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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

Just In: भारत में क्रिप्टो टैक्स का नियम नहीं बदला, लेकिन अब बढ़ेगी निगरानी

ताजा खबरेंप्रकाशित22 सित॰ 2026

भारत में क्रिप्टो टैक्स के 30% नियम और 1% TDS में बदलाव नहीं हुआ है। जानिए Section 285BAA के तहत नई Crypto Transaction Reporting व्यवस्था का निवेशकों और एक्सचेंजों पर क्या असर होगा।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स व्यवस्था में फिलहाल कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। आयकर विभाग की ओर से जारी ताजा जानकारी में साफ किया गया है कि Virtual Digital Assets यानी VDA से होने वाली आय पर 30% की दर से टैक्स लागू है। इसके साथ ही पात्र लेनदेन पर 1% TDS का नियम भी जारी है। हालांकि, इस साल क्रिप्टो बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव लेनदेन की रिपोर्टिंग से जुड़ा है।

1 अप्रैल 2026 से लागू धारा 285BAA के तहत निर्धारित रिपोर्टिंग संस्थाओं को क्रिप्टो एसेट से जुड़े लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को तय प्रारूप और समयसीमा में देनी होगी। इसका मतलब है कि सरकार अब केवल निवेशकों से टैक्स वसूलने तक सीमित नहीं है, बल्कि क्रिप्टो लेनदेन का रिकॉर्ड भी ज्यादा व्यवस्थित तरीके से जुटाया जा रहा है।

30% टैक्स और 1% TDS में कोई बदलाव नहीं

भारत में VDA के ट्रांसफर से होने वाली आय पर 30% टैक्स का नियम पहले की तरह लागू है। आय की गणना करते समय अधिग्रहण की लागत को घटाने की अनुमति है, लेकिन इसके अलावा सामान्य कारोबारी खर्चों की कटौती नहीं की जा सकती। VDA से हुए नुकसान को दूसरी आय के खिलाफ समायोजित करने या आगे ले जाने की भी अनुमति नहीं है।

इसके अलावा, निवासी व्यक्ति को VDA ट्रांसफर के बदले भुगतान करते समय धारा 194S के तहत 1% TDS लागू होता है। कुछ छोटे लेनदेन के लिए सीमा भी निर्धारित है। आयकर विभाग के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में व्यक्ति या HUF के लिए सालाना $50,000 रुपये तक और अन्य भुगतानकर्ताओं के लिए $10,000 रुपये तक के कुल भुगतान पर TDS लागू नहीं होता।

इसलिए भारतीय क्रिप्टो निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नई रिपोर्टिंग व्यवस्था का मतलब टैक्स दर में बढ़ोतरी नहीं है। मौजूदा 30% टैक्स और 1% TDS व्यवस्था बनी हुई है।

अब Crypto Transactions की रिपोर्टिंग भी होगी

इस पूरे बदलाव का सबसे अहम हिस्सा धारा 285BAA है। इसके तहत निर्धारित रिपोर्टिंग संस्थाओं को क्रिप्टो एसेट से जुड़े लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी। यह प्रावधान Finance Act, 2025 के जरिए जोड़ा गया था और 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुआ।

इसका असर खास तौर पर उन संस्थाओं पर पड़ेगा जिन्हें सरकार रिपोर्टिंग इकाई के तौर पर निर्धारित करती है। क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और संबंधित सेवा प्रदाताओं के लिए इसका मतलब है कि लेनदेन से जुड़ा रिकॉर्ड रखने और सरकार को जानकारी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बढ़ेगी।

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अगर जमा की गई जानकारी में कोई कमी पाई जाती है, तो संबंधित संस्था को उसे सुधारने का मौका दिया जा सकता है। तय अवधि में गलती ठीक नहीं होने पर इसे गलत जानकारी देने के तौर पर माना जा सकता है। इससे क्रिप्टो कारोबार करने वाले प्लेटफॉर्म के लिए अनुपालन की जिम्मेदारी पहले की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।

Crypto Investors पर क्या होगा असर?

निवेशकों के लिए इस बदलाव का सबसे बड़ा असर यह हो सकता है कि क्रिप्टो लेनदेन को छिपाना पहले की तुलना में मुश्किल हो। हालांकि, अपनी आय और लेनदेन की जानकारी सही तरीके से देना पहले से ही कर नियमों का हिस्सा है।

जुलाई 2026 में Moneycontrol ने भी बताया था कि क्रिप्टो निवेशकों को अपने VDA लेनदेन का मिलान Annual Information Statement और Form 26AS जैसे रिकॉर्ड से करने की जरूरत है, खासकर जब निवेश विदेशी प्लेटफॉर्म के जरिए किया गया हो।

आयकर विभाग की नई जानकारी में यह भी स्पष्ट है कि VDA की परिभाषा अब व्यापक है। इसमें क्रिप्टो एसेट, NFT और कुछ अन्य डिजिटल एसेट शामिल हैं, जबकि भारतीय मुद्रा, CBDC, विदेशी मुद्रा और सरकार द्वारा बाहर रखी गई कुछ डिजिटल संपत्तियां इसके दायरे में नहीं आतीं।

भारत का Crypto Framework अब Tax और Tracking पर केंद्रित

भारत में क्रिप्टो को लेकर मौजूदा व्यवस्था एक अलग स्थिति पेश करती है। डिजिटल एसेट से होने वाली आय पर टैक्स लगाया जा रहा है और सेवा प्रदाताओं के लिए मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े नियम भी लागू हैं, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मुद्रा का दर्जा नहीं दिया गया है। Business Standard ने जुलाई 2026 में भी इस व्यवस्था को रेखांकित किया था, जिसमें 30% टैक्स, 1% TDS और FIU-IND के तहत अनुपालन शामिल है।

ऐसे में 2026 का नया बदलाव टैक्स दर से ज्यादा निगरानी और रिपोर्टिंग से जुड़ा है। निवेशकों के लिए 30% टैक्स और 1% TDS फिलहाल पहले की तरह जारी हैं, जबकि प्लेटफॉर्म के लिए लेनदेन की जानकारी सरकार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

इसका सीधा मतलब है कि भारत में क्रिप्टो कारोबार करने वालों के लिए सही रिकॉर्ड रखना और अपनी आय की उचित जानकारी देना अब और महत्वपूर्ण हो गया है।

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