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लेखक: Pratik Bhuyanस्टाफ संपादक
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2026 में बढ़ेगा क्रिप्टो हैक का खतरा, phishing और deepfake सबसे बड़ी चुनौती

CertiK की रिपोर्ट में चेतावनी, 2026 में फिशिंग, डीपफेक और सप्लाई चेन हमले बनेंगे सबसे बड़े क्रिप्टो हैक का कारण।

2026 में बढ़ेगा क्रिप्टो हैक का खतरा, phishing और deepfake सबसे बड़ी चुनौती
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क्रिप्टो बाजार के लिए 2026 सुरक्षा के लिहाज से चुनौतीपूर्ण साल हो सकता है। ब्लॉकचेन सुरक्षा कंपनी CertiK की नई रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में फिशिंग, डीपफेक और सप्लाई चेन जैसे हमले बड़े साइबर हमलों की मुख्य वजह बन सकते हैं।

रिपोर्ट बताती है कि अब हैकर्स केवल तकनीकी खामियों का फायदा नहीं उठा रहे, बल्कि लोगों को निशाना बनाकर और नई तकनीकों का इस्तेमाल कर हमले कर रहे हैं।

फिशिंग बना सबसे बड़ा खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, फिशिंग यानी धोखे से जानकारी हासिल करना अभी भी सबसे खतरनाक तरीका बना हुआ है। 2026 की शुरुआत में ही ऐसे हमलों से सैकड़ों मिलियन डॉलर का नुकसान हो चुका है।

फिशिंग अब पहले जैसा साधारण नहीं रहा। हैकर्स अब नकली वेबसाइट, ईमेल और मैसेज के जरिए लोगों को भरोसा दिलाकर उनकी निजी जानकारी हासिल कर लेते हैं। कई मामलों में ये हमले इतने असली लगते हैं कि पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एक ही बड़े फिशिंग हमले से सैकड़ों मिलियन डॉलर तक की चोरी हो सकती है, जिससे यह तरीका सबसे प्रभावी बन गया है।

डीपफेक से बढ़ा नया खतरा

रिपोर्ट में डीपफेक को भी बड़ा खतरा बताया गया है। डीपफेक तकनीक की मदद से हैकर्स किसी व्यक्ति की आवाज या चेहरा कॉपी कर सकते हैं। अब हमलावर कंपनियों के अधिकारियों या टीम के सदस्यों की नकली पहचान बनाकर लोगों को धोखा दे रहे हैं।

इससे निवेशकों और कर्मचारियों को यह लग सकता है कि वे किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात कर रहे हैं, जबकि असल में वह हैकर होता है। इस तरह के हमले खास तौर पर बड़े लेनदेन के समय ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं।

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सप्लाई चेन हमले क्यों खतरनाक

CertiK की रिपोर्ट में सप्लाई चेन हमलों को भी गंभीर खतरे के रूप में बताया गया है। इसमें हैकर्स सीधे किसी प्लेटफॉर्म पर हमला करने के बजाय उसके इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर या टूल को निशाना बनाते हैं।

अगर किसी लोकप्रिय लाइब्रेरी या सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर दी जाए, तो एक साथ हजारों प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि इस तरह के हमले ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इसके अलावा, क्रॉस चेन सिस्टम में कमजोरियां भी खतरे को बढ़ा रही हैं। अलग अलग ब्लॉकचेन को जोड़ने वाले सिस्टम पर हमला होने से बड़े स्तर पर नुकसान हो सकता है।

पहले ही हो चुका है बड़ा नुकसान

रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में अब तक क्रिप्टो सेक्टर में $600 मिलियन से ज्यादा का नुकसान हो चुका है कुछ बड़े मामलों में Kelp DAO और Drift Protocol जैसे हमले शामिल हैं, जिनमें सैकड़ों मिलियन डॉलर की चोरी हुई।

डेटा यह भी दिखाता है कि अब हमले ज्यादा संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत हो गए हैं। कई मामलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे हमले और ज्यादा सटीक हो रहे हैं।

क्या करना होगा आगे

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल तकनीकी सुरक्षा अब काफी नहीं है। कंपनियों और उपयोगकर्ताओं दोनों को सतर्क रहना होगा।

  • किसी भी लिंक या संदेश पर भरोसा करने से पहले जांच जरूरी है

  • निजी जानकारी और प्राइवेट की को सुरक्षित रखना सबसे अहम है

  • बड़े लेनदेन में अतिरिक्त पुष्टि का इस्तेमाल करना चाहिए

इसके साथ ही, कंपनियों को अपने सिस्टम और सॉफ्टवेयर सप्लाई चेन की नियमित जांच करनी होगी।

बदलते खतरे, बदलती रणनीति

रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है कि क्रिप्टो सुरक्षा का खतरा अब बदल रहा है। पहले जहां स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट की खामियां मुख्य वजह थीं, वहीं अब मानव व्यवहार और नई तकनीकें बड़ी भूमिका निभा रही हैं।

अगर समय रहते इन खतरों को समझकर तैयारी नहीं की गई, तो आने वाले समय में नुकसान और बढ़ सकता है।

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