
8 साल पुराने ₹113 करोड़ के क्रिप्टो घोटाले में ED की छापेमारी, जांच तेज
2018 में सामने आए Money Trade Coin घोटाले में आठ साल बाद ED ने कार्रवाई तेज की। मुंबई और ठाणे में छापेमारी, ₹1 करोड़ नकद बरामद और ₹113 करोड़ की कथित धोखाधड़ी की जांच।

भारत में सामने आए पुराने क्रिप्टो निवेश घोटाले में करीब आठ साल बाद बड़ी कार्रवाई हुई है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने Money Trade Coin मामले में मुंबई और ठाणे के कई ठिकानों पर तलाशी ली है। जांच एजेंसी ने करीब 1 करोड़ रुपये नकद और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा अन्य सामग्री बरामद करने की जानकारी दी है।
यह मामला वर्ष 2018 में सामने आया था, जब एक जांच में Money Trade Coin यानी MTC नाम की एक अपंजीकृत क्रिप्टोकरेंसी के जरिए निवेशकों को असाधारण रिटर्न का लालच दिए जाने का खुलासा हुआ था। ED के अनुसार, अगस्त 2017 से अप्रैल 2018 के बीच इस कथित योजना से निवेशकों को करीब 113.10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
मामले में अमित मदनलाल लखनपाल, ताहा हाफिज काजी, सचिन वसंत शेलार, कोमल भीमराव शिरसाठ और अन्य लोगों के खिलाफ जांच चल रही है।
2018 में कैसे सामने आया था मामला?
Money Trade Coin का मामला तब चर्चा में आया जब जांच में सामने आया कि निवेशकों को बहुत कम समय में कई गुना रिटर्न का भरोसा दिलाया जा रहा था। 2018 में एक गुप्त जांच के दौरान कंपनी से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर चार से छह महीने में निवेश को 10 से 20 गुना तक बढ़ाने का दावा किया था।
निवेशकों को यह भी बताया गया कि MTC को सरकार से मान्यता मिल सकती है और कुछ विदेशी देशों में इसे कानूनी मुद्रा का दर्जा मिलने की संभावना है। इस तरह के दावों के जरिए क्रिप्टोकरेंसी को भरोसेमंद निवेश विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश की गई।
जांच सामने आने के बाद ठाणे पुलिस ने जून 2018 में मामला दर्ज किया था। उस समय पुलिस ने कंपनी और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोपों की जांच शुरू की थी।
ED को जांच में क्या मिला?
ED ने अब मामले को धन शोधन के नजरिए से आगे बढ़ाया है। एजेंसी के अनुसार, MTC से जुड़े लोगों ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए दिल्ली, पुणे और नासिक जैसे शहरों में सेमिनार आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में लखनपाल पर खुद को वित्त मंत्रालय से जुड़ा अधिकारी बताने का आरोप है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, बाद में MTC से जुड़े कई मंच और योजनाएं शुरू की गईं। इनमें Coin Deposit Ratio, MTC Banque, MTCX India और Cryptozaniya जैसे नाम शामिल हैं। आरोप है कि इन मंचों के जरिए MTC की कीमत को कृत्रिम तरीके से प्रभावित किया गया।
ED का कहना है कि बाद में कारोबार और निकासी की सुविधाएं रोक दी गईं। इससे निवेशक अपनी रकम और कथित मुनाफा वापस नहीं निकाल सके। इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े धन के प्रवाह की जांच अब PMLA के तहत की जा रही है।
क्या आप जानते हैं: भारत एशिया का सबसे कम पसंदीदा शेयर बाजार, क्या Bitcoin और सोने की ओर बढ़ेगा पैसा?
मुख्य आरोपी के विदेश भागने का भी आरोप
जांच में सामने आया है कि मामले के कथित मुख्य आरोपी अमित लखनपाल और उसके सहयोगियों ने बाद में भारत छोड़ दिया। ED के अनुसार, आरोपियों ने एंटीगुआ और बारबुडा के पासपोर्ट हासिल किए और लखनपाल के दुबई में एक कथित फर्जी पहचान के साथ रहने की जानकारी मिली है।
यही वजह है कि जांच एजेंसी अब केवल भारत में मौजूद संपत्तियों और धन तक सीमित नहीं रहना चाहती। विदेश में मौजूद संभावित संपत्तियों और धन के स्रोत की भी जांच की जा सकती है।
तलाशी के दौरान बरामद करीब 1 करोड़ रुपये नकद और अन्य सामग्री को जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अंतिम जिम्मेदारी अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।
क्रिप्टो निवेशकों के लिए क्या है सबक?
Money Trade Coin मामला यह दिखाता है कि क्रिप्टो बाजार में बड़े रिटर्न का वादा हमेशा वास्तविक निवेश अवसर नहीं होता। खासकर जब कोई परियोजना सरकारी मान्यता, निश्चित मुनाफे या बहुत कम समय में कई गुना रिटर्न का दावा करे, तो निवेशकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
इस मामले में भी निवेशकों को कथित तौर पर बड़े रिटर्न और सरकारी मान्यता के वादों के जरिए आकर्षित किया गया था। बाद में निकासी बंद होने से उनके पैसे फंस गए।
आठ साल बाद ED की कार्रवाई यह भी बताती है कि पुराने क्रिप्टो मामलों में जांच खत्म नहीं हुई है। ब्लॉकचेन और वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड के आधार पर एजेंसियां पुराने धन प्रवाह को भी दोबारा खंगाल सकती हैं। आने वाले समय में जांच का दायरा बढ़ने और मामले से जुड़े अन्य लोगों तथा संपत्तियों पर कार्रवाई होने की संभावना बनी हुई है।
ऐसी ही और ख़बरों और क्रिप्टो विश्लेषण के लिए हमें X और LinkedIn पर फ़ॉलो करें, ताकि कोई भी अपडेट आपसे न छूटे!

