
क्रिप्टो पर भारत में अब आएगा बड़ा फैसला? संसद की समिति ने पूरी की समीक्षा
भारत में Crypto Regulation को लेकर संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने सालभर की समीक्षा पूरी कर ली है। सरकार अगले सप्ताह जवाब दे सकती है, जिसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।

भारत में Crypto और Virtual Digital Assets को लेकर लंबे समय से चल रही नीति संबंधी चर्चा अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने क्रिप्टो नीति पर करीब एक साल तक चली बैठकों और विचार-विमर्श की प्रक्रिया को पूरा कर लिया है। समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने बताया कि सरकार अगले सप्ताह इस मुद्दे पर अपना जवाब देगी। इसके बाद समिति अपनी औपचारिक रिपोर्ट तैयार करके पेश करेगी।
यह घटनाक्रम भारत के Crypto Sector के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि देश में Digital Assets को लेकर अभी तक कोई व्यापक अलग कानून नहीं है। सरकार ने Crypto को कानूनी मुद्रा का दर्जा नहीं दिया है, लेकिन इसके कारोबार और इससे जुड़े प्लेटफॉर्म पूरी तरह प्रतिबंधित भी नहीं हैं। ऐसे में लंबे समय से नियमन को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठती रही है।
सितंबर 2025 से चल रही थी चर्चा
संसदीय समिति ने Virtual Digital Assets से जुड़ी चर्चा सितंबर 2025 में शुरू की थी। इसके बाद समिति ने आर्थिक मामलों के विभाग के अलावा Reserve Bank of India, Central Board of Direct Taxes और Digital Asset क्षेत्र से जुड़े दूसरे पक्षों से भी जानकारी ली।
16 सितंबर को हुई बैठक को समिति की सालभर की प्रक्रिया की अंतिम समीक्षा के तौर पर देखा गया। महताब के अनुसार समिति ने अलग-अलग पक्षों के विचार सुने हैं और अब सरकार से औपचारिक जवाब मिलने के बाद रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
समिति के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत को Crypto और दूसरे Virtual Digital Assets के लिए किस तरह का नियामकीय ढांचा तैयार करना चाहिए। चर्चा में निवेशकों की सुरक्षा, अवैध गतिविधियों पर रोक, कर व्यवस्था और Digital Asset कारोबार की निगरानी जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं।
नियमन को लेकर अब भी कई सवाल
महताब ने चर्चा के दौरान संकेत दिया कि समिति के सामने इस मुद्दे को लेकर अभी अलग-अलग विचार मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सरकार फिलहाल Virtual Digital Assets को स्वीकार नहीं करती और न ही उन्हें पूरी तरह नियमन के दायरे में लाने की दिशा में आगे बढ़ी है। लेकिन नियमन का अभाव भी गलत इस्तेमाल की गुंजाइश बढ़ा सकता है।
भारत में Crypto से जुड़ी गतिविधियों पर पहले से ही कुछ नियम लागू हैं। Crypto Exchanges और दूसरे संबंधित कारोबारों को Anti-Money Laundering व्यवस्था के तहत Financial Intelligence Unit के साथ पंजीकरण कराना पड़ता है। वहीं Crypto से होने वाली आय पर कर व्यवस्था भी लागू है।
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हालांकि, इन मौजूदा प्रावधानों को एक व्यापक Crypto कानून का विकल्प नहीं माना जाता। यही वजह है कि संसद की समिति की आगामी रिपोर्ट पर Crypto Industry और निवेशकों की नजर बनी हुई है।
UPI पर भी उठे सवाल
बैठक के दौरान UPI से जुड़े कुछ सवाल भी सामने आए। हालांकि, महताब ने स्पष्ट किया कि UPI का मुद्दा बैठक के आधिकारिक एजेंडे का हिस्सा नहीं था और इस पर अनौपचारिक रूप से चर्चा हुई।
उनके अनुसार UPI से जुड़े मुद्दे पर अक्टूबर में गठित होने वाली एक नई समिति के जरिए आगे चर्चा की जा सकती है। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में UPI पहले ही Digital Payments का एक बड़ा माध्यम बन चुका है और Crypto तथा Digital Asset गतिविधियों के साथ इसके संभावित संबंधों को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
अगले सप्ताह मिल सकता है सरकार का जवाब
अब अगला बड़ा कदम सरकार की ओर से आएगा। वित्त मंत्रालय से समिति को अगले सप्ताह Crypto Policy पर औपचारिक जवाब मिलने की उम्मीद है। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करके संसद में पेश करेगी।
यह रिपोर्ट अपने आप में कोई नया कानून नहीं होगी, लेकिन इससे यह संकेत मिल सकता है कि भारत में Crypto को लेकर नीति किस दिशा में आगे बढ़ सकती है। रिपोर्ट के बाद सरकार को कानून बनाने, मौजूदा नियमों में बदलाव करने या नियमन के मौजूदा ढांचे को आगे बढ़ाने जैसे विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है।
Crypto Industry के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही होगी कि आने वाली नीति में कारोबार, कर, निवेशक सुरक्षा और अवैध गतिविधियों की रोकथाम को किस तरह संतुलित किया जाता है। फिलहाल अंतिम दिशा सरकार और संसद की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
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