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Jai Singla द्वारा लिखित ⁠, Staff Editor.Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षित ⁠, Staff Editor.

जापान क्रिप्टो ETF और Yen स्टेबलकॉइन की ओर बढ़ा, भारत कब उठाएगा अगला कदम?

ताजा खबरेंप्रकाशितJun 3, 2026

जापान की सत्तारूढ़ पार्टी ने क्रिप्टो ETFs और Yen आधारित स्टेबलकॉइन्स को बढ़ावा देने का प्रस्ताव दिया है। जानिए इस कदम का वैश्विक क्रिप्टो बाजार पर क्या असर पड़ सकता है और भारत कब इस दिशा में कदम उठा सकता है।

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जापान एक बार फिर डिजिटल एसेट्स और ब्लॉकचेन सेक्टर में अपनी स्थिति मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। देश की सत्तारूढ़ Liberal Democratic Party (LDP) के एक प्रमुख नीति समूह ने सरकार से क्रिप्टो Exchange-Traded Funds (ETFs) के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने और Yen आधारित स्टेबलकॉइन्स को बढ़ावा देने की सिफारिश की है।

यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया के कई बड़े वित्तीय बाजार क्रिप्टो निवेश और डिजिटल भुगतान के नए मॉडल अपना रहे हैं। अमेरिका में Bitcoin और Ethereum ETFs को मंजूरी मिलने के बाद हांगकांग समेत कई देशों ने भी इस दिशा में प्रगति की है। अब जापान भी इस दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। इस बीच एक बड़ा सवाल भारत को लेकर भी उठ रहा है कि जब दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं क्रिप्टो ETFs और स्टेबलकॉइन्स पर आगे बढ़ रही हैं, तब भारत इस दिशा में कब ठोस कदम उठाएगा?

सरकार को सौंपी गई नई सिफारिशें

रिपोर्ट के अनुसार LDP के Blockchain Promotion Parliamentary Association ने वित्त मंत्री Satsuki Katayama को एक विस्तृत प्रस्ताव सौंपा है। इसमें क्रिप्टो ETFs, स्टेबलकॉइन्स, ब्लॉकचेन और digital finance से जुड़े कई सुझाव शामिल हैं।

समूह का मानना है कि क्रिप्टो ETFs निवेशकों को क्रिप्टो बाजार में भाग लेने का एक सरल और विनियमित तरीका प्रदान कर सकते हैं। ETF के जरिए निवेशकों को सीधे Bitcoin या अन्य digital assets खरीदने और सुरक्षित रखने की आवश्यकता नहीं होगी।

अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो जापान अमेरिका और हांगकांग जैसे बाजारों की श्रेणी में शामिल हो सकता है जहां क्रिप्टो ETFs पहले से उपलब्ध हैं।

Yen स्टेबलकॉइन पर खास जोर

प्रस्ताव का दूसरा बड़ा हिस्सा Yen आधारित स्टेबलकॉइन्स से जुड़ा है।

LDP के सांसद Junichi Kanda ने कहा कि जापान को एशिया में ऑनचेन फाइनेंस के विस्तार के लिए Yen स्टेबलकॉइन्स के विकास और उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए। उनका मानना है कि इससे क्षेत्रीय भुगतान प्रणाली में जापान की भूमिका मजबूत हो सकती है।

वर्तमान में वैश्विक स्टेबलकॉइन बाजार पर अमेरिकी मुद्रा से जुड़े tokens का दबदबा है। USDT और USDC जैसे स्टेबलकॉइन्स बाजार के अधिकांश हिस्से को नियंत्रित करते हैं। ऐसे में जापान अपनी राष्ट्रीय मुद्रा आधारित डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि Yen स्टेबलकॉइन्स को बढ़ावा देकर जापान सीमा पार भुगतान और व्यापारिक लेनदेन में अपनी मुद्रा की उपयोगिता बढ़ा सकता है।

बदल रहा है जापान का रुख

पिछले कुछ वर्षों में जापान क्रिप्टो विनियमन को लेकर अपेक्षाकृत सतर्क रहा है। हालांकि अब देश का रुख अधिक सकारात्मक दिखाई दे रहा है।

हाल ही में जापानी सरकार ने क्रिप्टो को केवल भुगतान माध्यम के बजाय वित्तीय उत्पाद के रूप में वर्गीकृत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस बदलाव को क्रिप्टो ETFs के लिए रास्ता तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जापान की Financial Services Agency भी ब्लॉकचेन आधारित वित्तीय नवाचारों को प्रोत्साहित करने पर काम कर रही है। देश के बड़े बैंक स्टेबलकॉइन projects पर प्रयोग कर रहे हैं, जबकि कई fintech कंपनियां ब्लॉकचेन आधारित भुगतान समाधान विकसित कर रही हैं।

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भारत के लिए क्या है संदेश?

जापान की यह पहल भारत में भी नई चर्चा को जन्म दे सकती है। भारत दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो उपयोगकर्ता बाजारों में से एक माना जाता है, लेकिन अभी तक देश में क्रिप्टो ETFs को मंजूरी नहीं मिली है और स्टेबलकॉइन्स के लिए भी कोई स्पष्ट नियामकीय ढांचा मौजूद नहीं है।

भारत ने क्रिप्टो लेनदेन पर टैक्स व्यवस्था लागू की है और रिजर्व बैंक अपनी Central Bank Digital Currency (CBDC) परियोजना पर काम कर रहा है। हालांकि उद्योग जगत लंबे समय से व्यापक क्रिप्टो नियमों और निवेश उत्पादों को लेकर स्पष्टता की मांग कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जापान जैसे देश सफलतापूर्वक क्रिप्टो ETFs और स्टेबलकॉइन्स को अपनाते हैं, तो भारत पर भी इस क्षेत्र में नीति निर्माण को तेज करने का दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भारत कब इस दिशा में कदम उठाएगा, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण हो सकता है।

एशिया में बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धा

विश्लेषकों का मानना है कि यदि जापान क्रिप्टो ETFs और Yen स्टेबलकॉइन्स को आगे बढ़ाता है, तो इससे एशिया में डिजिटल वित्तीय प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

सिंगापुर, हांगकांग और दक्षिण कोरिया पहले से ब्लॉकचेन नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं। ऐसे में जापान की नई रणनीति उसे क्षेत्रीय डिजिटल वित्त केंद्र के रूप में मजबूत बना सकती है।

कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि स्टेबलकॉइन्स का बढ़ता उपयोग पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकता है। यही कारण है कि दुनिया भर के नियामक इस क्षेत्र पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?

क्रिप्टो ETFs को मंजूरी मिलने की स्थिति में जापानी निवेशकों के लिए डिजिटल assets में निवेश करना आसान हो सकता है। इससे संस्थागत निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ सकती है।

वहीं Yen स्टेबलकॉइन्स का विस्तार जापान की डिजिटल भुगतान रणनीति को नई दिशा दे सकता है। यदि इनका उपयोग सीमा पार भुगतान और व्यापार में बढ़ता है, तो Yen की वैश्विक उपयोगिता को भी समर्थन मिल सकता है।

भारत के निवेशकों और उद्योग जगत के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण संकेत है कि दुनिया के बड़े वित्तीय केंद्र अब क्रिप्टो को मुख्यधारा के वित्तीय ढांचे में शामिल करने के विकल्प तलाश रहे हैं।

आगे क्या होगा?

फिलहाल यह केवल एक नीति प्रस्ताव है और इसे लागू करने के लिए सरकार तथा नियामक संस्थाओं की मंजूरी आवश्यक होगी। हालांकि जापान के वित्त मंत्री ने संकेत दिया है कि देश को वैश्विक विकास से पीछे नहीं रहना चाहिए।

यही वजह है कि क्रिप्टो बाजार की नजर अब जापान के अगले कदम पर टिकी हुई है। अगर ये प्रस्ताव आगे बढ़ते हैं, तो जापान आने वाले वर्षों में वैश्विक क्रिप्टो और ब्लॉकचेन उद्योग का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।

साथ ही, भारत को लेकर भी बहस तेज हो सकती है कि क्या देश केवल नियामकीय सतर्कता बनाए रखेगा या फिर क्रिप्टो ETFs और स्टेबलकॉइन्स जैसे क्षेत्रों में स्पष्ट नीति बनाकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी जगह मजबूत करेगा।

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