क्रिप्टो बाजार में पिछले 10 वर्षों के दौरान जितने बड़े साइबर हमले हुए, उनमें सबसे ज्यादा नुकसान प्राइवेट की चोरी की वजह से हुआ। नई रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स ने एक्सचेंज, वॉलेट और DeFi प्लेटफॉर्म की निजी चाबियां चुराकर अरबों डॉलर की डिजिटल संपत्ति पर कब्जा कर लिया। अब विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लॉकचेन की तकनीक नहीं, बल्कि उसे इस्तेमाल करने वाले लोगों और कंपनियों की सुरक्षा सबसे बड़ी कमजोरी बन गई है।
क्या होती है प्राइवेट की और यह इतनी अहम क्यों है?
प्राइवेट की वह गुप्त कोड होती है, जिससे किसी व्यक्ति या कंपनी को अपने क्रिप्टो वॉलेट तक पहुंच मिलती है। अगर यह कोड किसी और के हाथ लग जाए, तो वह पूरे वॉलेट पर नियंत्रण पा सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले एक दशक में ज्यादातर बड़े क्रिप्टो हमले किसी तकनीकी खामी से नहीं, बल्कि प्राइवेट की लीक होने से हुए। कई मामलों में हैकर्स ने फिशिंग ईमेल, नकली वेबसाइट, संक्रमित सॉफ्टवेयर या अंदरूनी कर्मचारियों की मदद से यह जानकारी हासिल की।
शोधकर्ताओं का कहना है कि ब्लॉकचेन नेटवर्क आम तौर पर सुरक्षित रहते हैं, लेकिन वॉलेट, एक्सचेंज और उनके एक्सेस सिस्टम अक्सर कमजोर साबित होते हैं। इसी वजह से हैकर्स सीधे नेटवर्क को नहीं, बल्कि निजी चाबी रखने वाले व्यक्ति या सिस्टम को निशाना बनाते हैं।
बड़े हमलों में एक ही तरीका बार बार दिखा
2025 और 2026 में सामने आए कई बड़े मामलों में यही पैटर्न दिखा। जनवरी 2026 में Step Finance पर हुए $40 Mn के हमले में हैकर्स ने प्राइवेट की हासिल कर ली थी। मार्च में Resolv Labs पर भी इसी तरह का हमला हुआ। DefiLlama के अनुसार, सिर्फ Q1 2026 में 34 DeFi प्लेटफॉर्म से $168 Mn की चोरी हुई, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा प्राइवेट की से जुड़े हमलों का था।
सबसे चर्चित मामलों में Drift Protocol पर हुआ $285 Mn का हमला भी शामिल है। जांच में सामने आया कि हमलावरों ने महीनों तक नकली पहचान बनाकर कंपनी का भरोसा जीता और फिर सिस्टम तक पहुंच हासिल कर ली। बाद में इसी एक्सेस का इस्तेमाल कर बड़ी रकम निकाल ली गई। जांच एजेंसियों को शक है कि इस हमले के पीछे उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर्स हो सकते हैं।
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2025 में Bybit पर हुए $1.4 Bn के हमले और उससे पहले Bitfinex तथा Mt. Gox जैसे मामलों में भी एक्सेस कंट्रोल और निजी चाबियों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा रही। Chainalysis के अनुसार, 2025 में कुल क्रिप्टो चोरी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा कुछ बड़े हमलों से आया, जिनमें हैकर्स ने सीधे वॉलेट या एक्सचेंज की पहुंच पर हमला किया।
क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे हमले?
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे जैसे क्रिप्टो बाजार बड़ा हो रहा है, वैसे वैसे हैकर्स का ध्यान भी बड़े संस्थानों और अमीर निवेशकों की तरफ जा रहा है। पहले छोटे वॉलेट और सामान्य उपयोगकर्ता निशाने पर होते थे, लेकिन अब हैकर्स "बिग गेम हंटिंग" कर रहे हैं। यानी वे उन कंपनियों को निशाना बना रहे हैं, जिनके पास अरबों डॉलर की डिजिटल संपत्ति है।
इसके अलावा, कई कंपनियां अब भी अपनी प्राइवेट की को ऑनलाइन सर्वर, क्लाउड या सामान्य कंप्यूटर पर रखती हैं। इससे चोरी का खतरा बढ़ जाता है। कुछ मामलों में तो ऑफलाइन या हार्डवेयर वॉलेट भी सुरक्षित नहीं रहे। शोधकर्ताओं ने पाया है कि अगर किसी सिस्टम में पहले से मालवेयर मौजूद हो, तो एयर-गैप्ड यानी इंटरनेट से अलग रखे गए वॉलेट से भी निजी चाबी चुराई जा सकती है।
बचाव के लिए क्या कर रहे हैं एक्सचेंज और निवेशक?
बढ़ते खतरों को देखते हुए अब बड़ी क्रिप्टो कंपनियां हार्डवेयर आधारित सुरक्षा, मल्टी-सिग्नेचर वॉलेट और अलग-अलग मंजूरी वाले सिस्टम अपना रही हैं। मल्टी-सिग्नेचर का मतलब है कि किसी लेनदेन को पूरा करने के लिए एक से ज्यादा लोगों की अनुमति चाहिए होगी। इससे एक व्यक्ति की गलती या चोरी से पूरा वॉलेट खाली नहीं हो सकता।
विशेषज्ञ निवेशकों को भी सलाह दे रहे हैं कि वे अपनी प्राइवेट की कभी ऑनलाइन सेव न करें, किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और बड़े निवेश को हमेशा हार्डवेयर वॉलेट में रखें। साथ ही, जिन स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट को पहले अनुमति दी गई है, उनकी नियमित जांच करते रहना भी जरूरी है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है। आने वाले समय में क्रिप्टो दुनिया का सबसे बड़ा खतरा तकनीक नहीं, बल्कि प्राइवेट की की सुरक्षा होगी। जो लोग और कंपनियां इसे सुरक्षित रख पाएंगे, वही अपने डिजिटल निवेश को बचा सकेंगे।
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