल लाभदायक लेनदेन दिखाते हैं और बाकी गतिविधियों का उल्लेख नहीं करते। कई लोग टोकन की अदला बदली, एयरड्रॉप, उपहार में मिली डिजिटल परिसंपत्तियों या विदेशी मंचों पर किए गए लेनदेन की रिपोर्टिंग भी भूल जाते हैं।
यदि किसी निवेशक के पास विदेशी एक्सचेंज या विदेशी वॉलेट में डिजिटल परिसंपत्तियां हैं और वे लागू नियमों के दायरे में आती हैं, तो उनसे जुड़ी जानकारी भी सही तरीके से देनी चाहिए। गलत या अधूरी जानकारी भविष्य में नोटिस का कारण बन सकती है।
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विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि क्रिप्टो लाभ पर लागू 30 प्रतिशत कर के बावजूद टीडीएस को अलग कर के रूप में नहीं देखना चाहिए। टीडीएस अग्रिम कर संग्रह की व्यवस्था है और अंतिम कर देनदारी की गणना रिटर्न दाखिल करते समय होती है। यदि अधिक टीडीएस कट गया है, तो उसका दावा भी किया जा सकता है।
सही रिपोर्टिंग क्यों है महत्वपूर्ण?
हाल के महीनों में आयकर विभाग ने डिजिटल परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों पर निगरानी बढ़ाई है। विभाग विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का मिलान कर रहा है, जिससे गलत रिपोर्टिंग या आय छिपाने के मामलों की पहचान पहले की तुलना में आसान हो गई है।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी निवेशक ने समय पर और सही जानकारी के साथ रिटर्न दाखिल किया है, तो अनावश्यक परेशानियों से बचा जा सकता है। वहीं रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने से भविष्य में किसी स्पष्टीकरण की स्थिति में भी सुविधा रहती है।
अंतिम समय में क्या करें?
रिटर्न जमा करने से पहले एक बार सभी आंकड़ों की दोबारा जांच करें। यह सुनिश्चित करें कि सभी क्रिप्टो लेनदेन का विवरण सही है, टीडीएस का मिलान हो चुका है और आवश्यक अनुसूचियों में सही जानकारी दर्ज की गई है।
यदि लेनदेन अधिक हैं या कई अलग अलग मंचों का उपयोग किया गया है, तो कर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर विकल्प हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम समय की जल्दबाजी में की गई छोटी गलती भी बाद में नोटिस या संशोधित रिटर्न की वजह बन सकती है.
फिलहाल 31 जुलाई की समय सीमा से पहले क्रिप्टो निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि वे अपने सभी रिकॉर्ड व्यवस्थित रखें, सही जानकारी के साथ आयकर रिटर्न दाखिल करें और कर नियमों का पूरी तरह पालन करें। इससे न केवल अनुपालन आसान होगा, बल्कि भविष्य की संभावित परेशानियों से भी बचा जा सकेगा.
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