
भारत एशिया का सबसे कम पसंदीदा शेयर बाजार, क्या Bitcoin और सोने की ओर बढ़ेगा पैसा?
Bank of America के सर्वे में भारत एशिया का सबसे कम पसंदीदा शेयर बाजार बना। जानिए विदेशी निवेशकों की बदलती राय और Bitcoin, सोना व रुपये पर इसका असर।

भारत के शेयर बाजार को लेकर विदेशी निवेशकों की धारणा में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Bank of America के अगस्त सर्वे में भारत एशिया का सबसे कम पसंदीदा शेयर बाजार बन गया है। सर्वे में शामिल 32 प्रतिशत फंड प्रबंधकों ने भारतीय शेयरों में अपने निवेश को कम रखने की बात कही है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि यदि विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से दूरी बढ़ाते हैं, तो उनकी पूंजी आखिर कहां जा सकती है।
हालांकि मौजूदा आंकड़े यह साबित नहीं करते कि भारतीय शेयरों से निकलने वाला पैसा सीधे Bitcoin या सोने में जा रहा है। इसके बजाय तस्वीर यह है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है, जबकि घरेलू निवेशक और भारतीय कंपनियों के मजबूत नतीजे बाजार को सहारा दे रहे हैं।
Bank of America के सर्वे में 7 से 13 अगस्त के बीच 98 फंड प्रबंधकों से राय ली गई, जो कुल 272 अरब डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन करते हैं। भारत के मुकाबले ताइवान, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजार निवेशकों को ज्यादा पसंद आए।
विदेशी निवेशकों का भारत से भरोसा क्यों घटा?
सर्वे में भारत को लेकर कई चिंताएं सामने आई हैं। इनमें ऊंचा मूल्यांकन, आर्थिक वृद्धि को लेकर अपेक्षाएं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी निवेश लहर में भारत की सीमित हिस्सेदारी और सुधारों की धीमी गति प्रमुख कारण हैं।
यह बदलाव खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मई 2025 में भारत एशिया का सबसे पसंदीदा शेयर बाजार था। उस समय सर्वे में 42 प्रतिशत निवेशक भारतीय शेयरों में अधिक निवेश के पक्ष में थे। अब यह आंकड़ा उलटकर 32 प्रतिशत निवेशकों के कम निवेश वाले रुख में बदल गया है।
फिर भी इसे भारतीय बाजार से विदेशी पूंजी की पूरी तरह वापसी नहीं माना जा सकता। चालू तिमाही में वैश्विक निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 4 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। जून तिमाही में Nifty 50 कंपनियों का मुनाफा भी सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़ा, जो पिछले 10 तिमाहियों में सबसे मजबूत वृद्धि रही।
घरेलू निवेशकों ने संभाला बाजार
विदेशी निवेशकों की सतर्कता के बीच घरेलू निवेशक भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ी ताकत बने हुए हैं। जुलाई में भारतीय इक्विटी म्यूचुअल फंडों में करीब 24,697 करोड़ रुपये का निवेश आया। इसके साथ लगातार 65वें महीने घरेलू फंडों में शुद्ध निवेश दर्ज किया गया।
इससे साफ है कि विदेशी निवेशकों का कमजोर रुख अभी तक भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पूंजी निकलने में नहीं बदला है। घरेलू बचत, म्यूचुअल फंड निवेश और कंपनियों के बेहतर नतीजे बाजार को सहारा दे रहे हैं।
इसके बावजूद Nifty 50 पर दबाव बना हुआ है। 19 अगस्त को सूचकांक 24,078.30 पर बंद हुआ और लगातार सातवें कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। 2026 में अब तक Nifty करीब 8 प्रतिशत नीचे है।
क्या Bitcoin और सोना बन सकते हैं विकल्प?
शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की घटती दिलचस्पी के बीच सोना और Bitcoin स्वाभाविक रूप से चर्चा में आ गए हैं। सोने की कीमत करीब 4,370 डॉलर प्रति औंस के आसपास थी, जबकि Bitcoin करीब 64,460 डॉलर पर कारोबार कर रहा था।
सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, जबकि Bitcoin को अधिक जोखिम वाली परिसंपत्ति माना जाता है। इसलिए शेयर बाजार में कमजोरी आने पर दोनों की भूमिका एक जैसी नहीं हो सकती।
Bitcoin के मामले में अभी ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि भारत के शेयर बाजार से निकलने वाली विदेशी पूंजी सीधे Bitcoin में जा रही है। केवल निवेशकों का रुख बदलना इस बात का संकेत नहीं है कि पैसा तुरंत क्रिप्टो बाजार में शिफ्ट हो रहा है।
रुपये की कमजोरी भी बदल रही है तस्वीर
भारतीय निवेशकों के लिए एक और महत्वपूर्ण कारक रुपये की चाल है। 19 अगस्त को डॉलर के मुकाबले रुपया 95.7525 के स्तर पर बंद हुआ, जो जुलाई के अंत के बाद सबसे कमजोर स्तर था। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कंपनियों की डॉलर मांग ने रुपये पर दबाव बढ़ाया।
रुपये की कमजोरी का असर Bitcoin समेत सभी डॉलर आधारित परिसंपत्तियों पर पड़ता है। अगर Bitcoin की डॉलर कीमत स्थिर भी रहे, तब भी कमजोर रुपया भारतीय निवेशक के लिए उसकी रुपये वाली कीमत बढ़ा सकता है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के प्रति विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन बड़े पैमाने पर पूंजी पलायन अभी दिखाई नहीं दे रहा।
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भारत के शेयर बाजार को लेकर विदेशी निवेशकों की धारणा में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Bank of America के अगस्त सर्वे में भारत एशिया का सबसे कम पसंदीदा शेयर बाजार बन गया है। सर्वे में शामिल 32 प्रतिशत फंड प्रबंधकों ने भारतीय शेयरों में अपने निवेश को कम रखने की बात कही है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि यदि विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से दूरी बढ़ाते हैं, तो उनकी पूंजी आखिर कहां जा सकती है।
हालांकि मौजूदा आंकड़े यह साबित नहीं करते कि भारतीय शेयरों से निकलने वाला पैसा सीधे Bitcoin या सोने में जा रहा है। इसके बजाय तस्वीर यह है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है, जबकि घरेलू निवेशक और भारतीय कंपनियों के मजबूत नतीजे बाजार को सहारा दे रहे हैं।
Bank of America के सर्वे में 7 से 13 अगस्त के बीच 98 फंड प्रबंधकों से राय ली गई, जो कुल 272 अरब डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन करते हैं। भारत के मुकाबले ताइवान, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजार निवेशकों को ज्यादा पसंद आए।
विदेशी निवेशकों का भारत से भरोसा क्यों घटा?
सर्वे में भारत को लेकर कई चिंताएं सामने आई हैं। इनमें ऊंचा मूल्यांकन, आर्थिक वृद्धि को लेकर अपेक्षाएं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी निवेश लहर में भारत की सीमित हिस्सेदारी और सुधारों की धीमी गति प्रमुख कारण हैं।
यह बदलाव खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मई 2025 में भारत एशिया का सबसे पसंदीदा शेयर बाजार था। उस समय सर्वे में 42 प्रतिशत निवेशक भारतीय शेयरों में अधिक निवेश के पक्ष में थे। अब यह आंकड़ा उलटकर 32 प्रतिशत निवेशकों के कम निवेश वाले रुख में बदल गया है। यानी विदेशी निवेशकों की स्थिति में 74 प्रतिशत अंकों का बड़ा बदलाव आया है।
फिर भी इसे भारतीय बाजार से विदेशी पूंजी की पूरी तरह वापसी नहीं माना जा सकता। चालू तिमाही में वैश्विक निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 4 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। जून तिमाही में Nifty 50 कंपनियों का मुनाफा भी सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़ा, जो पिछले 10 तिमाहियों में सबसे मजबूत वृद्धि रही।
घरेलू निवेशकों ने संभाला बाजार
विदेशी निवेशकों की सतर्कता के बीच घरेलू निवेशक भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ी ताकत बने हुए हैं। जुलाई में भारतीय इक्विटी म्यूचुअल फंडों में करीब 24,697 करोड़ रुपये का निवेश आया। इसके साथ लगातार 65वें महीने घरेलू फंडों में शुद्ध निवेश दर्ज किया गया।
इससे साफ है कि विदेशी निवेशकों का कमजोर रुख अभी तक भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पूंजी निकलने में नहीं बदला है। घरेलू बचत, म्यूचुअल फंड निवेश और कंपनियों के बेहतर नतीजे बाजार को सहारा दे रहे हैं।
इसके बावजूद Nifty 50 पर दबाव बना हुआ है। 19 अगस्त को सूचकांक 24,078.30 पर बंद हुआ और लगातार सातवें कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। 2026 में अब तक Nifty करीब 8 प्रतिशत नीचे है, जिससे यह एशिया के प्रमुख बाजारों में कमजोर प्रदर्शन करने वाले बाजारों में शामिल हो गया है।
क्या Bitcoin और सोना बन सकते हैं विकल्प?
शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की घटती दिलचस्पी के बीच सोना और Bitcoin स्वाभाविक रूप से चर्चा में आ गए हैं। सोने की कीमत करीब 4,370 डॉलर प्रति औंस के आसपास थी, जबकि Bitcoin करीब 64,460 डॉलर पर कारोबार कर रहा था। भारतीय मुद्रा में Bitcoin की कीमत लगभग 61.7 लाख रुपये बैठती है, हालांकि वास्तविक कीमत एक्सचेंज, शुल्क और विनिमय दर के अनुसार अलग हो सकती है।
सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, जबकि Bitcoin को अधिक जोखिम वाली परिसंपत्ति माना जाता है। इसलिए शेयर बाजार में कमजोरी आने पर दोनों की भूमिका एक जैसी नहीं हो सकती।
Bitcoin के मामले में अभी ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि भारत के शेयर बाजार से निकलने वाली विदेशी पूंजी सीधे Bitcoin में जा रही है। इसके लिए Bitcoin में भारतीय निवेश के वास्तविक प्रवाह में लगातार बढ़ोतरी दिखनी जरूरी होगी। केवल विदेशी फंडों का भारतीय शेयरों से दूरी बनाना इस बात का सबूत नहीं है।
रुपये की कमजोरी भी बदल रही है तस्वीर
भारतीय निवेशकों के लिए एक और महत्वपूर्ण कारक रुपये की चाल है। 19 अगस्त को डॉलर के मुकाबले रुपया 95.7525 के स्तर पर बंद हुआ, जो जुलाई के अंत के बाद सबसे कमजोर स्तर था। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कंपनियों की डॉलर मांग ने रुपये पर दबाव बढ़ाया। रिपोर्ट के अनुसार RBI ने 96 रुपये प्रति डॉलर के आसपास हस्तक्षेप भी किया।
रुपये की कमजोरी का असर Bitcoin समेत सभी डॉलर आधारित परिसंपत्तियों पर पड़ता है। अगर Bitcoin की डॉलर कीमत स्थिर भी रहे, तब भी कमजोर रुपया भारतीय निवेशक के लिए उसकी रुपये वाली कीमत बढ़ा सकता है। यही बात सोने और अन्य डॉलर आधारित निवेशों पर भी लागू होती है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के प्रति विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन बड़े पैमाने पर पूंजी पलायन अभी दिखाई नहीं दे रहा। यदि शेयर बाजार में कमजोरी आगे भी जारी रहती है, रुपया दबाव में रहता है और सोने तथा Bitcoin में निवेश बढ़ता है, तभी वास्तविक पूंजी बदलाव के संकेत स्पष्ट होंगे। अभी के लिए भारत की कहानी विदेशी सतर्कता और मजबूत घरेलू निवेश के बीच संतुलन की है।
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