ईरान ने हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए Bitcoin को भुगतान के विकल्प के रूप में स्वीकार करने का संकेत दिया है। यह कदम पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने और डॉलर आधारित व्यवस्था पर निर्भरता कम करने की कोशिश माना जा रहा है।
हालांकि, जमीन पर तस्वीर कुछ अलग है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान Bitcoin को एक रणनीतिक संपत्ति की तरह देख रहा है, लेकिन वास्तविक लेनदेन में अब भी USDT यानी डॉलर से जुड़ा स्थिर कॉइन सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान तेल टैंकरों से शुल्क लेने के लिए चीनी युआन, USDT और Bitcoin तीनों विकल्पों पर काम कर रहा है। लेकिन अब तक ऐसा कोई स्पष्ट ऑनचेन सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि किसी जहाज ने वास्तव में Bitcoin में भुगतान किया हो।
Bitcoin क्यों है ईरान के लिए अहम
ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। ऐसे में उसे ऐसे भुगतान माध्यम की जरूरत है, जिसे पारंपरिक बैंकिंग नेटवर्क या डॉलर आधारित प्रणाली आसानी से रोक न सके।
विश्लेषकों का मानना है कि Bitcoin की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यह किसी एक देश, बैंक या संस्था के नियंत्रण में नहीं है। इसी वजह से ईरान इसे केवल निवेश नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साधन की तरह देख रहा है।
Bitcoin का इस्तेमाल करने से ईरान को अंतरराष्ट्रीय भुगतान ऐसे माध्यम से लेने का मौका मिल सकता है, जिसे पश्चिमी प्रतिबंधों के जरिए रोकना मुश्किल हो। यही वजह है कि हाल के महीनों में ईरान ने अपनी सरकारी नीतियों में Bitcoin को ज्यादा महत्व देना शुरू किया है।
विशेषज्ञ Sam Lyman ने कहा कि ईरान के लिए Bitcoin का महत्व उसके मूल्य से ज्यादा उसकी स्वतंत्रता में है। अगर किसी देश को बिना बैंकिंग नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय भुगतान लेना हो, तो Bitcoin उसके लिए उपयोगी विकल्प बन सकता है।
फिर भी असली लेनदेन में USDT आगे क्यों?
हालांकि Bitcoin को लेकर चर्चा बढ़ रही है, लेकिन तेल शुल्क जैसे बड़े और नियमित भुगतान में इसकी कुछ सीमाएं हैं। Bitcoin की कीमत तेजी से ऊपर नीचे होती रहती है। ऐसे में अगर कोई कंपनी आज भुगतान करे और अगले दिन कीमत गिर जाए, तो उसे नुकसान हो सकता है।
इसी वजह से अधिकतर कंपनियां और कारोबारी USDT का इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं। Tether USDt की कीमत लगभग हमेशा 1 डॉलर के आसपास रहती है, इसलिए इसमें उतार चढ़ाव का खतरा कम होता है। यही कारण है कि ईरान से जुड़े ज्यादातर क्रिप्टो भुगतान अभी भी USDT में हो रहे हैं।
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विशेषज्ञों के अनुसार, USDT का इस्तेमाल इसलिए भी आसान है क्योंकि इसे तुरंत दूसरी मुद्रा में बदला जा सकता है और इसका इस्तेमाल दुनिया भर के क्रिप्टो बाजारों में होता है। दूसरी ओर, Bitcoin का इस्तेमाल बड़े भुगतान में करने पर कीमत और समय, दोनों को लेकर जोखिम रहता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान की कुल क्रिप्टो गतिविधियों का बड़ा हिस्सा अब भी डॉलर आधारित स्थिर कॉइन में होता है। इससे यह साफ है कि Bitcoin को भले ही राजनीतिक और रणनीतिक महत्व दिया जा रहा हो, लेकिन कारोबार की दुनिया में USDT अभी भी ज्यादा उपयोगी माना जा रहा है।
क्या बदल सकता है वैश्विक भुगतान का तरीका?
ईरान का यह कदम केवल एक देश की नीति नहीं माना जा रहा। कई विश्लेषकों का मानना है कि अगर किसी बड़े तेल उत्पादक देश ने सफलतापूर्वक क्रिप्टो में भुगतान लेना शुरू कर दिया, तो इससे वैश्विक व्यापार का तरीका बदल सकता है।
अगर आने वाले महीनों में ईरान वास्तव में Bitcoin या USDT में तेल शुल्क लेना शुरू करता है, तो दूसरे प्रतिबंध झेल रहे देश भी इसी रास्ते पर चल सकते हैं। इससे डॉलर की भूमिका पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि ईरान आखिर किस दिशा में आगे बढ़ता है। अभी तक संकेत यही हैं कि Bitcoin को एक रणनीतिक विकल्प की तरह रखा जाएगा, जबकि रोजमर्रा और बड़े भुगतान के लिए USDT का इस्तेमाल जारी रहेगा।
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