दक्षिण एशिया में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान तेजी से आगे बढ़ रहा है और भारत को पीछे छोड़ सकता है। लेकिन जब आंकड़ों, नीतियों और उपयोग के स्तर को ध्यान से देखा जाए, तो तस्वीर उतनी सीधी नहीं दिखती।
पाकिस्तान का रुख: प्रतिबंध से नियमन की ओर
पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में क्रिप्टो को लेकर अपना रुख बदला है। पहले जहां बैंकिंग सिस्टम में क्रिप्टो से जुड़े लेनदेन पर लगभग प्रतिबंध था, वहीं अब सरकार ने इसे रेगुलेट करने की दिशा में कदम उठाए हैं। Virtual Assets Act 2026 और एक नए नियामक प्राधिकरण के गठन के साथ देश ने स्पष्ट नीति बनाने की कोशिश की है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में पहले से ही लगभग 2 से 2.7 करोड़ क्रिप्टो यूजर्स हैं और 2025 में करीब 25 अरब डॉलर का लेनदेन हुआ।
यह दिखाता है कि मांग पहले से मौजूद थी, जो मुख्य रूप से महंगाई से बचाव, विदेश से पैसा भेजने और वित्तीय पहुंच बढ़ाने जैसी जरूरतों से प्रेरित थी।
वैश्विक निवेश आकर्षित करने की कोशिश
पाकिस्तान अब खुद को एक क्रिप्टो हब के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और विशेषज्ञों के साथ साझेदारी की जा रही है। साथ ही, बिटकॉइन माइनिंग और एआई डेटा सेंटर के लिए 2000 मेगावाट बिजली आवंटित करने जैसी योजनाएं भी सामने आई हैं।
सरकार की रणनीति यह है कि स्पष्ट नियमों और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए विदेशी निवेश को आकर्षित किया जाए। इससे रोजगार और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
भारत की स्थिति: सावधानी के साथ आगे बढ़ना
दूसरी तरफ भारत का रुख ज्यादा सतर्क है। यहां क्रिप्टो पर 30% टैक्स और 1% TDS (टीडीएस) लागू है, लेकिन अभी तक कोई व्यापक नियामक ढांचा नहीं है।
इसके बावजूद, भारत क्रिप्टो अपनाने के मामले में दुनिया में शीर्ष पर बना हुआ है। 2025 के ग्लोबल क्रिप्टो एडॉप्शन इंडेक्स में भारत पहले स्थान पर रहा, जबकि पाकिस्तान भी शीर्ष देशों में शामिल है।
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भारत की ताकत उसकी बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था, मजबूत फिनटेक सिस्टम और व्यापक यूजर बेस है। UPI जैसे प्लेटफॉर्म और तेजी से बढ़ता Web3 इकोसिस्टम इस क्षेत्र में देश को मजबूती देते हैं।
क्या सच में पाकिस्तान आगे निकल रहा है?
पहली नजर में पाकिस्तान की आक्रामक नीतियां उसे तेजी से आगे बढ़ता दिखाती हैं। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल नीतिगत बदलाव से ही बढ़त तय नहीं होती।
भारत अभी भी उपयोग, डेवलपर इकोसिस्टम और कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में काफी आगे है।
वहीं पाकिस्तान में नीतिगत स्पष्टता बढ़ रही है, लेकिन वहां अभी भी कानूनी स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं मानी जाती।
इसलिए यह कहना कि पाकिस्तान भारत को पीछे छोड़ चुका है, फिलहाल सही नहीं है। दोनों देश अलग-अलग रणनीतियों के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
निष्कर्ष
दक्षिण एशिया में क्रिप्टो की दौड़ तेज हो रही है। पाकिस्तान तेजी से नियमन और निवेश पर फोकस कर रहा है, जबकि भारत बड़े यूजर बेस और मजबूत टेक इकोसिस्टम के दम पर आगे बना हुआ है।
आने वाले वर्षों में यह मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है, लेकिन अभी के आंकड़े बताते हैं कि भारत की बढ़त बरकरार है, भले ही पाकिस्तान तेजी से दूरी कम कर रहा हो।
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