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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

Karnataka Crypto Case: Sriki और Robin को जमानत से इनकार, PMLA कोर्ट का बड़ा फैसला

ताजा खबरेंप्रकाशित29 अग॰ 2026

कर्नाटक के चर्चित क्रिप्टो मामले में बेंगलुरु की PMLA अदालत ने कथित हैकर Sriki और Robin Khandelwal की जमानत खारिज कर दी। ED ने 3,500 पन्नों की शिकायत दाखिल की है।

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कर्नाटक के चर्चित क्रिप्टो और साइबर अपराध मामले में कथित हैकर Srikrishna Ramesh उर्फ Sriki और उसके कथित वित्तीय सहयोगी Robin Khandelwal को जमानत नहीं मिल पाई है। बेंगलुरु की विशेष PMLA अदालत ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने दोनों को मई 2026 में गिरफ्तार किया था और फिलहाल वे बेंगलुरु सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला कथित तौर पर हैकिंग, डार्कनेट गतिविधियों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए अपराध से हासिल रकम को छिपाने से जुड़ा है।

ED ने इस मामले में जुलाई 2026 में करीब 3,500 पन्नों की अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। इसमें Sriki, Khandelwal और कारोबारी Sunish Hegde के अलावा एक निजी कंपनी और दो अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में चोरी की डिजिटल संपत्तियों को अलग-अलग माध्यमों से घुमाकर उनका स्रोत छिपाने की कोशिश की गई।

कोर्ट ने जमानत क्यों नहीं दी?

Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, ED के विशेष लोक अभियोजक Madhu N Rao ने दोनों की रिहाई का कड़ा विरोध किया। जांच एजेंसी ने अदालत के सामने कथित तौर पर कई करोड़ रुपये के क्रिप्टो लेनदेन और उससे जुड़े नेटवर्क की जानकारी रखी। अदालत ने ED की ओर से जमा किए गए सबूतों की समीक्षा के बाद दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में अदालत को यह देखना होता है कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री मौजूद है या नहीं। इस मामले में जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और ED पहले ही विस्तृत अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है। ऐसे में अदालत ने फिलहाल आरोपियों को हिरासत से बाहर करने की मांग स्वीकार नहीं की।

दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जमानत खारिज होने के बाद उन्हें मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा।

3,500 पन्नों की जांच में क्या सामने आया?

ED की 3,500 पन्नों की शिकायत इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। एजेंसी के अनुसार, Sriki ने कथित तौर पर क्रिप्टो एक्सचेंज, ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और दूसरे कंप्यूटर सर्वरों को निशाना बनाया। जांच में कर्नाटक सरकार के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल की 2019 की हैकिंग का भी जिक्र है, जिसमें करीब ₹11.5 करोड़ की रकम चोरी होने का आरोप है।

ED के मुताबिक, Sriki पर Unocoin क्रिप्टो एक्सचेंज और कई ऑनलाइन पोकर प्लेटफॉर्म को हैक करने का भी आरोप है। एजेंसी का दावा है कि इन गतिविधियों से हासिल डिजिटल संपत्तियों को बाद में अलग-अलग क्रिप्टो मंचों और खातों के जरिए घुमाया गया।

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जांच में Robin Khandelwal की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है। ED के अनुसार, वह क्रिप्टो कारोबारी था और कथित तौर पर चोरी की डिजिटल संपत्तियों को अलग-अलग मंचों के जरिए बदलने और आगे भेजने में मदद करता था। एजेंसी ने उसे इस कथित नेटवर्क का वित्तीय माध्यम बताया है।

2017 के Bitcoin मामले से जुड़ा पुराना इतिहास

यह मामला केवल हाल की ED कार्रवाई तक सीमित नहीं है। Sriki और Khandelwal के नाम 2017 में हुए Unocoin Bitcoin चोरी मामले में भी सामने आए थे। उस मामले में Tumakuru स्थित क्रिप्टो एक्सचेंज से 60.6 Bitcoin चोरी होने का आरोप था। उस समय इनकी कीमत ₹1 करोड़ से कुछ अधिक बताई गई थी।

2024 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने दोनों के खिलाफ Karnataka Control of Organised Crime Act यानी KCOCA लगाने की अनुमति को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि इस कानून के तहत कार्रवाई के लिए जरूरी कानूनी शर्तें पूरी नहीं हुई थीं। इसके बाद दोनों को उस मामले में जमानत भी मिली थी।

हालांकि, मौजूदा ED मामला PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से जुड़ा है और इसमें एजेंसी ने पुराने तथा नए आरोपों से संबंधित वित्तीय गतिविधियों को जोड़कर जांच की है।

क्रिप्टो अपराध पर एजेंसियों की बढ़ती नजर

कर्नाटक का यह मामला दिखाता है कि भारतीय जांच एजेंसियां अब क्रिप्टोकरेंसी को साइबर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में पहले से ज्यादा गंभीरता से देख रही हैं। ED ने मई में Sriki, Khandelwal और Sunish Hegde को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जुलाई में विस्तृत अभियोजन शिकायत दाखिल की गई।

जांच एजेंसी का आरोप है कि कथित नेटवर्क में हैकिंग से लेकर डिजिटल संपत्तियों को अलग-अलग रास्तों से घुमाने तक कई स्तर शामिल थे। ऐसे मामलों में क्रिप्टो लेनदेन की डिजिटल छाप जांच एजेंसियों को पैसों की आवाजाही का पता लगाने में मदद कर सकती है, लेकिन कई देशों और अलग-अलग मंचों से जुड़े लेनदेन की जांच जटिल भी हो सकती है।

फिलहाल अदालत द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। यह फैसला आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं है। Sriki और Khandelwal के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में होने वाली आगे की कार्यवाही और सबूतों के मूल्यांकन के बाद ही होगा।

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