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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

₹226 करोड़ के कथित क्रिप्टो नेटवर्क पर बड़ा शिकंजा, Binance की मदद से जांच में मिली अहम सफलता

ताजा खबरेंप्रकाशित5 अग॰ 2026

Binance ने गुजरात पुलिस की ₹226 करोड़ के कथित क्रिप्टो नेटवर्क की जांच में सहयोग किया। जानिए ब्लॉकचेन विश्लेषण से 14 गिरफ्तारियां कैसे हुईं और इस मामले का भारत के क्रिप्टो उद्योग पर क्या असर पड़ सकता है।

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भारत में क्रिप्टो से जुड़े वित्तीय अपराधों के खिलाफ कार्रवाई एक नए चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंजों में से एक Binance ने पुष्टि की है कि उसने गुजरात पुलिस की उस जांच में तकनीकी सहयोग दिया, जिसमें लगभग ₹226.54 करोड़ के कथित अवैध क्रिप्टो लेनदेन का पता लगाया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस नेटवर्क का संबंध साइबर अपराध, संगठित वित्तीय गतिविधियों और कथित आतंकी फंडिंग से होने की आशंका की जांच की जा रही है।

Binance के अनुसार, उसने जांच एजेंसियों को ब्लॉकचेन विश्लेषण, संदिग्ध वॉलेट के लेनदेन का पता लगाने और कानूनी प्रक्रिया के तहत आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई। कंपनी ने यह भी कहा कि जहां आवश्यक था, वहां संबंधित खातों पर उचित कार्रवाई की गई।

चार महीने की जांच के बाद सामने आया नेटवर्क

गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCoE) ने इस मामले की जांच कई महीनों तक की। शुरुआती जांच के दौरान अधिकारियों को एक भारतीय इंटरनेट पते से जुड़े क्रिप्टो लेनदेन का पता चला, जिसका संबंध कथित रूप से डार्क वेब पर संचालित अवैध गतिविधियों से था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और कई राज्यों तक पहुंचने वाले डिजिटल नेटवर्क की पहचान की गई।

ताजा जानकारी के अनुसार, इस मामले में अब तक 14 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। Binance ने भी अपने बयान में 14 गिरफ्तारियों का उल्लेख किया है। जांच एजेंसियां अब भी इस नेटवर्क से जुड़े विदेशी संपर्कों और धन के प्रवाह की पड़ताल कर रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी नई गिरफ्तारियां या अन्य कार्रवाई हो सकती है।

Binance ने क्या मदद की?

Binance का कहना है कि उसने केवल वैध कानूनी अनुरोध मिलने पर ही सहयोग किया। कंपनी के अनुसार, उसकी भूमिका तीन प्रमुख हिस्सों तक सीमित रही।

पहला, संदिग्ध वॉलेट से जुड़े लेनदेन का ब्लॉकचेन विश्लेषण। दूसरा, विभिन्न डिजिटल पतों के बीच धन के प्रवाह का पता लगाने में सहायता। तीसरा, जहां जरूरी था वहां संबंधित खातों पर कार्रवाई करना।

Binance एशिया प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख एसबी सेकर ने कहा कि सार्वजनिक ब्लॉकचेन पर दर्ज लेनदेन का रिकॉर्ड जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उनके अनुसार, जब डिजिटल गतिविधियों को वास्तविक व्यक्तियों और घटनाओं से जोड़ा जाता है, तब वित्तीय अपराधों का पता लगाना पहले की तुलना में आसान हो जाता है।

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ब्लॉकचेन विश्लेषण क्यों बन रहा है अहम हथियार?

क्रिप्टो लेनदेन को अक्सर पूरी तरह गुप्त समझा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश सार्वजनिक ब्लॉकचेन पर हर लेनदेन स्थायी रूप से दर्ज होता है। यदि जांच एजेंसियों के पास सही तकनीकी उपकरण और पर्याप्त जानकारी हो, तो धन के प्रवाह को ट्रैक किया जा सकता है।

इसी कारण दुनिया भर की पुलिस और वित्तीय जांच एजेंसियां अब ब्लॉकचेन विश्लेषण तकनीकों का अधिक उपयोग कर रही हैं। भारत में भी पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराध, धन शोधन और संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े मामलों में डिजिटल विश्लेषण की भूमिका बढ़ी है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि क्रिप्टो तकनीक स्वयं अवैध नहीं है। इसका उपयोग वैध निवेश, भुगतान और वित्तीय सेवाओं के लिए भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। चुनौती उन मामलों की पहचान करना है जहां इसका कथित दुरुपयोग किया जाता है।

भारतीय क्रिप्टो उद्योग के लिए क्या संकेत?

इस मामले ने एक बार फिर दिखाया है कि भारत में क्रिप्टो से जुड़े मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियां और वैश्विक एक्सचेंज अब पहले की तुलना में अधिक सहयोग कर रहे हैं। Binance पहले ही भारत की वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) के साथ पंजीकृत रिपोर्टिंग इकाई के रूप में काम कर रहा है और नियामकीय अनुपालन पर जोर दे रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में क्रिप्टो प्लेटफॉर्मों से ग्राहक पहचान, लेनदेन की निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्टिंग को लेकर अपेक्षाएं और सख्त हो सकती हैं।

फिलहाल ₹226 करोड़ के इस कथित नेटवर्क की जांच जारी है। लेकिन इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ब्लॉकचेन तकनीक केवल डिजिटल परिसंपत्तियों का आधार नहीं है, बल्कि वित्तीय अपराधों की जांच में भी एक महत्वपूर्ण उपकरण बनती जा रही है। आने वाले समय में भारत में क्रिप्टो उद्योग के लिए अनुपालन और पारदर्शिता की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।

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