वैश्विक निवेश प्रबंधन कंपनी Franklin Templeton और ब्लॉकचेन आधारित फाइनेंस प्लेटफॉर्म Ondo Finance ने मिलकर एक नई पहल की घोषणा की है। इस पहल के तहत टोकनाइज्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF लॉन्च किए जाएंगे, जिन्हें निवेशक सीधे अपने क्रिप्टो वॉलेट के जरिए खरीद और बेच सकेंगे।
इस कदम को पारंपरिक वित्त (TradFi) और डिजिटल एसेट्स की दुनिया के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निवेश के तरीके में बड़ा बदलाव आ सकता है।
24x7 ट्रेडिंग का नया मॉडल
इस नई व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि निवेशक:
इन टोकनाइज्ड ETF में 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन ट्रेडिंग कर सकेंगे।
ब्लॉकचेन आधारित इस नए मॉडल में बाजार कभी बंद नहीं होगा।
निवेशक किसी भी समय, अपने क्रिप्टो वॉलेट के जरिए इन एसेट्स में निवेश कर पाएंगे।
पारंपरिक ETF जहां सीमित बाजार समय में ट्रेड होते हैं, वहीं यह मॉडल निरंतर ट्रेडिंग की सुविधा प्रदान करता है।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम
इस मॉडल में Ondo Finance एक विशेष ढांचे के तहत Franklin Templeton के ETF शेयर खरीदेगा और उनके आधार पर डिजिटल टोकन जारी करेगा। निवेशकों को सीधे शेयर नहीं मिलेंगे, बल्कि उन्हें उन फंड्स से मिलने वाले रिटर्न का अधिकार मिलेगा।
ये टोकन ब्लॉकचेन पर मौजूद होंगे, जिससे इन्हें अन्य डिजिटल सेवाओं में इस्तेमाल किया जा सकेगा। उदाहरण के तौर पर, निवेशक इन्हें DeFi प्लेटफॉर्म पर गिरवी रख सकते हैं या अन्य वित्तीय उत्पादों में उपयोग कर सकते हैं।
किन बाजारों में होगी शुरुआत
शुरुआत में यह सेवा यूरोप, एशिया-प्रशांत, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जाएगी अमेरिका में इसे लॉन्च करने के लिए अभी नियामकीय मंजूरी का इंतजार किया जाएगा।
यह कदम दिखाता है कि कंपनियां ऐसे बाजारों को प्राथमिकता दे रही हैं जहां डिजिटल एसेट्स को लेकर नियम अपेक्षाकृत स्पष्ट हैं।
5 अलग-अलग ETF होंगे शामिल
इस पहल के तहत शुरुआत में पांच अलग-अलग ETF पेश किए जाएंगे। इनमें
अमेरिकी शेयर
बॉन्ड और
सोने जैसे पारंपरिक एसेट्स शामिल होंगे।
इससे निवेशकों को अलग-अलग जोखिम स्तर और निवेश विकल्प मिलेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मॉडल उन लोगों को आकर्षित कर सकता है जो पहले से क्रिप्टो वॉलेट और स्टेबलकॉइन का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन पारंपरिक निवेश विकल्पों तक आसानी से पहुंच नहीं बना पाते।
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पारंपरिक ब्रोकरेज की जरूरत कम
इस नई प्रणाली का एक बड़ा फायदा यह है कि निवेश के लिए पारंपरिक ब्रोकरेज खाते की जरूरत कम हो जाएगी। निवेशक सीधे अपने डिजिटल वॉलेट से निवेश कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया आसान और तेज हो सकती है।
इसके अलावा, ब्लॉकचेन तकनीक के कारण ट्रांजैक्शन का निपटान भी तेजी से होगा और लागत कम होने की संभावना है।
बाजार में बढ़ रही टोकनाइजेशन की प्रवृत्ति
पिछले कुछ समय से वित्तीय दुनिया में टोकनाइजेशन तेजी से बढ़ रहा है। इसका मतलब है कि पारंपरिक एसेट्स को डिजिटल टोकन के रूप में बदलकर ब्लॉकचेन पर उपलब्ध कराना।
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे बाजार अधिक पारदर्शी, तेज और वैश्विक हो सकता है।
Franklin Templeton पहले भी ब्लॉकचेन आधारित फंड लॉन्च कर चुका है और अब यह कदम उसी रणनीति का विस्तार माना जा रहा है।
निवेश के भविष्य की ओर संकेत
इस साझेदारी को निवेश के भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में और भी बड़ी वित्तीय कंपनियां अपने उत्पादों को ब्लॉकचेन पर लाने की कोशिश कर सकती हैं।
हालांकि, इस क्षेत्र में नियामकीय चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं, खासकर अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में।
फिलहाल, यह पहल दिखाती है कि पारंपरिक वित्त और क्रिप्टो इकोसिस्टम धीरे-धीरे एक दूसरे के करीब आ रहे हैं। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो निवेश की दुनिया में एक नई व्यवस्था देखने को मिल सकती है, जहां डिजिटल वॉलेट ही निवेश का मुख्य माध्यम बन जाए।
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