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Rajeev Ranjan Roy द्वारा लिखितस्टाफ लेखकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

UAE की कंपनी ने ट्रम्प से जुड़ी क्रिप्टो फर्म वर्ल्ड लिबर्टी का 49% हिस्सा आधिकारिक रूप से खरीदा

ताजा खबरेंप्रकाशित2 फ़र॰ 2026

UAE (यूएई) की शेख तहनून समर्थित कंपनी ने ट्रम्प से जुड़ी क्रिप्टो फर्म वर्ल्ड लिबर्टी में $500M में 49% हिस्सेदारी खरीदी, जिससे राजनीतिक और व्यापारिक हलचल तेज हो गई।

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संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की समर्थित निवेश कंपनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से जुड़ी क्रिप्टोकरेंसी फर्म वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (World Liberty Financial) का लगभग 49 प्रतिशत हिस्सा 500 मिलियन डॉलर में खरीद लिया है। यह जानकारी वाल स्ट्रीट जर्नल के ताज़ा विश्लेषण में सामने आई है।

नए खुलासे के अनुसार यह निवेश समझौता जनवरी 2025 में ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से चार दिन पहले शांत तरीके से किया गया था, मगर सार्वजनिक रूप से कभी घोषित नहीं किया गया।

खरीदारी का कार्य ‘आर्यम इन्वेस्टमेंट 1’ नामक एक अबू धाबी आधारित फर्म ने किया, जो शेख तहनून बिन जायद अल नाहयान के समर्थन वाली निवेश इकाई मानी जाती है। शेख तहनून यूएई के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी हैं और देश की रणनीतिक तकनीकी परियोजनाओं में अग्रणी भूमिका निभाते हैं।

लगभग आधा भुगतान अग्रिम रूप में किया गया

समझौते के तहत कुल 500 मिलियन डॉलर में से लगभग आधा भुगतान अग्रिम रूप में किया गया, जिसमें से 187 मिलियन डॉलर सीधे ट्रम्प परिवार से जुड़े नियंत्रणित इकाइयों को दिया गया। बाकी राशि वर्ल्ड लिबर्टी के सह-संस्थापकों और वरिष्ठ कर्मचारियों के समूह को वितरित की गई।

इस निवेश के साथ अब आर्यम इन्वेस्टमेंट वर्ल्ड लिबर्टी का सबसे बड़ा बाहरी भागीदार बन गया है, जबकि ट्रम्प परिवार की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण रूप से घटकर लगभग 38 प्रतिशत रह गई है।

रणनीतिक और राजनीतिक प्रभाव

विश्लेषकों का मानना है कि यह सौदा न केवल एक व्यापारिक निवेश है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों और तकनीकी राजनीति में भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। खासकर यह निवेश US-UAE के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चिप्स के समझौते के पहले हुआ, जिसके तहत अमेरिका ने यूएई को अत्याधुनिक एआई चिप्स की आपूर्ति की अनुमति दी थी।

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कुछ विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि यह कदम यूएई की तकनीकी क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है, जबकि अमेरिका अपनी तकनीकी घरेलू सुरक्षा नीतियों में बदलाव कर रहा है।

आलोचना और जांच की मांग

इस सौदे ने अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में भी बहस पैदा कर दी है। डेमोक्रेटिक सांसद एलिज़ाबेथ वॉरेन सहित कई प्रतिनिधियों ने कांग्रेस से इस मामले की गहन जांच की मांग की है, यह कहते हुए कि विदेशी निवेश और राष्ट्रीय नीति के बीच संभवतः संघर्ष या प्रभाव पैदा होने की आशंका है।

हालाँकि व्हाइट हाउस और वर्ल्ड लिबर्टी दोनों ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है और कहा है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस सौदे में सीधे भाग नहीं लिया तथा यह सामान्य व्यापारिक निर्णय था।

क्रिप्टो बाजार पर प्रभाव

जबकि वर्ल्ड लिबर्टी का टोकन और अन्य क्रिप्टो संपत्तियाँ पहले ही बाजार में उतार-चढ़ाव झेल रही हैं, इस तरह के बड़े निवेश ने निवेशकों के बीच उत्साह और चिंता दोनों को बढ़ाया है। कई विश्लेषकों ने कहा है कि विदेशी निवेश के साथ पारदर्शिता और शासन ढांचे पर सवाल उठ सकते हैं, जिससे बाजार में नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

निष्कर्ष

यूएई की प्रमुख निवेश फर्म द्वारा वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल के 49 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण एक महत्वपूर्ण वैश्विक निवेश और राजनीतिक घटना है। यह न केवल क्रिप्टो उद्योग के लिए बड़ा कदम है, बल्कि इसके व्यापक रणनीतिक, राजनीतिक और बाजार पर प्रभाव के कारण इसका अध्ययन और जांच आवश्यक माना जा रहा है। ऐसी घटनाएँ दर्शाती हैं कि आज के वैश्विक व्यापार निर्णय केवल आर्थिक नहीं, बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक परिणाम भी रखते हैं।

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