महाराष्ट्र की एक अदालत ने क्रिप्टो एक्सचेंज CoinDCX के सह-संस्थापकों Sumit Gupta और Niraj Khandelwal को राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी मामले में कहा कि प्रारंभिक जांच में कोई स्पष्ट मामला नहीं बनता है।
ठाणे की मजिस्ट्रेट अदालत ने दोनों को जमानत भी प्रदान की।
71 लाख रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला लगभग ₹71 लाख की कथित ठगी से जुड़ा था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे एक ऑनलाइन क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए धोखा दिया गया।
शुरुआती आरोप CoinDCX के सह-संस्थापकों पर भी लगाए गए थे, लेकिन अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर यह पाया गया कि उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं होती।
अदालत ने जमानत क्यों दी?
अदालत ने आदेश में कहा:
उपलब्ध साक्ष्यों में संस्थापकों की सीधी संलिप्तता नहीं
जांच अधिकारी को जमानत पर कोई आपत्ति नहीं
सामान्य कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है
दोनों संस्थापकों को ₹50,000 के निजी मुचलके पर जमानत दी गई और जांच में सहयोग करने की शर्त रखी गई।
फर्जी वेबसाइट से हुई ठगी
मामले की जांच में सामने आया कि यह धोखाधड़ी एक नकली वेबसाइट के माध्यम से की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार ठगों ने एक ऐसी वेबसाइट बनाई थी जो असली क्रिप्टो एक्सचेंज जैसी दिखती थी।
कंपनी का कहना है कि यह वेबसाइट उनके आधिकारिक प्लेटफॉर्म से जुड़ी नहीं थी। इस नकली साइट के जरिए निवेशकों को क्रिप्टो ट्रेडिंग का झांसा दिया गया और उनसे पैसे ठगे गए।
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार शिकायतकर्ता ने भी स्वीकार किया कि जिस व्यक्ति से वह मिला था वह कंपनी का प्रतिनिधि नहीं था। यह मुलाकात मुंबई के पास मुम्ब्रा इलाके के एक कैफे में हुई थी जहां निवेश का सौदा तय किया गया था।
मुख्य आरोपी ने लौटाई रकम
अदालत में दायर हलफनामे में शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि इस मामले के मुख्य आरोपी ने उससे ली गई रकम वापस कर दी है। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच मामला आपसी सहमति से सुलझा लिया गया।
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न्यायालय ने कहा कि जब शिकायतकर्ता और मुख्य आरोपी के बीच विवाद का निपटारा हो चुका है और संस्थापकों की भूमिका साबित नहीं होती, तो उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का कोई आधार नहीं बनता।
कंपनी ने क्या कहा
CoinDCX ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अदालत की कार्यवाही से यह स्पष्ट हुआ कि मामला तीसरे पक्ष द्वारा की गई नकल या प्रतिरूपण से जुड़ा था। कंपनी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि धोखाधड़ी करने वालों ने एक ऐसा डोमेन इस्तेमाल किया जो असली प्लेटफॉर्म जैसा दिखता था।
हमारे संवाददाता द्वारा संपर्क किए जाने पर CoinDCX ने निम्नलिखित विशेष बयान साझा किया:
CoinDCX ने माननीय अदालत के उस आदेश का स्वागत किया है जिसमें उसके सह-संस्थापकों को जमानत दी गई है। अदालत ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ पहली नजर में कोई मामला बनता हुआ नहीं दिखता।अदालत ने कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को ध्यान में रखा। इनमें यह बात भी शामिल है कि कथित घटना के समय CoinDCX के सह-संस्थापक उस स्थान पर मौजूद नहीं थे। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि कुछ अन्य लोगों ने खुद को CoinDCX के सह-संस्थापक बताकर शिकायतकर्ता को धोखा दिया था।शिकायतकर्ता ने भी अदालत में पुष्टि की कि जिन लोगों ने उससे संपर्क किया था वे Sumit Gupta या Neeraj Khandelwal नहीं थे। वे अज्ञात लोग थे जो उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। जांच अधिकारी ने भी जमानत दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।कंपनी का कहना है कि यह स्थिति CoinDCX के पहले के रुख के अनुरूप है। कंपनी और उसके नेतृत्व का इस घटना से कोई संबंध नहीं था। बल्कि वे भी इस धोखाधड़ी में पहचान के दुरुपयोग के शिकार बने।कंपनी के अनुसार यह मामला एक फर्जी वेबसाइट से जुड़ा है। कुछ अज्ञात लोगों ने coindcx.pro नाम की वेबसाइट बनाकर CoinDCX का रूप धारण किया और उपयोगकर्ताओं को धोखा देने की कोशिश की।
कंपनी का कहना है कि इस तरह के फिशिंग और प्रतिरूपण हमले तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर उन ब्रांड्स पर जो वित्तीय सेवाओं या क्रिप्टो से जुड़े हैं।
निवेशकों को दी गई चेतावनी
घटना के बाद कंपनी ने निवेशकों से सावधान रहने की अपील की है। कंपनी का कहना है कि उपयोगकर्ता हमेशा आधिकारिक वेबसाइट और सत्यापित सोशल मीडिया खातों से ही जानकारी लें।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ऐसे साइबर अपराध भी बढ़ रहे हैं। कई मामलों में अपराधी लोकप्रिय कंपनियों की नकली वेबसाइट या ऐप बनाकर लोगों को निवेश का झांसा देते हैं।
बढ़ते साइबर अपराध और नियामकीय चुनौती
क्रिप्टो उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल निवेश के साथ सुरक्षा जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। निवेशकों को किसी भी प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांचनी चाहिए।
फिलहाल अदालत के इस फैसले से CoinDCX के संस्थापकों को कानूनी राहत मिल गई है। हालांकि जांच एजेंसियां अब भी यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नकली वेबसाइट बनाकर धोखाधड़ी करने वाले असली आरोपी कौन थे और उन्होंने यह योजना कैसे बनाई।
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